मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में आने और स्वयं अनुभव करने का आह्वान किया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने कहा कि पूर्व सैनिक एक-दो दिन प्रशिक्षण शिविर में रहें, स्वयं देखें कि संघ क्या सिखाता है। यदि उन्हें अच्छा लगे तो जुड़ें, अन्यथा अपने कार्य के लिए भी संघ का सहयोग ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सेना के लोग संघ की बौद्धिक प्रशिक्षण को छोड़ दें तो अनुशासन और प्रशिक्षण के अधिकांश गुण पहले से ही उनमें होते हैं। आर्म्स की ट्रेनिंग सेना का विषय है, लेकिन समाज को भी सेना की तरह संगठित और समन्वित रूप से चलाया जा सकता है।
भागवत ने कहा कि “एक होने के लिए एक जैसा होना जरूरी नहीं है, वह विदेशी सोच है। हमारा विचार है कि हम विविधता में भी एक हैं।”
उन्होंने बताया कि भाजपा को छोड़कर संघ से जुड़े अन्य संगठन गैर-राजनीतिक रूप से समाज परिवर्तन के कार्यों में लगे हैं। देशभर में 1.30 लाख से अधिक सेवा केंद्र संचालित हैं, जहां इच्छुक लोग योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा, “If you have a team, we have a theme.” और जो भी व्यक्ति निस्वार्थ भाव से समाज के लिए कार्य कर रहा है, वह संघ की दृष्टि में स्वयंसेवक के समान है।


