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उत्तराखंड में पंजीकृत हैं 273 हीमोफीलिया ग्रसित रोगी

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देहरादून राज्य में हीमोफीलिया मरीजों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री ने आज स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार से राज्य में हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों की संख्या व उनको मिलने वाली स्वास्थ्य  सुविधाओं को लेकर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिये हैं कि हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों को हीमोफीलिया फैक्टर व दवाईयों की कोई कमी नहीं होने दी जाये। प्रत्येक मरीज को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिले इसका पूरा ध्यान रखा जाये।    

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 273 हीमोफीलिया से ग्रसित रोगी पंजीकृत है। जिनके उपचार हेतु राज्य सरकार द्वारा आवश्यक हीमोफीलिया फैक्टर (सात, आठ व नौ) निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा पूर्व में हीमोफीलिया से ग्रसित रोगियों को फैक्टर हेतु राजकीय दून मेडिकल कॉलेज देहरादून, एस०एस० जे० बेस हल्द्वानी नैनीताल एवं संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार, पौडी जाना पडता है। परन्तु पिछले पाँच वर्षों से प्रदेश के सभी हीमोफीलिया के ग्रसित रोगियों को उपचार हेतु हीमोफीलिया फैक्टर उनकी निकटतम् चिकित्सा ईकाई पर उपलब्ध कराये जा रहे है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया वर्तमान में राज्य में फैक्टर-7 पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा शीघ्र ही सम्बन्धित चिकित्सा ईकाईयों को फैक्टर-8 और फैक्टर-9 भी उपलब्ध करा दिये जायेगें।

स्वास्थ्य सचिव ने अवगत कराया कि उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देशित किया है कि वह ब्यक्तिगत रूप में प्रत्येक माह हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों को मिल रही सुविधाओं की समीक्षा करे तथा सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपने जिलों के जिला नोडल अधिकारियों को निर्देशित करें कि वह प्रत्येक माह हीमोफीलिया मरीजों को मिल रही सुविधाओं का संज्ञान ले व इस बीमारी को लेकर सरकार दुआरा निःशुल्क दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी आम जनता को उपलब्ध कराए।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसमें पीडित व्यक्ति के खून का थक्का पूरी तरह नहीं बनता है। हीमोफीलिया पीडितों के खून में थक्का जमाने वाले आवश्यक प्रोटीन (फैक्टर) की कमी या अनुपस्थिति होती है और चोट लगने पर रक्तस्त्राव जारी रहता है। यह रोग आमतौर पर पुरुषों को प्रभावित करता है,

महिलाओ में इस रोग के लक्षण अक्सर दृष्टिगोचर नहीं होते हैं पर वह रोग की वाहक होती है। कभी कभार यह रोग महिलाओ को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा हीमोफीलिया युक्त व्यक्तियों के रक्तस्त्राव तेज नही होता अपितु लगातार व लम्बी अवधि तक होता रहता है। सामान्य व्यक्ति, बाह्य चोट जैसे कटने, छिलने चोट लगने से बचाने का ध्यान रखता हैं, किन्तु हीमोफीलिया में बाह्य चोट के अलावा अंदरूनी रक्तस्त्राव भी बहुत गम्भीर हो सकता हैं। जिससे कि हाथ व पैरों के जोडों व मांसपेशियों के अकडाहट, दर्द, जोडों का खराब होना, विकलांगता और कई बार मृत्यु का कारण भी बन जाता है।

विपक्षी दिलो पर भी राज करते सीएम पुष्कर

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देहरादून उत्तराखंड में सीएम धामी ने अपने फैसलों से विपक्ष नेताओ का भी दिल जीत लिया है राज्य में खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने आपदा राहत को लेकर आपदा में लोगो को राहत देने के मामले में तारीफ करते हुए थैंक्यू धामी जी कहा है

खटीमा के लिए तुरत राहत देने के मामले पर विधायक भुवन का ऐसा बयान पहली बार देखने को मिला है सीएम धामी से खटीमा विधायक की मुलाकात भी राजनैतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है इससे पहले नानकमत्ता के विधायक गोपाल सिंह राणा ने सीएम धामी को बेहतर सीएम बताया था

