Tuesday, February 10, 2026
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जो पुलिस सिखाती है कानून, वही क्यों तोड़ रही नियम? बिना PUCC के दौड़ रहे 320 विभागीय वाहन — जवाबदेही कौन लेगा?

देहरादून: सड़कों पर बिना वैध दस्तावेज या एक्सपायर वैलिडिटी पर आम जनता के वाहनों का तुरंत चालान करने वाली व्यवस्था अब खुद सवालों के घेरे में है। परिवहन विभाग के सरकारी आंकड़ों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि पुलिस विभाग सहित कई सरकारी विभागों की सैकड़ों गाड़ियां नियमों का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर दौड़ रही हैं—इनका प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC/PUCC) समाप्त हो चुका है।

PUCC Lapses Found in 320 Police Vehicles in Dehradun

व्हीकल सॉफ्टवेयर में किए गए डेटा सत्यापन के दौरान सामने आया कि सीओ सिटी और एसपी देहात की सड़कों पर चल रही गाड़ियों के भी PUC की वैधता समाप्त पाई गई। इसके बावजूद ये वाहन नियमित रूप से संचालित हो रहे थे। यह स्थिति कानून के समान अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

731 सरकारी वाहन नियमों के दायरे से बाहर

परिवहन विभाग के अनुसार, कुल 731 सरकारी वाहन (दोपहिया और भारी वाहन) ऐसे हैं जिनके प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध नहीं हैं। विभागवार आंकड़े इस प्रकार हैं:-
पुलिस विभाग: 320
वन विभाग: 38
पशुपालन (Animal Husbandry): 57
डीजी हेल्थ: 38
कमर्शियल टैक्स: 7
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर: 22
अन्य विभाग: GST, आबकारी, राज्य संपत्ति विभाग, रेवेन्यू बोर्ड, जिला प्रशासन आदि

आरटीओ का नोटिस अलर्ट: 7 दिन की मोहलत

आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि हाल ही में आरटीओ कार्यालय की एक गाड़ी का रोड टैक्स जमा न होने पर चालान किया गया था। उसी क्रम में अन्य सरकारी वाहनों का डेटा खंगाला गया, जिसमें यह व्यापक अनियमितता सामने आई।
अब सभी संबंधित विभागों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर जिन वाहनों का PUC अपडेट नहीं होगा, उनका चालान किया जाएगा—और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

क्या कहते हैं नियम और कितना जुर्माना?

नियम 115(7): प्रत्येक वाहन के लिए PUCC अनिवार्य
धारा 190(2): उल्लंघन पर दंड और लाइसेंस निलंबन
पहला अपराध: ₹2,500 समन शुल्क + DL 3 माह निलंबन
दूसरा/आगे: ₹5,000 समन शुल्क + DL 3 माह निलंबन
नियम 116: वाहन स्वामी की जिम्मेदारी—7 दिन में अनुपालन नहीं तो दंडात्मक कार्रवाई

पर्यावरण और भरोसे का सवाल

PUC नियम केवल कागज़ी औपचारिकता नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण नियंत्रण का अहम औज़ार हैं। जब सरकारी वाहन ही नियमों से बाहर हों, तो आम जनता में भरोसा कमजोर पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नियम सब पर बराबर लागू होने चाहिए।
परिवहन विभाग की सख्ती ने एक जरूरी बहस छेड़ दी है—कानून लागू कराने वालों को पहले खुद पालन करना होगा। आने वाला सप्ताह तय करेगा कि विभागीय वाहन समय पर नियमों में लौटते हैं या चालान और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करते हैं।

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