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उत्तराखंड में आज मौसम मचाएगा हलचल! 5 जिलों में बारिश-बिजली, मैदानों में गर्मी का प्रहार

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Uttarakhand Weather today – आज उत्तराकाशी के ऊपर हवा में बदलाव का एहसास होगा। इधर, बागेश्वर में बिजली कड़कने की संभावना छाई रहेगी। चमोली के कोनों में झोंके 45 किमी/घंटा के आसपास दौड़ सकते हैं! पिथौरागढ़ में आकाश फटने जैसी घटनाओं का खतरा मंडराएगा। थोड़ी देर के लिए रुद्रप्रयाग में भी ऐसा ही माहौल बन सकता है। अब दूसरी ओर, देहरादून की धूप इतनी तेज होगी कि छाया ढूंढनी पड़ेगी हरिद्वार की सड़कों पर दोपहर में पैर रखना मुश्किल हो जाएगा। ऋषिकेश में पारा 39°C के पास ठहरेगा। रुड़की में भी हालत लगभग वैसे ही रहेंगे। गर्मी के चलते लोगों को घर से बाहर निकलने में झिझक होगी

पहाड़ी जिलों में बारिश-बिजली का अलर्ट

बिजली कड़कने के साथ तेज बौछारों का अनुमान है, खासकर कुछ जगहों पर। खतरे की आशंका है, ऐसे में ऊंचे पेड़ों के पास ठहरना न समझदारी होगी। ऊपर से चमकती बिजली, नीचे धरती पर खंभे दोनों के पास जाना उचित नहीं

  • बागेश्वर, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में अलर्ट।
  • कहीं-कहीं हल्की बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका।
  • तेज हवाओं की रफ्तार 40–50 किमी/घंटा तक रह सकती है।
  • चारधाम यात्रा मार्गों पर मौसम अपडेट देखकर ही सफर करें।

उत्तराखंड मौसम अपडेट 2026

जिला / क्षेत्र मौसम की स्थिति अलर्ट
बागेश्वर हल्की बारिश और गरज-चमक बिजली गिरने की संभावना
चमोली तेज हवाएं और बादल मौसम विभाग अलर्ट
पिथौरागढ़ बारिश के आसार यात्रियों को सावधानी
देहरादून भीषण गर्मी तापमान 40°C के करीब

लोगों के लिए जरूरी सावधानियां

स्थिति क्या करें
बारिश और बिजली खुले मैदान और पेड़ों के नीचे न जाएं
तेज गर्मी ज्यादा पानी पिएं और धूप से बचें
चारधाम यात्रा मौसम अपडेट देखकर ही सफर करें
बच्चे और बुजुर्ग दोपहर में बाहर निकलने से बचें

तेज धूप ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

गर्मी का असर मैदानों में लगातार दिख रहा है। धूप तेज होने से दिन के समय चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। कई जगह दोपहर में ऐसी लू चल रही है कि सड़कें सुनसान लगती हैं। इससे आम जीवन धीमा पड़ गया है। मौसम विभाग की ओर से सलाह है

  • देहरादून और हरिद्वार में पारा 40°C के आसपास रह सकता है।
  • ऋषिकेश और रुड़की में भी गर्मी का असर तेज रहेगा।
  • हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पानी पीते रहें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को धूप से बचाना जरूरी है।

उत्तराखंड HC ने 5 साल के निलंबन को रद्द किया, सरकारी कर्मचारी की अनिश्चितकालीन निलंबन अवैध

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Uttarakhand High Court News – एक सरकारी कर्मचारी का पाँच साल का निलंबन उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हटा दिया। अदालत का मानना है, ऐसे फैसले सिर्फ जांच के दौरान अस्थायी तौर पर होने चाहिए। लंबे समय तक नौकरी से अलग रखना क़ानून के खिलाफ है। कई बार प्रशासन इसे ध्यान में नहीं रखता। यहाँ तक कि निलंबित व्यक्ति को भी उचित सुनवाई का अधिकार होता है। इस मामले में वह नहीं मिला। अदालत ने साफ कहा – भविष्य में ऐसा नहीं चलेगा। प्रक्रिया के दौरान अधिकारों की अनदेखी नहीं हो सकती। कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन निलंबन में डालना ठीक नहीं। इसका असर सिर्फ एक व्यक्ति तक नहीं, बल्कि सारे प्रणाली पर पड़ता है।

