Friday, February 27, 2026
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HomeUttarakhandनगर निकायों की बदलेगी तस्वीर? वित्तीय आत्मनिर्भरता पर बड़ा मंथन

नगर निकायों की बदलेगी तस्वीर? वित्तीय आत्मनिर्भरता पर बड़ा मंथन

स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने पर मंथन, राज्य की अर्थव्यवस्था में बढ़ेगी भागीदारी

उत्तराखंड में नगर निगम, नगर पालिका और जिला पंचायतों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने पर मंथन। भूमि प्रबंधन, राजस्व सुधार और नीड-आधारित जिला योजना मॉडल पर जोर। उत्तराखंड में नगर निकायों और जिला पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा मंथन हुआ है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन और राज्य के छठे वित्त आयोग के अध्यक्ष एन रविशंकर की मौजूदगी में हुई बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और राजस्व बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक का फोकस साफ था—नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और जिला पंचायतों को सिर्फ अनुदान पर निर्भर रहने की बजाय मजबूत आर्थिक आधार देना।

क्यों पिछड़ रहे हैं स्थानीय निकाय?

चर्चा के दौरान यह सामने आया कि वित्तीय आत्मनिर्भरता के अवसर मौजूद होने के बावजूद स्थानीय निकाय अपेक्षित स्तर तक सक्षम नहीं बन पाए हैं। इसके पीछे कई कारण बताए गए:

  • सीमित स्थानीय राजस्व स्रोत

  • पारंपरिक और धीमी कार्यशैली

  • प्रभावी एवं स्पष्ट बायलॉज का अभाव

  • भूमि प्रबंधन में कमज़ोरियां

  • अत्यधिक राजनीतिक केंद्रित निर्णय प्रणाली

इन कारणों से राजस्व सृजन की संभावनाएं पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पा रही हैं।

राज्य वित्त आयोग से व्यावहारिक सुझावों की अपेक्षा

मुख्य सचिव ने राज्य वित्त आयोग से कहा कि स्थानीय शहरी निकायों और जिला पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए व्यावहारिक, समयबद्ध और क्रियान्वयन योग्य सुझाव दिए जाएं।

लक्ष्य यह है कि:

  • निकाय अपने स्वयं के संसाधनों में वृद्धि करें

  • नई आय के स्रोत विकसित हों

  • प्रशासनिक क्षमता में सुधार हो

  • स्थानीय स्तर पर विकास योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हों

भूमि प्रबंधन और बायलॉज में सुधार पर जोर

आयोग की ओर से सुझाव दिया गया कि शहरी निकायों के लिए भूमि प्रबंधन और राजस्व सृजन से जुड़े बायलॉज को मजबूत किया जाए।

  • नवाचारों को अपनाने (Adoption of Innovation)

  • विशेषज्ञता आधारित कार्य संस्कृति

  • स्पष्ट नियम और पारदर्शी प्रक्रिया

  • प्रभावी क्रियान्वयन तंत्र

इन सुधारों के बिना वित्तीय आत्मनिर्भरता संभव नहीं होगी।

जिला योजना में बदलाव की जरूरत

बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान में जिला योजना का आवंटन एलोकेशन आधारित है। इसे “नीड और आउटकम” आधारित मॉडल में बदलने की आवश्यकता है, ताकि संसाधनों का उपयोग परिणाम आधारित हो और विकास कार्यों का सीधा प्रभाव दिखे।

क्यों अहम है यह पहल?

स्थानीय निकाय राज्य की विकास संरचना की नींव होते हैं। यदि वे आर्थिक रूप से सक्षम होंगे, तो:

  • स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी

  • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

  • राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

  • केंद्र और राज्य पर वित्तीय दबाव कम होगा

यह पहल उत्तराखंड में विकेंद्रीकृत विकास मॉडल की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

बैठक में आयोग के सदस्य पी.एस. जंगपांगी, एम.सी. जोशी, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर और डॉ. आर. राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आगे क्या?

राज्य वित्त आयोग से अब ठोस और क्रियान्वयन योग्य सिफारिशों की उम्मीद है। यदि भूमि प्रबंधन, बायलॉज सुधार और राजस्व मॉडल में बदलाव लागू होते हैं, तो नगर निकायों की तस्वीर बदल सकती है।

स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समग्र आर्थिक प्रगति की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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