Tuesday, January 20, 2026
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उत्तराखंड: 13 साल में 17 निदेशक बदले, ऑडिट निदेशालय में नेतृत्व की अस्थिरता बनी गंभीर चुनौती

देहरादून: प्रदेश के विभिन्न विभागों में हर साल होने वाले करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की निगरानी करने वाला उत्तराखंड ऑडिट निदेशालय लंबे समय से प्रशासनिक अस्थिरता से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि यहां कोई भी निदेशक एक वर्ष तक पद पर टिक नहीं पा रहा। बीते 13 वर्षों में सरकार अब तक 17 निदेशकों की नियुक्ति और तबादला कर चुकी है, जो अपने आप में एक गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है।

Uttarakhand Audit Directorate has seen 17 directors in 13 years

शासन ने हाल ही में वित्त सेवा के अधिकारी अपर सचिव मनमोहन मैनाली को ऑडिट निदेशालय का 18वां निदेशक नियुक्त किया था, लेकिन यह आदेश ऑडिट एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध पाया गया। दरअसल, 30 नवंबर 2018 को विभागीय ढांचे में निदेशक पद को आईएएस संवर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। मैनाली आईएएस नहीं बल्कि वित्त सेवा अधिकारी थे, जिस कारण सोमवार को शासन को यह तबादला आदेश रद्द करना पड़ा।

ऑडिट अनुभाग से स्वतंत्र निदेशालय तक का सफर

राज्य गठन के बाद ऑडिट कार्य एक अनुभाग के रूप में कोषागार एवं वित्त सेवाओं के अधीन संचालित होता था। दिसंबर 2012 में ऑडिट एक्ट लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक स्वतंत्र ऑडिट निदेशालय की स्थापना हुई। इस नवगठित निदेशालय की पहली निदेशक आईएएस सौजन्या बनीं, लेकिन उनका कार्यकाल भी महज एक साल से कम रहा।
उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के संस्थापक रमेश चंद्र पांडे का आरोप है कि निदेशकों के बार-बार बदलाव से विभाग की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है। वर्तमान स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये से जुड़ी विशेष ऑडिट रिपोर्टें फाइलों में धूल फांक रही हैं, जिन पर समय पर निर्णय नहीं हो पा रहा।

इस पद पर पहले भी रह चुके हैं वर्तमान निदेशक

फिलहाल आईएएस दिलीप जावलकर ऑडिट निदेशालय के 17वें निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले भी वे दो बार इस पद पर रह चुके हैं, जो विभाग में अस्थिरता को दर्शाता है।

अब तक के निदेशकों का कार्यकाल (तालिका)

सौजन्या :- 18 दिसंबर 2012 – 01 दिसंबर 2013
दिलीप जावलकर :- 02 दिसंबर 2013 – 09 फरवरी 2014
आस्था लूथरा :- 10 फरवरी 2014 – 06 फरवरी 2015
श्रीधर बाबू अद्दांकी :- 07 फरवरी 2015 – 17 अप्रैल 2015
विनय शंकर पांडेय :- 18 अप्रैल 2015 – 31 मई 2017
श्रीधर बाबू अद्दांकी 01 जुलाई 2017 – 05 सितंबर 2017
अमित नेगी :- 06 सितंबर 2017 – 15 अप्रैल 2018
सविन बंसल :- 16 अप्रैल 2018 – 06 फरवरी 2019
अमित नेगी 21 फरवरी 2019 – 18 मार्च 2019
सविन बंसल :- 19 मार्च 2019 – 28 जून 2019
एस.ए. मुरुगेशन :- 29 जून 2019 – 05 अगस्त 2020
डॉ. अहमद इकबाल :- 06 अगस्त 2020 – 09 मई 2021
डॉ. वी. षणमुगम :- 19 मई 2021 – 17 अगस्त 2021
डॉ. एस.एन. पांडेय :- 18 अगस्त 2021 – 02 जुलाई 2024
विनोद कुमार सुमन :- 03 जुलाई 2024 – 13 मई 2025
डॉ. वी. षणमुगम :- 14 मई 2025 – 29 जून 2025
दिलीप जावलकर :- 30 जून 2025 – वर्तमान

स्थायित्व के बिना पारदर्शिता मुश्किल

ऑडिट जैसे संवेदनशील विभाग में नेतृत्व का बार-बार बदलना न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता को कमजोर करता है, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते स्थायी और नियमसम्मत नियुक्तियां नहीं की गईं, तो लंबित ऑडिट मामलों का बोझ और बढ़ सकता है।

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