निलंबन रद्द होने के कारण और प्रक्रिया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने निलंबन रद्द करने के पीछे कई मुख्य कारण बताए हैं-

  • अंतिम समय तक निलंबन गलत है
  • कर्मचारी के अधिकारों का उल्लंघन
  • निलंबन केवल जांच अवधि तक सीमित होना चाहिए
  • प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित
  • न्यायिक निगरानी मजबूत बनाना

निलंबन रद्द करने की प्रक्रिया में अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए।

  1. कर्मचारियों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जायेगा।
  2. प्रशासन द्वारा समय सीमा का पालन
  3. संबंधित दस्तावेज़ों की जांच
  4. न्यायिक प्रक्रिया के दौरान निलंबन लागू
  5. अनुशासन और न्याय का संतुलन बनाए रखना

कर्मचारी और प्रशासन के लिए संदेश

एक आवाज़ उठी है, जो हर सरकारी कर्मचारी और दफ्तर में गूंज रही है – अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोई भी छुट्टी जो खत्म होने की तारीख न बताए, वो गलत है। ऐसे फैसले काम करने वालों के भीतर जोश डालेंगे। विश्वास भी बढ़ेगा, खासकर जब बात न्याय की हो।

  • हर किसी के हिस्से में अब इंसाफ आएगा।
  • लंबे समय तक रोक देने का खतरा हमेशा टलना चाहिए।
  • सरकारी कामों में खुलापन होता है।
  • उम्मीद है कि लोगों के चेहरे पर मुस्कान आएगी।
  • आगे चलकर इन प्रकार के मुद्दों को समझदारी से सुलझाया जाएगा।

नतीजा टेबल

विषय विवरण
फैसला 5 साल के निलंबन को रद्द किया गया
कर्मचारी सरकारी कर्मचारी, जिनका निलंबन अनिश्चितकालीन था
अधिकार सुनवाई का अधिकार, समयसीमा में निलंबन
प्रशासन निलंबन केवल आवश्यक अवधि तक सीमित
कानूनी संदेश अनिश्चितकालीन निलंबन अवैध, कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित

 

अब यह साफ है कि कोई कर्मचारी कितना भी समय तक निलंबित नहीं रह सकता। उत्तराखंड के उच्च न्यायालय के फैसले से सरकारी नौकरों के साथ अनुचित ढंग से पेश आने पर लगाम लगेगी। ऐसे मामलों में अब प्रशासन को त्वरित निर्णय लेने होंगे। कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करेंगे। इस तरह के फैसले से ऊपरी स्तर के अधिकारी भी जांच के घेरे में रहेंगे। कई छोटे-छोटे विभागों में भी इसका असर दिखेगा। एक बार फिर न्यायपालिका ने प्रशासन के अतिक्रमण को रोक दिया है।

कुमाऊं मंडल में शिक्षा-सहकारिता सुधार: ब्लॉक स्तर पर आदर्श गांव और स्कूल सुधार

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Education in Kumaon Division – हर छोटे गाँव में सीखने के मौके मिलने पर कुमाऊं के हालात धीरे-धीरे बदल सकते हैं। हर पेड़ के नीचे जहाँ बच्चे पढ़ने की बात सुनते हैं, वहाँ माँ-बाप के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी आ जाती है। गाँव में बच्चों के लिए ठीक-ठाक स्कूल होने पर किसानों को सहारा मिलता है। इसी तरह, सहकारी व्यवस्था जब जीवंत रहती है, स्थानीय दल खुद को मजबूत पाते हैं। फैसले में हिस्सा लेने का अवसर ग्रामीणों को आगे बढ़ाए रखता है। जब सभी मिलकर चलें, तब अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता नजदीक आता है।

आदर्श गांव की योजना शिक्षा सुधार से कैसे जुड़ सकती है?