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी जनता के दिलो पर राज करते है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब सीएम के काम के मुरीद विपक्षी विधायक भी हुए है राज्य में ऐसा अवसर सिर्फ धामी राज में देखने को मिला है

पूर्व सीएम हरीश रावत भी धामी काम को लेकर उनकी तारीफ कर चुके है मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी अपने कामों की बदोलत सबका दिल जीत कर राज्य में मजबूत नेता बनकर पिछले तीन सालो में उभरे है उनकी राजनैतिक विजन पारी से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी उनको गुड बुक में शामिल कर चुका है

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की राजनीतिक कौशलता किसी से छुपी हुई नहीं वह समय-समय पर अपने फैसलों से राज्य की जनता के साथ-साथ बड़े नेताओं को चौंकाते रहे हैं उनके 3 सालों में फैसले शीर्ष नेतृत्व का ध्यान भी उनको तरफ करने में कामयाब रहे है जनता के दिलो से लेकर विपक्ष को अपने काम की बदोलत धामी राजनैतिक पारी का बेहतर प्रदर्शन कर रहे है

दीपक रावत ने फरियादी को दिलाए 34 लाख

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IAS दीपक रावत हमेशा अपने छापे औचक निरीक्षण से चर्चा में बने रहते है राज्य के पहले कहे या फिर चर्चित देश भर के अफसरों में शुमार दीपक रावत की वर्किंग को हर कोई देखता नजर आता है।

आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत को पिछले जनसुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा रामनगर में उनके साथ हुए निजी भूमि सहित सरकारी भूमि अनुबंध मामले की शिकायत की गई थी जिस पर आयुक्त द्वारा सभी पक्षों को बुलाकर शिकायतकर्ता के 34 लख रुपए वापस करवाए गए।

आयुक्त की जनसुनवाई में शिकायतकर्ता-अब्दुल मुस्तफा पुत्र अब्दुल जब्बार, निवासी मोहल्ला खताडी, रामनगर को अरूण कुमार मासीवाल, जगदीश कुमार मासीवाल, योगेश मासीवाल, नरेन्द्र मासीवाल, निवासी उदयपुरी चौपड़ा तहसील रामनगर के द्वारा ग्राम उदयपुरी चौपड़ा, तहसील रामनगर जिला नैनीताल में भूमि के साथ ही सरकारी भूमि भी अनुबन्ध कर शिकायतकर्ता अब्दुल मुस्तफा को रू0 34 लाख में बेची गयी। उसके उपरान्त शिकायतकर्ता अब्दुल मुस्तफा आयुक्त , कुमाऊं मण्डल, नैनीताल के समक्ष शिकायत लेकर उपस्थित हुए। जहां आयुक्त महोदय द्वारा सम्बन्धित पक्षों को कार्यालय में बुलवाकर शिकायतकर्ता के रू0 34 लाख रुपए बैंक  खाते के माध्यम से वापिस कराये गये। शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान हो गया है तथा शिकायतकर्ता संतुष्ट है।

सीएम धामी से मिले पूर्व विधायक शुक्ला

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किच्छा के पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने पंतनगर की शिक्षा प्राणली पर चिन्ता व्यक्त कर मुख्यमंत्री धामी जी को ज्ञापन सौंप कर सुधार के लिए अपने सुझाव दिये मुख्यमंत्री सहमत होकर अपने निर्देश जारी कर दिये:

देहरादून:- पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उनके सफलतम 3 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर बधाई दी एवं पंतनगर विश्वविद्यालय के शिक्षकों/ वैज्ञानिकों की समस्याओं एवं कैंपस स्कूल पंतनगर के शिक्षकों/ कर्मचारियों की समस्याओं से संबंधित मांग पत्र सौंप कर समाधान करने का निवेदन किया।

पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय के नियंत्रक द्वारा मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र के अनुसार विश्वविद्यालय में सामान्य बजट में 390 पद रिक्त हैं तथा ACRIP एवं KVK के वैज्ञानिक/शिक्षकों के सापेक्ष 140 पदों पर इन शिक्षकों को समायोजित किया जा सकता है परंतु शासन से इस पत्र पर अभी तक अनुमति नहीं मिली, इस दौरान विश्वविद्यालय ने उक्त पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया को विज्ञापित किया है ऐसा करने से यह 140 शिक्षक/ वैज्ञानिक अधर में रह जाएंगे, आपके निर्देश पर गठित कमेटी द्वारा इन वैज्ञानिकों की समस्या हल करने हेतु हुई एक बैठक में यह सैद्धांतिक सहमति बनी थी कि इन्हें समायोजित किया जाए, इसी दौरान जिन वैज्ञानिकों/शिक्षकों को विश्वविद्यालय ने 60 वर्ष होने पर सेवानिवृत्ति किया था उनके हक में हाई कोर्ट नैनीताल का निर्णय भी आ गया कि यह विश्वविद्यालय के कर्मचारी हैं अत: इन्हें 65 वर्ष तक कार्य करने का हक है। अतः हाईकोर्ट के निर्णय के बाद इस तरह के 140 शिक्षकों/ वैज्ञानिकों को विश्वविद्यालय का कर्मचारी माना जाए, विश्वविद्यालय के सामान्य बजट के रिक्त 390 पदों में से इन वैज्ञानिकों के सापेक्ष 140 पदों पर इनका समायोजन किया जाए, तब तक विश्वविद्यालय को इन पदों पर सीधी भर्ती न करने हेतु निर्देशित किया जाए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि इस संबंध हाइकोर्ट के निर्णय को लागू करने के साथ ही हाइकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है। ऐसे सभी 140 शिक्षको/वैज्ञानिकों को पंतनगर विश्वविद्यालय का शिक्षक माना जाए अथवा विश्वविद्यालय के समान्य बजट में समायोजन करें।

साथ ही पंतनगर विश्वविद्यालय के कैंपस में स्थित कैंपस स्कूल (नर्सरी से इंटर) के शिक्षक एवं कर्मचारियों को कई माह से वेतन नहीं मिला है इस विद्यालय के संरक्षक कुलपति पंतनगर विश्वविद्यालय हैं तथा उनके द्वारा गठित कमेटी से इसका प्रबंधन होता है परंतु इस विद्यालय के कर्मचारी/ शिक्षकों को विश्वविद्यालय का कर्मचारी नहीं माना जाता है और न ही इन्हें मान्यता प्राप्त विद्यालय का दर्जा है और ना ही प्राइवेट स्कूल का दर्जा है अतः कैंपस स्कूल को या तो पंतनगर विश्वविद्यालय में समाहित किया जाए अथवा इसे पूर्ण रूप से सरकारी स्कूल (राज्य सरकार) में निहित किया जाए ताकि इसके शिक्षको एवं कर्मचारियों की समस्याओं का हल हो सके। जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहमति जताई।

