देहरादून: शहर के वार्ड-24 शिवाजी नगर की शिव कालोनी और आसपास के इलाकों में लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं, बल्कि कीड़े-जोंक और बदबू से भरा पानी नसीब हो रहा है। हालात इतने भयावह हैं कि लोग पानी पीना तो दूर, उससे खाना बनाना और कपड़े धोना भी जोखिम मान रहे हैं। डेढ़ साल से शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन जल संस्थान की उदासीनता जस की तस बनी हुई है।
नलों से आने वाले पानी में कीचड़, दुर्गंध और मृत-जीवित कीड़े साफ नजर आए। स्थानीय लोगों में बीमारी फैलने का डर गहराता जा रहा है।
दरअसल, वार्ड-24 में करीब 12 हजार की आबादी रहती है। सहारनपुर-बल्लूपुर मार्ग स्थित शिव कालोनी की लगभग 1500 आबादी सबसे अधिक प्रभावित है। मजबूरी में संपन्न लोग आरओ का सहारा ले रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पानी उबालकर या दूर-दराज से पानी ढोकर जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
सीवर और पेयजल लाइन साथ-साथ, रिसाव बना जहर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एडीबी द्वारा बिछाई गई सीवर लाइन घरों के पास से गुजरती है और उसी के सटकर जल संस्थान की पेयजल लाइन डाली गई है। सीवर लाइन में लीकेज होते ही गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में घुस रहा है। कई जगहों पर पुरानी पाइपलाइन जर्जर है, जो गंदी नालियों से होकर गुजरती है। नतीजा, हर सप्लाई के साथ घरों में बीमारी का खतरा बना रहता है।
सवालों के घेरे में जलसंस्थान
जब पानी में कीड़े आ रहे हों, बदबू हो और बीमारी का खतरा मंडरा रहा हो, तब शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी किसकी है? कब बदली जाएंगी जर्जर लाइनें? कब अलग होंगी सीवर और पेयजल लाइनें? जवाब का इंतजार अब भी क्षेत्र की जनता ही कर रही है।