गांव के आदर्श में सिर्फ सड़कें, बिजली या पानी ही नहीं दिखने चाहिए। एक छोटी सी किताब की दुकान भी वहाँ अपनी जगह बना सकती है। बच्चों के लिए पढ़ाई का माहौल होना जितना जरूरी है, उतना ही मैदान में दौड़ना भी। जो स्कूल है, वह धीरे-धीरे पूरे गांव का दिमाग बन सकता है। उसी छत के नीचे कभी कोई कोर्स चल रहा हो, तो कभी बच्चे टैब पर कुछ नया देख रहे हों।

  • गांव-गांव में स्कूल की हालत बदलने के लिए अलग समिति होनी चाहिए।
  • इन युवाओं के हाथ में डिजिटल सीखने का अवसर दिया जाए।
  • पुस्तकालय के साथ-साथ खेलने का सामान भी स्कूल के आंगन में मिल जाए।
  • हर बैठक में पढ़ाई के हालात पर बात होनी चाहिए।
  • हर बच्चे का होना साफ़ दिखे, इसका ध्यान रखा जाए।

ब्लॉक स्तर पर स्कूल सुधार की सबसे बड़ी जरूरत क्या है?

कुमाऊं मंडल के अनेक ब्लॉकों में स्कूलों को नए भवन, प्रशिक्षित शिक्षक, स्मार्ट क्लास और प्रयोगशाला चाहिए। उधर, ब्लॉक स्तर पर हालात का जायजा लेकर प्राथमिकताएँ तय करना जरूरी है। इस तरह संसाधनों का दुरुपयोग नहीं होगा। कमजोर स्कूलों को मजबूती देने का काम आगे बढ़ेगा।

  • साल में एक बार हर स्कूल की पढ़ाई की जाँच होती है।
  • शिक्षकों के खाली पद जल्दबाज़ी से भरे जाने चाहिए।
  • इंटरनेट की सुविधा मजबूत हो, तभी स्मार्ट कक्षाओं का फायदा होगा।
  • हल्की पढ़ाई में पिछड़े बच्चों के लिए अलग से कक्षाओं का इंतजाम होना चाहिए।

सहकारिता से ग्रामीण शिक्षा को कैसे मजबूती मिल सकती है?

सहकारी समितियां अब सिर्फ खेती या कर्ज़ तक नहीं रुकीं, वो पढ़ाई के सुधार में भी हाथ बटा सकती हैं। इनके ज़रिए गाँव के स्कूलों में किताबें पहुँच सकती हैं, खेल के सामान का इंतजाम हो सकता है। छात्रवृत्ति के ज़रिए बच्चे पढ़ाई जारी रख सकते हैं, डिजिटल उपकरण भी मिल सकते हैं। ऐसे प्रयासों से समुदाय में ज़िम्मेदारी का एहसास गहरा होता है।

  • अब तो कुछ समितियाँ पढ़ाई में तेज बच्चों के हाथ मजबूत करने लगी हैं।
  • हर स्कूल को डिजिटल तकनीक के लिए पैसे मिलने चाहिए।
  • बच्चों में किसान टोली की तरफ से खेती के रहस्य भरे अनुभव डाले जा रहे हैं।
  • स्त्री समूह पोषण अभियान में शामिल हुई।
  • एक फंड पढ़ाई के लिए गांव में होना चाहिए।

आदर्श स्कूल बनाने के लिए समुदाय की भूमिका क्या होनी चाहिए?

घर के लोग, टीचर्स, गाँव का सरपंच, युवा अगर साथ आएँगे तो स्कूल में बदलाव आएगा। बच्चे साफ-सफाई में हिस्सा लेंगे, पेड़ लगाएंगे, निगरानी करेंगे। ऐसे में स्कूल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। यह बदलाव की धड़कन बन जाएगा।

  • पढ़ाई में आसानी तब आएगी जब युवा अपने दम पर सहयोग करेंगे।
  • साफ़-सफाई की शुरुआत आंगन से हो चली है।
  • हमें बच्चों की सुरक्षा पर एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।

कुमाऊं मंडल में शिक्षा-सहकारिता सुधार का लक्ष्य क्या होना चाहिए?