तीन साल में 15 हजार नियुक्ति की बही बयार यही है धामी सरकार

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्राविधिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों से चयनित 212 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों के अंतिम वर्ष के इन छात्र-छात्राओं को विभिन्न कम्पनियों में नौकरी मिली है। इस वर्ष अभी तक राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों से 65 प्रतिशत युवाओं को रोजगार मिल चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र सभी युवाओं के सपनों की पहली सीढ़ी है। यह परिश्रम और लगन से किए कार्य का सम्मान भी है। हर छात्र पूर्ण मनोयोग निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को हर क्षेत्र में रोजगार के उचित अवसर मिलें। राज्य के अंदर निजी क्षेत्र भी रोजगार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गैर सरकारी औद्योगिक इकाइयों का विकास हमारी आर्थिक विकास का प्रमुख स्तंभ है। देवभूमि उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को राज्य में सही दिशा और उचित अवसर देने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षो में टेक्नोलॉजी, रोजगार , कौशल विकास के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। देश के अंदर हर क्षेत्र में नौजवानों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में इन्नोवेशन एवं टेक्नोलॉजी को प्रथमिकता दी गई है। स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं से देश में नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों हेतु राज्य में ऑनलाइन ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेंटर का निर्माण किया गया है। जिसके माध्यम से छात्रों को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होने छात्रों से कहा कि आपके द्वारा किए गए कार्य एवं अनुभव ही आपकी पूंजी के रूप में हमेशा आपके पास रहेगा। राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोज़गार से जोड़ना है। बीते 3 सालों में राज्य सरकार ने सरकारी विभागों में 15000 से भी ज्यादा युवाओं को नियुक्तियां दी है। राज्य में भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण रूप से पारदर्शी बनाया गया है। परीक्षा से लेकर नियुक्तियां तक तय समय के अंदर हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आई पारदर्शिता से युवाओं का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। यह पारदर्शिता युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान लोगों/ युवाओं ने नकल विरोधी कानून लागू करने हेतु विशेष रूप से सरकार का आभार व्यक्त किया जा रहा है। यह पारदर्शिता तभी संभव है जब सरकार की नीति और नीयत दोनों साफ हो। राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के लिए निरन्तरता से काम कर रही है। समेकित विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में उत्तराखण्ड प्रथम स्थान पर आया है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता परक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। युवाओं को सीधे रोजगार मिले इसके लिए औद्योगिक संस्थानों की आवश्यकता के हिसाब से नये कोर्स चलाये जा रहे हैं। बच्चों को तकनीकी शिक्षा के माध्यम से रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है। राज्य के पॉलिटेक्निक कॉलेज में फाइनल वर्ष के 3500 बच्चों में से 2303 बच्चों को रोजगार से जोड़ दिया गया है। पॉलिटेक्निक कॉलेजों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है। युवाओं को अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर मिले इसके लिए सरकार ने राज्य के पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में जर्मन और फ्रेंच भाषा पढ़ाने का भी निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि क्वालिटी एजुकेशन के लिए हर कॉलेज में अध्यापकों की नियुक्तियां की गई हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि केवल सर्विस प्राप्त करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए, निजी सेक्टर में अपने समर्पण, ज्ञान, कार्यशैली के माध्यम सफलता को प्राप्त करना है। जिस भी क्षेत्र में जाएं, उस क्षेत्र में हमेशा सर्वश्रेष्ठ कार्य कर निरन्तर सफलता के मार्ग पर आगे बढ़े। युवाओं को राज्य और समाज के बेहतर भविष्य के लिए सोचना चाहिए।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, अपर सचिव तकनीकी शिक्षा स्वाति भदौरिया, निदेशक तकनीकि शिक्षा आरपी गुप्ता, विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

चातुर्मास देवशयनी एकादशी

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चातुर्मास में अभीष्ट की सिद्धि के लिए भक्त प्रिय वस्तुओं का त्याग करेंगे। वहीं हरिशयनी एकादशी पर भगवान चार महीने योग निद्रा में चले गए। इस दौरान मंदिरों में जप-तप और अनुष्ठान करते साधक नज़र आए। साथ ही विष्णु मंदिरों में विविध अनुष्ठान प्रांरंभ हो गए ।

भगवान के चार महीने विश्राम के दौरान हम लोग भी यम नियम और संयम का पालन करते हैं। इन चार महीने के दौरान हम लोग अपनी कोई न कोई प्रिय चीज का त्याग कर देते हैं। कुछ लोग अपनी बुरी आदतों को त्यागने का संकल्प लेते हैं और चार महीने तक इसका पालन करते हैं।

भूमि पर शयन और पलाश के पत्तों पर है भोजन का नियम
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि देवशयनी के दिन भगवान विष्णु पाताल में सोने चले जाते हैं, इसलिए देवशयनी से देव प्रबोधिनी एकादशी तक मनुष्य को पलंग पर नहीं सोना चाहिए। इस समय में जो व्यक्ति भूमि पर शयन करता है और पलाश के पत्तों पर भोजन करता है। नियमित दीप दान करता है और ब्रह्मचर्य का पालन करता है वह पाप मुक्त व्यक्ति बैकुंठ में स्थान पाता है और भगवान की सेवा में रहता है।

