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उत्तराखंड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने 10 अगस्त तक मांगे सुझाव

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उत्तराखंड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने देशभर के विद्वानों से मांगे सुझाव

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग को प्रभावी और व्यापक स्वरूप देने के लिए सरकार ने देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों और संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

संस्कृत शिक्षा विभाग के अनुसार इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

संस्कृत को नई दिशा देगा प्रस्तावित आयोग

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की दूसरी राजभाषा का दर्जा देकर देश में एक नई मिसाल कायम की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग के गठन की आवश्यकता पर बल दिया था।

इसके बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

शिक्षा, शोध और डिजिटल संस्कृत पर रहेगा फोकस

प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करेगा।

इसके अलावा आयोग प्रशासन, तकनीकी क्षेत्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ संस्कृत के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम करेगा। साथ ही संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की आधारशिला है। राज्य सरकार संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और आधुनिक समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि संस्कृत आयोग का गठन भाषा के संरक्षण, शोध और नवाचार को नई गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के दूसरे चरण का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के दूसरे चरण का शुभारंभ, 488 महिलाओं को मिली ₹2.76 करोड़ की सहायता

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 488 महिला लाभार्थियों को कुल ₹2 करोड़ 76 लाख 16 हजार 875 रुपये की सहायता राशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की।

योजना के दूसरे चरण में 212 नई महिला लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में ₹1 करोड़ 55 लाख 40 हजार तथा प्रथम चरण की 276 महिला लाभार्थियों को द्वितीय किश्त के रूप में ₹1 करोड़ 20 लाख 76 हजार 875 रुपये प्रदान किए गए।

एकल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी मजबूत बनता है। राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार प्रदान करना है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का उद्देश्य एकल, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिलाओं, एसिड अटैक पीड़िताओं, अन्य आपराधिक घटनाओं से प्रभावित महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

75 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार स्थापित करने के लिए अधिकतम ₹2 लाख तक की परियोजना स्वीकृत की जाती है, जिसमें 75 प्रतिशत तक अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर सरकार का विशेष फोकस

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी अभियान, महिला आरक्षण और तीन तलाक उन्मूलन जैसे फैसलों ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार भी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है।

2.65 लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। वहीं 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य कर रही है।

महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

मंत्री रेखा आर्या ने बताया महिलाओं के लिए मील का पत्थर

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश की एकल महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और आत्मविश्वास का नया अध्याय लिख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को सहायता की पात्र नहीं, बल्कि विकास की साझेदार मानते हुए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया ‘सेवा विधि’ पुस्तक का विमोचन

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में पूर्व अपर सचिव आर.सी. लोहनी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सेवा विधि’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुस्तक को सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए लेखक के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकारी सेवा में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का दायित्व है कि वह सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ राज्य के विकास में योगदान दे। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए नियमों, प्रक्रियाओं और संवैधानिक प्रावधानों की सही जानकारी होना बेहद आवश्यक है।

अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद अब तक ऐसी कोई समग्र पुस्तक उपलब्ध नहीं थी, जिसमें सरकारी सेवा से जुड़े नियम, संवैधानिक व्यवस्थाएं, शासनादेश और न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय एक ही स्थान पर सरल भाषा में संकलित हों। उन्होंने कहा कि ‘सेवा विधि’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका है, जो उन्हें सेवा काल के दौरान सही निर्णय लेने और नियमों की स्पष्ट समझ विकसित करने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि जब कोई अधिकारी किसी नागरिक की समस्या का समाधान करता है, किसी जरूरतमंद को उसका अधिकार दिलाता है या सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाता है, तब वह वास्तविक अर्थों में राष्ट्रसेवा कर रहा होता है।

सुशासन और पारदर्शिता पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। शासन व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और निर्णय लेने की गति बढ़ाने जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य का विकास केवल योजनाओं और बजट से नहीं होता, बल्कि एक सक्षम, संवेदनशील और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है। सरकार की नीतियां तभी सफल होती हैं जब उन्हें ईमानदारी और जनहित की भावना के साथ धरातल पर लागू किया जाए।

‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ है सरकार का मूल मंत्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अधिकारी नियमों की आत्मा को समझते हैं और उन्हीं नियमों के भीतर जनहित का रास्ता निकालते हैं। शासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि जनता का जीवन आसान बनाना है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” है। हर प्रक्रिया को सरल बनाना, समस्याओं का स्थायी समाधान करना, फाइलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना और जनता को संतुष्टि देना ही सुशासन की पहचान है।

