HomeDehardunआईएएस सबीन बंसल: उत्तराखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतिबिंब

आईएएस सबीन बंसल: उत्तराखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतिबिंब

आईएएस सबीन बंसल: उत्तराखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतिबिंब

देहरादून, उत्तराखंड की राजधानी और सबसे प्रमुख जिलों में से एक, न केवल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है बल्कि राज्य सरकार की नीतियों की छवि का भी प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में जब किसी जिले के जिलाधिकारी की कार्यशैली सरकार की नीतियों का सजीव उदाहरण बन जाए, तो वह पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श बन जाता है। देहरादून के डीएम आईएएस सबीन बंसल ऐसे ही प्रशासनिक अधिकारी हैं, जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर सख्ती से लागू करते नज़र आते हैं।

जनता से सीधा संवाद और सख्त निर्णय

डीएम कार्यालय में प्रतिदिन लगने वाला जनता दरबार आम लोगों को प्रशासन से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। फरियादियों की शिकायतों को न केवल गंभीरता से सुना जा रहा है, बल्कि ज़रूरी मामलों में त्वरित कार्रवाई भी की जा रही है। सबीन बंसल की कार्यशैली में निष्पक्षता और कठोरता साफ झलकती है। जिले के अधिकारियों पर समय-समय पर की गई सख्त कार्रवाइयों से यह संदेश स्पष्ट है कि वे किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करते।

सरकार की सकारात्मक छवि निर्माण में अग्रणी

सबीन बंसल ने देहरादून जिले में जनविश्वास और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। उनकी कार्यशैली न केवल जिले में बल्कि पूरे प्रदेश में सरकार की ईमानदार और प्रतिबद्ध छवि प्रस्तुत कर रही है। उनकी साफ-सुथरी प्रशासनिक पहचान अन्य जिलों के अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी है।

एक मिसाल, जिसे अपनाने की ज़रूरत

यह आवश्यक है कि प्रदेश सरकार जिलों में सरकार की योजनाओं की वास्तविक डिलीवरी का मूल्यांकन करे और उन ज़िलों में जहां कार्य निष्पादन कमजोर रहा है, वहां सबीन बंसल जैसे सक्षम और प्रतिबद्ध अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि जनता तक सरकार की योजनाओं का लाभ भी सही तरीके से पहुंचेगा।

देहरादून के डीएम के रूप में आईएएस सबीन बंसल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और ईमानदारी हो, तो सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। आज वे उत्तराखंड के उन चुनिंदा अफसरों में गिने जाते हैं, जो वास्तव में सरकार का आईना बनकर जनता और प्रशासन के बीच विश्वास की मज़बूत कड़ी बन चुके हैं।

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