बाबा बौखनाग डोली में सीएम हुए शामिल

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सीएम पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को परेड ग्राउंड में बाबा बौखनाग की डोली के अयोध्या धाम भ्रमण कार्यक्रम में शामिल हुए। बाबा बौखनाग की पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की और डोली को स्वयं कंधा देकर रवाना किया।

सीएम ने बाबा बौखनाग डोली समिति के सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारी बाबा बौखनाग के प्रति गहरी आस्था है। बाबा की कृपा पूरे उत्तराखंड पर है। इसका उदाहरण सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों की सकुशल रिहाई है। जिनकी कृपा से यह असंभव कार्य संभव हो सका। बाबा का स्मरण करने से हमें रास्ता मिला और सभी लोग सकुशल रेस्क्यू किए गए। पूरे देश में इस घटना की चर्चा हुई और हमारे प्रयासों की तारीफ भी हुई, यह बाबा का आशीर्वाद रहा। सीएम ने कहा कि बाबा की कृपा से हमारा राज्य नीति आयोग की ओर से जारी सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में 10वें से पहले स्थान पर आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा की कृपा से आज हमारा राज्य नीति आयोग द्वारा जारी सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में 10वें से पहले स्थान पर आया है। चारधाम यात्रा में भी रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु आ रहे है। बाबा की कृपा से यमुनोत्री और गंगोत्री में भी श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बढ़ी है। गंगोत्री यमुनोत्री के साथ महासू देवता के स्थल हनोल का भी मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। अस्कोट से आराकोट तक राज्य समग्र रूप में विकास की दृष्टि से आगे बढ़ रहा है, हमने राज्य हित में अनेक कठिन व कठोर निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता अधिनियम लागू कर हमने प्रदेश की जनता से किया वायदा पूरा किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड से निकलने वाली समान नागरिक संहिता की गंगा पूरे देश में जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि जैसे पवित्र भूमि पर लंबे समय से विभिन्न विभागों की सरकारी भूमि पर कब्जा किया जा रहा था। सरकार द्वारा अभियान चलाकर ऐसी 05 हजार हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड के मूल स्वरूप को बनाये रखने के लिये प्रदेश में किसी भी तरह का धर्मांतरण ना हो पाए इसके लिए सख्त कानून का प्रावधान किया गया है। सरकार संपत्ति को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने वालों के विरुद्ध हमने सख्त कार्रवाई करते हुए दंगा निरोधक कानून बनाया है। जिसके अंतर्गत संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाले से ही उसकी वसूली की जाएगी।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में 15 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई हैं। प्रदेश में नकल विरोधी कानून लागू कर युवाओं की प्रतिभा का सम्मान किया गया है। पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था से युवा एक साथ कई पदों के लिये पात्रता में आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन, तीर्थाटन राज्य की आर्थिकी का मजबूत आधार है। सड़कों के विकास, हवाई यातायात एवं अन्य अवस्थापना सुविधाओं के विकास से चारधाम यात्रा में गत वर्ष की अपेक्षा दुगने तीर्थ यात्री प्रदेश में आये हैं।

चारधाम यात्रा में भी रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। बाबा की कृपा से यमुनोत्री और गंगोत्री में भी श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बढ़ी है। इस अवसर पर विधायक दुर्गेश्वर लाल, समिति के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह रावत, पूर्व विधायक राजकुमार, मनवीर चौहान, विनोद डोभाल, दीपक बिजल्वाण, सत्येंद्र राणा, आलोक रावत, चंडी प्रसाद, यशवंत सिंह, गोपाल सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।

बाबा का मंदिर जल्द बनकर तैयार होगा
सीएम ने कहा, श्रमिकों को सकुशल निकालने के बाद वहां पर बाबा बौखनाग के मंदिर निर्माण की घोषणा की थी। वह कार्य हो रहा है। शीघ्र ही मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। सीएम ने बड़कोट पंपिंग पेयजल योजना के शीघ्र समाधान का आश्वासन देते हुए बाबा बौखनाग मेले को राजकीय मेले के रूप में आयोजित किए जाने की बात कही।