एक-एक गाँव की ओर ध्यान देकर पढ़ाई के मौके बढ़ने चाहिए। उधर सहयोग के तरीके मजबूत होंगे तभी आसानी से काम घर-घर तक पहुंचेगा। आशा यही है कि लोग खुद अपने फैसले लेना सीख जाएं। अगर स्कूलों में नई व्यवस्था आती है, और साथ ही समूह मिलकर काम करते हैं, तो कुछ बदलाव नजर आने लगते हैं। कुमाऊं के छोटे-छोटे बस्तियों में ऐसा माहौल बन सकता है जहां जागरूकता, पढ़ाई और काम का सिलसिला चल पड़े।

  • हर ब्लॉक में कम से कम एक आदर्श गांव विकसित हो।
  • हर आदर्श गांव में एक आदर्श स्कूल बनाया जाए।
  • शिक्षा, कौशल और सहकारिता को जोड़ा जाए।
  • स्थानीय संसाधनों से रोजगार आधारित शिक्षा दी जाए।
  • बच्चों और युवाओं को पलायन रोकने वाली शिक्षा मिले।

हरिद्वार में 30 और 31 मई को पिकलबॉल लीग का आयोजन होगा, तैयार रहें खिलाड़ी।

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हरिद्वार के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए एक बहुत ही शानदार खबर सामने आ रही है आने वाले 30 और 31 मई को हरिद्वार में पिक बॉल टूर्नामेंट लीग का आयोजन होने जा रहा है अगर आप भी खेलकूद के शौकीन हैं या फिर पिकलबॉल के खिलाड़ी हैं तो अपनी कमर कस लीजिए और अभी से इसकी तैयारियों में जुट जाइए इस दो दिवसीय टूर्नामेंट को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों के बीच अभी से भारी उत्साह देखने को मिल रहा है

क्या है पिकलबॉल और क्यों बढ़ रहा है इसका क्रेज

बहुत से लोग शायद अभी भी इस खेल के बारे में ज्यादा नहीं जानते होंगे दरअसल पिकलबॉल एक ऐसा खेल है जो टेनिस बैडमिंटन और टेबल टेनिस का एक मिला जुला रूप है इसे एक छोटे से कोर्ट पर खेला जाता है जिसमें पैडल बैट जैसी चीज और एक छेद वाली प्लास्टिक की गेंद का इस्तेमाल होता है यह खेल आजकल युवाओं के साथ साथ हर उम्र के लोगों के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहा है क्योंकि इसे सीखना काफी आसान है हरिद्वार में इस लीग के होने से स्थानीय युवाओं को इस नए दौर के खेल को करीब से समझने और खेलने का बेहतरीन अवसर मिलेगा

Haridwar Pickleball League में क्या खास होने वाला है?

इस दो दिवसीय लीग को सफल बनाने के लिए आयोजक बड़े स्तर पर तैयारियां कर रहे हैं कोर्ट की व्यवस्था से लेकर खिलाड़ियों के रहने और खाने पीने की सभी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है बताया जा रहा है कि इस टूर्नामेंट में अलग अलग आयु वर्ग के खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं जिसमे सिंगल्स और डबल्स दोनों ही कैटेगरी में मैच खेले जाने की उम्मीद है रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी जिसकी जानकारी स्थानीय स्पोर्ट्स सेंटर्स और सोशल मीडिया के माध्यम से मिल जाएगी

हरिद्वार पिक बॉल टूर्नामेंट में क्या नया होने वाला है?

खास जानकारी (Event Details) पूरी जानकारी (Information)
टूर्नामेंट का नाम हरिद्वार पिकलबॉल लीग (Haridwar Pickleball League)
आयोजन की तारीख 30 और 31 मई
स्थान (Venue) हरिद्वार (स्थानीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स/ग्राउंड)
खेल की कैटेगरी सिंगल्स और डबल्स (पुरुष और महिला वर्ग)
मुख्य आकर्षण चमचमाती ट्रॉफी, नकद पुरस्कार और सर्टिफिकेट

Haridwar Pickleball League खिलाड़ियों के लिए क्यों खास है?