पुस्तक में शामिल हैं सेवा नियमों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय

पुस्तक के लेखक आर.सी. लोहनी ने बताया कि पुस्तक में संवैधानिक व्यवस्थाओं, अधिनियमों, नियमों, विनियमों, शासनादेशों और उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का समावेश किया गया है।

पुस्तक में नियुक्ति, आरक्षण, परिवीक्षा, स्थायीकरण, ज्येष्ठता, पदोन्नति, स्थानांतरण, अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन, अपील, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, राज्य कर्मचारी आचरण नियम, अवकाश, राजभाषा अधिनियम और सेवा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से शामिल किया गया है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, पूर्व अपर सचिव भूपेश तिवारी, जी.बी. ओली, रमेशचन्द्र शर्मा, हंसादत्त पाण्डेय, पूर्व संयुक्त सचिव नवीन सिंह तड़ानी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा

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शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा, समयबद्ध विकास और बुनियादी सुविधाओं पर दिया जोर

देहरादून। उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने विधानसभा स्थित सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रदेशभर में चल रही शहरी विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में संचालित सभी विकास कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

बैठक में मंत्री ने वर्षाकाल को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से सड़क निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधूरे सड़क कार्यों के कारण लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े और संबंधित शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश

राम सिंह कैड़ा ने रायपुर, बंजारावाला, नैनीताल, हल्द्वानी, टनकपुर, विकासनगर, किच्छा और कोटद्वार सहित विभिन्न शहरों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सीवर लाइन, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एडीबी, केएफडब्ल्यू और ईआईबी की परियोजनाओं की समीक्षा

मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), केएफडब्ल्यू (जर्मन बैंक) और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (EIB) की सहायता से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि ईआईबी के सहयोग से पिथौरागढ़, सितारगंज, रुद्रपुर और काशीपुर में कई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनसे लगभग 6 से 7 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

वहीं, केएफडब्ल्यू के सहयोग से ऋषिकेश में पेयजल व्यवस्था, तपोवन में स्ट्रीट लाइट सिस्टम तथा 24 ई-बसों के संचालन की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

पूर्ण परियोजनाओं का जल्द हो लोकार्पण

शहरी विकास मंत्री ने निर्देश दिए कि जो विकास कार्य पूर्ण हो चुके हैं, उनका शीघ्र लोकार्पण कराया जाए ताकि जनता को उनका लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं की नियमित निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी

राम सिंह कैड़ा ने कहा कि उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में बनाए रखने के लिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आवश्यक है। उन्होंने जलागम विभाग द्वारा किए जा रहे वृक्षारोपण कार्यों की सराहना करते हुए “पेड़ बचाओ अभियान” को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को आगे बढ़ाने की बात कही।

बैठक में सचिव नितेश झा, परियोजना निदेशक अभिषेक रोहिला, अपर परियोजना निदेशक विनय मिश्रा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।


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CM धामी ने शुरू किया ‘बीज संजीवनी अभियान

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CM धामी ने शुरू किया ‘बीज संजीवनी अभियान’, आम और जामुन के बीज रोपकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हरिद्वार से हुई जनभागीदारी आधारित पहल की शुरुआत, हरित उत्तराखंड अभियान को मिलेगी नई गति

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम महोत्सव कार्यक्रम के दौरान ‘बीज संजीवनी अभियान’ का शुभारंभ कर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में नई पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम, जामुन, कटहल, नीम और बेल के बीज रोपित कर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि फल खाने के बाद उनके बीजों को फेंकने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर रोपित करें, ताकि अधिक से अधिक वृक्ष विकसित हों और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।

जनभागीदारी से बनेगा हरित उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आम, जामुन, कटहल, बेल और अन्य फलों के बीजों को रोपित कर आम नागरिक भी प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह अभियान लोगों को प्रकृति से जोड़ने और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास है।

हरिद्वार से पूरे प्रदेश में चलेगा अभियान

मुख्यमंत्री ने बताया कि बीज संजीवनी अभियान की शुरुआत हरिद्वार से की गई है और इसे जल्द ही पूरे उत्तराखंड में जनआंदोलन के रूप में विस्तार दिया जाएगा। अभियान के तहत प्राकृतिक रूप से पौधों के विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे हरित हरिद्वार अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि इस पहल से जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

युवाओं और संस्थाओं से जुड़ने की अपील

मुख्यमंत्री ने युवाओं, विद्यार्थियों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक बीज रोपित कर उत्तराखंड को हराभरा बनाने में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनसहभागिता से संचालित यह अभियान भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रभावशाली जनआंदोलन का रूप लेगा और राज्य को हरित एवं स्वच्छ बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