दिल्ली के श्री केदारनाथ धाम ट्रस्ट और मंदिर का बदलेगा नाम

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दिल्ली में केदारनाथ धाम नहीं बल्कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। उसके बाद भी कुछ लोग इस मुद्दे को तूल देने की कोशिश कर रहे हैं दिल्ली के श्री केदारनाथ धाम ट्रस्ट और मंदिर का बदलेगा नाम, दोनों के नाम से हटेगा धाम इसको लेकर दिल्ली ट्रस्ट ने मीडिया से बात करते हुए तस्वीर साफ कर दी है उत्तराखंड में मंदिर निर्माण को लेकर विरोध को हवा देने का काम कई दिनों से चल रहा था अब राज्य में विरोध करने वाले धार्मिक पंडितो ने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर अपना धरना बाबा केदारनाथ धाम में खत्म कर दिया है फिलहाल इस साजिश में कई राजनेता से लेकर ऐसे लोगो की भूमिका भी समाने आई है जो धामी सरकार की छवि को धूमिल करने का प्लान तैयार किये हुए थे अब सिर्फ मंदिर निर्माण होगा जिसके बाद ऐसे लोगो को सियासत करने का अवसर नहीं मिलेगा जो अभी तक सरकार के खिलाफ काम कर रहे थे।

दिल्ली में केदारनाथ मंदिर के निर्माण को लेकर विवाद गहराने के बाद श्री केदारनाथ धाम दिल्ली ट्रस्ट ने ट्रस्ट और मंदिर का नाम बदलने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र रौतेला ने कहा कि कुछ लोगों की धाम शब्द को लेकर नाराजगी है। जिसे देखते हुए दोनों के नाम से धाम शब्द हटा दिया जाएगा। ट्रस्ट की ओर से इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रेस क्लब में मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा कि दिल्ली में केदारनाथ धाम नहीं बल्कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। उसके बाद भी कुछ लोग इस मुद्दे को तूल देने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड में स्थित बाबा केदारनाथ करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और हमेशा रहेंगे, इसलिए लोगों की आस्था से खिलवाड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता। हम केवल दिल्ली में केदारनाथ मंदिर का निर्माण कर रहे हैं।

भगवान शिव का एक मंदिर बना रहे हैं और ये पहली बार नहीं है जब बाबा भोलेनाथ का किसी स्थान पर मंदिर बन रहा हो, लेकिन कुछ लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए इसे केदारनाथ धाम से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह सिर्फ और सिर्फ एक मंदिर है।

रौतेला ने कहा, इस पूरे प्रकरण में कुछ लोगों ने यह विषय भी उठाया कि बाबा केदारनाथ का मंदिर एक ज्योतिर्लिंग है इसलिए उसकी कोई दूसरी प्रतिकृति नहीं हो सकती है, इस पर ट्रस्ट का कहना है कि हमारे जो 12 ज्योतिर्लिंग हैं उन सभी ज्योतिर्लिंग के नाम से देश में कई मंदिर बने हैं।

गुजरात में मुख्य सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है और दिल्ली में भी एक सोमनाथ मंदिर है। आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है और बेंगलुरू में भी मल्लिकार्जुन मंदिर है। उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है और महाराष्ट्र के नागपुर में भी इसी नाम से मंदिर है। बदरीनाथ उत्तराखंड के चार धामों में से एक है। जबकि मुंबई में भी इसी नाम से एक मंदिर बना हुआ है।

सीएम धामी का ट्रस्ट से कोई लेना देना नहीं
ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेंद्र रौतेला ने कहा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ट्रस्ट के अनुरोध पर मंदिर के भूमि पूजन के लिए आए थे। उनका और सरकार का ट्रस्ट से कोई लेना देना नहीं है। केदारनाथ धाम के मसले पर कुछ सोशल मीडिया में चल रहे वीडियो के बारे में उन्होंने कहा, ट्रस्ट ने इस तरह की कोई बयानबाजी नहीं की।

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