लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और उसके नेतृत्व पर की गई टिप्पणी को अमर्यादित, अनुचित और शर्मनाक बताते हुए सपा से सार्वजनिक माफी की मांग की है। मायावती ने कहा कि रालोद और उसके नेता को लेकर दिए गए ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ जैसे बयान राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व को न केवल रालोद और उसके नेताओं से बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार तथा जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए। सपा पर लगाए जातिवादी राजनीति के आरोप बसपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की राजनीति हमेशा से संकीर्ण सोच और जातिवादी रवैये से प्रभावित रही है। उन्होंने कहा कि सपा का व्यवहार केवल विरोधी दलों के प्रति ही नहीं बल्कि अपने सहयोगी दलों के प्रति भी सम्मानजनक नहीं रहा है। मायावती के अनुसार, इसी तरह की राजनीतिक कार्यशैली के कारण कई बार भाजपा को राजनीतिक लाभ मिला, जबकि धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय की राजनीति को नुकसान उठाना पड़ा।
1993 गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का किया जिक्र मायावती ने 1993 में बने सपा-बसपा गठबंधन और उसके बाद हुए घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन टूटने के बाद 2 जून 1995 को लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में जो घटना हुई, वह भारतीय राजनीति का एक काला अध्याय है। उन्होंने एक बार फिर उस घटना को याद करते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उस दौर की घटनाएं आज भी लोगों के सामने हैं।
2019 गठबंधन टूटने पर भी साधा निशाना बसपा प्रमुख ने 2019 लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद गठबंधन का टूटना सपा के अहंकारी और स्वार्थी रवैये का परिणाम था। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन को मजबूत बनाने के प्रयासों के बावजूद सपा नेतृत्व सकारात्मक भूमिका निभाने में विफल रहा।
पीडीए राजनीति पर भी उठाए सवाल मायावती ने समाजवादी पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केवल नारे और राजनीतिक संदेश देने से सामाजिक न्याय स्थापित नहीं होता, बल्कि इसके लिए ईमानदार नीतियों और व्यवहार की जरूरत होती है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए जनता से सोच-समझकर निर्णय लेने की अपील की और कहा कि प्रदेश के मतदाताओं को उन दलों से सावधान रहना चाहिए जो केवल चुनावी लाभ के लिए समाज को बांटने की राजनीति करते हैं।

