देहरादून: राजधानी देहरादून के कारगी क्षेत्र में स्थित पुरानी कूड़ा डंपिंग साइट पर गुरुवार दोपहर आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने सूखे कूड़े और थर्मोकोल के ढेर में आग लगा दी, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में जहरीला धुआं फैल गया। धुएं की वजह से कई लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और घुटन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
Toxic smoke spread from fire at dumping site in Dehradun
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई, क्योंकि डंपिंग साइट पर लंबे समय से जमा सूखा कचरा, पुराने कपड़े और थर्मोकोल मौजूद था, जो आग पकड़ते ही धुएं का बड़ा कारण बन गया। आग बुझाने के लिए नगर निगम, फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। देर रात करीब एक बजे तक आग बुझाने की कोशिश जारी रही, लेकिन धुआं लंबे समय तक फैलता रहा।
वर्षों से विवादों में पुरानी डंपिंग साइट
गौरतलब है कि कारगी क्षेत्र में नगर निगम के लगभग 100 वार्डों का कूड़ा कई वर्षों से डंप किया जा रहा है। पहले पेट्रोल पंप के पास कूड़ा डंप होने के कारण आसपास रहने वाली करीब 25 हजार आबादी को बदबू और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने कई बार डंपिंग साइट शिफ्ट करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए थे।
मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन बनने के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
कुछ समय पहले स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से क्षेत्र में मैकेनाइज्ड कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण किया गया। इसके बाद कचरे को कैप्सूल बनाकर सेलाकुई-शीशमबाड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट तक भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, निर्माण कार्य और अन्य बाधाओं के चलते पूरा कचरा प्लांट तक नहीं भेजा जा सका, जिससे पुरानी डंपिंग साइट पर काफी मात्रा में कचरा जमा रहा।
अज्ञात लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
इस घटना के बाद नगर निगम की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना ने बताया कि आग लगाने वालों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्वच्छ वायु कार्यक्रम पर करोड़ों का खर्च
नगर निगम की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत करोड़ों रुपये का बजट खर्च किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन शहर के बीचोंबीच कचरे के ढेर में आग लगने की घटना ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिंता की बात यह भी है कि डंपिंग साइट के ठीक बगल में पेट्रोल पंप स्थित है, जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा भी बना रहा।
सूचना देने में देरी का आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना दिन में हुई, लेकिन इसकी जानकारी देर शाम साझा की गई। पुलिस प्रशासन को भी देरी से सूचना मिलने की बात सामने आ रही है। हाल ही में दून लाइब्रेरी सभागार में हुए एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने कूड़े में बार-बार आग लगने को लेकर चिंता जताई थी और इसे जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया था।
देर रात तक धधकता रहा कचरा
सिविल डिफेंस के सेक्टर वार्डन सागर मलिक के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे आग लगने की सूचना मिली थी और टीम करीब ढाई बजे मौके पर पहुंची। रात तक करीब 10 फायर ब्रिगेड वाहन मौके पर पहुंचे, साथ ही नगर निगम की जेसीबी भी लगाई गई। आशंका जताई जा रही है कि नशा करने वाले कुछ लोगों द्वारा आग लगाई गई हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
डंपिंग साइट पर मालिकाना विवाद
पुरानी डंपिंग साइट को लेकर लंबे समय से कुछ लोगों द्वारा मालिकाना हक का दावा भी किया जा रहा है। यह मामला पहले भी चर्चा में रहा है। इसके अलावा, कचरा प्लांट भेजने वाले वाहनों को लेकर अनुबंध, भुगतान और हड़ताल जैसी समस्याएं भी पहले सामने आती रही हैं। ऐसे में अचानक आग लगने की घटना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