हरिद्वार में इस तरह की लीग का होना लोकल स्तर के खिलाड़ियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है अक्सर हमारे यहां के प्रतिभावान खिलाड़ियों को सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता जिससे वे आगे नहीं बढ़ पाते इस पिकलबॉल लीग के जरिए खिलाड़ियों को न केवल अपनी फिटनेस सुधारने का मौका मिलेगा बल्कि उन्हें बड़े टूर्नामेंट्स का अनुभव भी हासिल होगा जो खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करेंगे उनके लिए आगे चलकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के रास्ते भी खुल सकता हैं

हरिद्वार पिकल बॉल विजेताओं को क्या इनाम मिलेगा?

इस पूरी प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण इसमें मिलने वाले पुरस्कार और सम्मान हैं टूर्नामेंट के अंत में शानदार प्रदर्शन करने वाले और विजेता खिलाड़ियों को चमचमाती ट्रॉफी के साथ साथ आकर्षक नकद इनाम और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया जाएगा तो फिर देर किस बात की है अपनी किट तैयार रखिए क्योंकि 30 और 31 मई को हरिद्वार की धरती पर पिकलबॉल का असली रोमांच देखने को मिलने वाला है ऑल द बेस्ट मैदान में मिलते हैं

उत्तराखंड बोर्ड: हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और सुधार परीक्षा हेतु अंतिम अवसर 24 मई

UK Board Improvement Exam – अगर आप उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं या 12वीं की परीक्षा देने वाले हैं, या फिर अपने नंबर सुधारने के लिए इम्प्रूवमेंट एग्जाम देना चाहते हैं, तो 24 मई आपके लिए आखिरी तारीख है। इसके बाद कोई फॉर्म जमा नहीं होगा। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि यह आखिरी मौका है। इसलिए बिल्कुल भी देर न करें और फटाफट अपना फॉर्म भर दें, ताकि आपका साल बर्बाद होने से बच सके।

UK Board Improvement Exam के फॉर्म भरने की आखिरी तारीख?

अगर आप उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं या 12वीं के रिजल्ट से खुश नहीं हैं, या किसी सब्जेक्ट में फेल हो गए हैं, तो आपके पास एक आखिरी मौका है। बोर्ड की इम्प्रूवमेंट एग्जाम का फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 24 मई है। इस मौके को हाथ से न जाने दें, क्योंकि इससे आपका साल बर्बाद होने से बच जाएगा। आप दोबारा पेपर देकर अपने नंबर बढ़ा सकते हैं, इसलिए समय रहते फॉर्म जरूर भर लें।

UK Board इम्प्रूवमेंट एग्जाम की ऑफिसियल वेबसाइट कहां देखें?

उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं या 12वीं परीक्षा से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हमेशा उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर ही भरोसा करें। इंटरनेट पर कई बार फर्जी वेबसाइट्स की वजह से स्टूडेंट्स परेशान हो जाते हैं इसलिए बोर्ड ने अपनी वेबसाइट्स ubse.uk.gov.in और uaresults.nic.in को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। आजकल स्कूल भी इसी पोर्टल के जरिए छात्रों की डिटेल्स अपलोड कर रहे हैं, इसलिए किसी भी नए अपडेट के लिए आप नियमित रूप से इन वेबसाइट्स को चेक करते रहें ताकि आपको सही जानकारी मिलती रहे।

यूके बोर्ड Improvement Exam मार्कशीट में क्या जरूरी बातें चेक करें?

जब भी आप कोई एग्जाम फॉर्म भरते हो या आपकी मार्कशीट आती है, तो उसकी एक-एक डिटेल बिल्कुल सही होनी चाहिए। उत्तराखंड बोर्ड के हाईस्कूल और इंटर का फॉर्म भरने की लास्ट डेट 24 मई ही है। इसलिए बिना देर किए अपने पुराने सारे पेपर्स निकालकर अभी चेक कर लो ताकि फॉर्म में कोई भी गड़बड़ न हो। नाम की स्पेलिंग और अपनी डेट ऑफ बर्थ जैसी ज़रूरी चीजें बहुत ध्यान से देख लेना ।

  • परीक्षार्थी का नाम (स्पेलिंग की जांच अवश्य करें)
  • माता और पिता का नाम
  • रोल नंबर और इनरोलमेंट संख्या
  • विद्यालय का नाम और केंद्र कोड
  • विषयवार प्राप्त अंक (थ्योरी और प्रैक्टिकल अलग-अलग)
  • कुल प्राप्तांक और प्रतिशत
  • अंतिम परिणाम की स्थिति

UK बोर्ड सुधार एग्जाम के जरूरी आंकड़े

छात्रों की सुविधा के लिए हमने इस पूरी समय-सारणी और आवश्यक कड़ियों को एक तालिका के रूप में संकलित किया है, जिससे आप एक ही नजर में सभी महत्वपूर्ण तिथियों और विवरणों को आसानी से समझ सकें।

विवरण (Description) महत्वपूर्ण तिथियां और जानकारी
बोर्ड का नाम उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE)
कक्षाएं हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं)
आवेदन की अंतिम तिथि 24 मई 2026
आधिकारिक वेबसाइट ubse.uk.gov.in
परीक्षा का प्रकार मुख्य वार्षिक परीक्षा एवं अंक सुधार परीक्षा (Improvement)
हेल्पलाइन नंबर बोर्ड आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध

उत्तराखंड बोर्ड सुधार परीक्षा के लिए जरूरी दस्तावेज

अपने सारे ज़रूरी पेपर्स पहले से ही पास में रखना ताकि फॉर्म भरते टाइम कोई बाधा न हो। इसीलिए नीचे दिए गए सारे डॉक्यूमेंट्स अपने स्कूल में ले जाकर सबमिट कर दो या फिर ऑनलाइन अपलोड कर देना।

  • पिछली कक्षा की मूल अंकतालिका या इंटरनेट से डाउनलोड की गई रिजल्ट कॉपी।
  • छात्र का आधार कार्ड या अन्य कोई वैध सरकारी पहचान पत्र।
  • हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो (जिसका बैकग्राउंड हल्का होना चाहिए)।
  • छात्र के हस्ताक्षर का स्कैन किया हुआ नमूना।
  • जाति या श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो और आप किसी विशेष छूट का लाभ लेना चाहते हैं)।
  • प्रवेश शुल्क या परीक्षा शुल्क की रसीद।

देहरादून में तेल की बचत के लिए परिवहन विभाग ने जरूरी टिप्स जारी किए।

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Saving Fuel in Dehradun – आईए जानते हैं की परिवहन विभाग ने क्या-क्या जरूरी सुझाव जारी किए हैं देहरादून के लिए जो की सीधा पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए हैं। परिवहन विभाग का मकसद लोगों को ऐसी ड्राइविंग आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना है|जिससे ईंधन की बचत हो सके और पर्यावरण को भी फायदा मिले। जो की खासकर उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी हैं जो रोज अपने वाहन का इस्तेमाल करते हैं। अगर लोग सही तरीके से गाड़ी चलाएं और छोटे-छोटे बदलाव अपने रोजमर्रा के जीवन में अपनाएं, तो वे अपने मासिक खर्च में एक अच्छी खासी बचत ला सकते हैं।लगातार बढ़ती तेल की कीमतों के बीच ये सलाह आम लोगों, छात्रों और ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।

Saving Fuel in Dehradun के लिए परिवहन विभाग की आसान सलाह

क्या हैं ,परिवहन विभाग के दिए हुए सुझाव जो रोज गाड़ी चलाने वाले लोगों को ध्यान में रखकर दिए हैं। देहरादून जैसे शहर में ट्रैफिक और पहाड़ी रास्तों की वजह से पेट्रोल और डीजल ज्यादा खर्च होता है,इसलिए इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर लोग सही तरीके से वाहन चलाएं, तो ईंधन की बचत आसानी से की जा सकती है।

  • वाहन को तेज गति से अचानक न बढ़ाएं
  • लंबे समय तक इंजन को चालू न छोड़ें
  • सही टायर प्रेशर बनाए रखें
  • अनावश्यक ब्रेक और एक्सीलेरेशन से बचें

देहरादून में ईंधन बचत गाइडलाइंस

क्या तरीका होगा जिससे ,ईंधन की बचत कर सकते हैं जिसके लिए सही तरीका सिर्फ यह है की ईंधन की बचत सिर्फ गाड़ी की तकनीक पर ही नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले के तरीके पर भी निर्भर करती है। अगर आप सही तरीके से ड्राइविंग करते हैं, तो बिना ज्यादा खर्च किए भी पेट्रोल और डीजल की अच्छी खशी बचत कर सकते हैं। छोटी-छोटी अच्छी आदतें आपके रोज के खर्च को कम करने में मदद करती हैं।

  • स्मूद और लगातार गति बनाए रखें
  • कम दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग करें
  • संभव हो तो कारपूलिंग अपनाएं
  • भीड़भाड़ में बार-बार गियर बदलने से बचें

सही ड्राइविंग से होने वाला लाभ

किस तरीके से गाड़ी चलाने पर पेट्रोल और डीजल की काफी बचत की जा सकती है। अच्छी ड्राइविंग आदतें न केवल आपके पैसे बचाती हैं बल्कि गाड़ी को भी बेहतर हालत में रखती हैं। इसके साथ ही इससे प्रदूषण कम होता है और सड़क पर सफर ज्यादा सुरक्षित बनता है और साथ मैं पैसे की भी काफी बचत होती है ।

  • धीमी और स्थिर गति से वाहन चलाएं
  • बार-बार ब्रेक लगाने से बचें
  • अनावश्यक ओवरटेकिंग न करें
  • सिग्नल पर इंजन बंद करने की आदत डालें

वाहन मेंटेनेंस से ईंधन बचत

क्या है सही तरीका जिससे, वाहन की गई सही देखभाल आपके ईंधन बचत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समय पर सर्विसिंग कराने से इंजन की क्षमता बेहतर रहती है और अनावश्यक ईंधन खर्च कम होता है और साथ मैं पैसे की भी बचत होती है ।

  • इंजन ऑयल समय पर बदलें
  • एयर फिल्टर साफ रखें
  • ब्रेक सिस्टम की जांच करवाएं
  • टायर की स्थिति पर ध्यान दें

मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी का निधन, उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि प्रदेश में शोक की लहर

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उत्तराखंड से मंगलवार सुबह एक दुखद खबर सामने आई। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का देहरादून के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य जगत से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

पूर्व सीएम मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के निधन पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा शोक व्यक्त किया। देहरादून स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उपराष्ट्रपति ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी का देश के विकास और जनसेवा में योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके निधन से देश ने एक विशिष्ट सैनिक, सक्षम प्रशासक और असाधारण सत्यनिष्ठा वाले राजनेता को खो दिया है। उनके कार्य और नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी भारतीय सेना में अपनी सेवाओं के साथ-साथ उत्तराखंड की राजनीति में साफ-सुथरी छवि और ईमानदार नेतृत्व के लिए पहचाने जाते थे। उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।

उत्तराखंड के 13 जिलों को ₹1018 करोड़ की सौगात, CM धामी ने दी मंजूरी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुमोदन के पश्चात इस वर्ष के लिये जिला योजना के अंतर्गत सभी जनपदों को विकास कार्यों हेतु कुल ₹ 1018.206 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। यह धनराशि प्रदेश के सभी 13 जनपदों की आवश्यकतानुसार आवंटित की गई है, जिसमें अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत ₹ 200.221 करोड, अनुसूचित जनजाति उपयोेजना हेतु ₹ 30.007 करोड के साथ ही सामान्य हेतु ₹ 787.978 करोड की धनराशि शामिल है।

जनपदों को गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिला योजना हेतु ₹ 1010.23 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई थी, जिसके सापेक्ष जनपदों द्वारा मार्च, 2026 तक ₹ 996.72 करोड़ व्यय किए गए तथा अवशेष धनराशि वित्त विभाग को समर्पित कर दी गई थी।

जनपदवार आवंटन में पौड़ी जनपद को सर्वाधिक ₹ 119.977 करोड़ तथा देहरादून को ₹ 99.394 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। इसके अतिरिक्त जनपद नैनीताल हेतु ₹ 70.189 करोड, उधमसिंह नगर हेतु ₹ 74.132 करोड, अल्मोडा हेतु ₹ 74.737 करोड, पिथौरागढ हेतु ₹ 71.737 करोड, बागेश्वर हेतु ₹ 59.618 करोड, चम्पावत हेतु ₹ 76.914 करोड, टिहरी हेतु ₹ 95.215 करोड, चमोली हेतु ₹ 74.237 करोड, उत्तरकाशी हेतु ₹ 76.542 करोड, रूद्रप्रयाग हेतु ₹ 58.158 करोड तथा हरिद्वार हेतु ₹ 67.356 करोड की धनराशि आवंटित की गई है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस धनराशि से जिला योजना के माध्यम से जनपदों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचना, ग्रामीण विकास, पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य जनोपयोगी योजनाओं को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार संतुलित एवं समावेशी क्षेत्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड ने खोया एक अनुशासित सैनिक, कुशल प्रशासक और जनप्रिय नेता: मुख्यमंत्री धामी

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूरी के निधन के बाद प्रदेशभर में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून पहुंचते ही बसंत विहार स्थित उनके आवास जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी। देखिए ये रिपोर्ट।

छत्तीसगढ़ प्रवास से लौटने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सीधे देहरादून के बसंत विहार स्थित पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय भुवन चंद्र खंडूरी के आवास पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मेजर जनरल बीसी खंडूरी का जीवन अनुशासन, ईमानदारी, राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के मूल्यों का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के बाद उन्होंने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भी उच्च आदर्श स्थापित किए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और विकास की मजबूत नींव रखने में खंडूरी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण सहित परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह क्षति केवल खंडूरी परिवार की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश की अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की।

मेजर जनरल बीसी खंडूरी का जाना उत्तराखंड की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है… ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे पहुंचकर श्रद्धांजलि देना और परिवार को सांत्वना देना इस दुख की घड़ी में संवेदना का बड़ा संदेश माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मध्य क्षेत्रीय परिषद् की 26वीं बैठक में प्रतिभाग किया

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आंतरिक सुरक्षा, आधारभूत विकास और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा के साथ मुख्यमंत्री ने मां नंदा राजजात यात्रा और 2027 के कुंभ मेले के सफल आयोजन के लिए सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। देखिए ये रिपोर्ट।

बस्तर, छत्तीसगढ़ में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया।

बैठक में विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने, आधारभूत ढांचे के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि राज्यों के बीच बेहतर संवाद और सहयोग से ही देश के संतुलित और समग्र विकास को नई गति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सहकारी संघीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली मां नंदा राजजात यात्रा और कुंभ मेले की तैयारियों का मुद्दा भी बैठक में उठाया। उन्होंने कहा कि ये आयोजन केवल उत्तराखंड नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजन हैं।

देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के समन्वित सहयोग की आवश्यकता होगी।

बैठक में साइबर अपराध नियंत्रण, सीमावर्ती राज्यों के बीच समन्वय, आपदा प्रबंधन को मजबूत करने और तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी मंथन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पर्यटन, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बस्तर में हुई इस अहम बैठक में उत्तराखंड ने जहां अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़े बड़े आयोजनों को प्रमुखता से रखा, वहीं सुरक्षा, विकास और राज्यों के बेहतर तालमेल पर भी मजबूत पैरवी की।