CM धामी ने हरिद्वार से शुरू किया ‘बीज संजीवनी अभियान’ | आम, जामुन और बेल के बीज रोपने की अपील

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम महोत्सव में ‘बीज संजीवनी अभियान’ का शुभारंभ किया। प्रदेशवासियों से फलों के बीज रोपित कर हरित उत्तराखंड अभियान में भागीदारी की अपील की।

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उत्तराखंड की बेटियों का अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में जलवा, CM धामी ने किया सम्मानित

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उत्तराखंड की बेटियों का अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में जलवा, CM धामी ने किया सम्मानित

निकिता चंद और काजल फर्स्वाण ने जीते एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक, आरती धारियाल ने रोमानिया में जीता स्वर्ण पदक

देहरादून। उत्तराखंड की बेटियां अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाली पिथौरागढ़ की महिला मुक्केबाजों निकिता चंद, काजल फर्स्वाण और आरती धारियाल को सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके प्रशिक्षकों बृजेंद्र मल और ललित कुँवर को भी सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की गई।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय हैं और राज्य की बेटियों की प्रतिभा, मेहनत तथा दृढ़ संकल्प का प्रमाण हैं।

एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में चमकी उत्तराखंड की प्रतिभा

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 3 से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित अंडर-23 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पिथौरागढ़ की निकिता चंद ने 60 किलोग्राम भार वर्ग तथा काजल फर्स्वाण ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किए।

निकिता चंद पहले भी वर्ष 2021, 2022 और 2023 की एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। वर्तमान में वह प्रशिक्षक बृजेंद्र मल और भास्कर भट्ट के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं।

काजल फर्स्वाण की सफलता का सफर

मुनस्यारी के भदेली गांव की रहने वाली काजल फर्स्वाण ने भी मुक्केबाजी में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वह पहले अंडर-19 एशियन चैंपियनशिप में रजत, अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक और 38वें राष्ट्रीय खेल 2025 में भी रजत पदक जीत चुकी हैं। वर्तमान में वह पटियाला स्थित राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

रोमानिया में आरती धारियाल ने जीता स्वर्ण

पिथौरागढ़ की एक और प्रतिभाशाली मुक्केबाज आरती धारियाल ने 12 से 16 जुलाई 2026 तक रोमानिया में आयोजित गोल्ड बेल्ट बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 54 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत और उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया।

गौड़ीहाट निवासी आरती 2024 और 2025 की एलीट महिला राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं। उनका चयन भी राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप, पटियाला के लिए हुआ है।

CM धामी बोले— बेटियां रच रही हैं नए कीर्तिमान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की बेटियां खेलों में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवारों के सहयोग का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सके।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निकिता, काजल और आरती जैसी खिलाड़ी आने वाले समय में भी देश और प्रदेश के लिए नए रिकॉर्ड स्थापित करेंगी और युवा पीढ़ी को प्रेरित करती रहेंगी।

कांवड़ यात्रा 2026:30 जुलाई से शुरू महादेव की बारात को हरिद्वार तैयार

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कांवड़ यात्रा 2026: मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, बोले- सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्वच्छ हो कांवड़ मेला

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मेला नियंत्रण भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक क्षमता, सेवा भावना और व्यवस्थागत दक्षता की परीक्षा भी है। उन्होंने अधिकारियों को “सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़” के लक्ष्य के साथ कार्य करने को कहा।

रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अब तक 45 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं, जबकि 55 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश यात्रा पर पहुंच चुके हैं। अनुमान है कि इस बार कांवड़ यात्रा में भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचेंगे। ऐसे में सभी विभाग अपनी तैयारियां उसी अनुरूप सुनिश्चित करें।

महिला श्रद्धालुओं के लिए पिंक टॉयलेट और विशेष सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्ग और प्रमुख पड़ावों पर महिला श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त संख्या में स्वच्छ पिंक टॉयलेट स्थापित किए जाएं। साथ ही पेयजल, विश्राम स्थल, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

AI, ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और एआई आधारित निगरानी प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों और भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।

ट्रैफिक प्लान पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रियों और स्थानीय नागरिकों के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग यातायात व्यवस्था बनाई जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीआईपी मूवमेंट के कारण किसी भी श्रद्धालु की यात्रा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और वाटर एंबुलेंस रहें तैयार

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रमुख पड़ावों और घाटों पर पर्याप्त संख्या में मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात रहें। हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख घाटों पर वाटर एंबुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस और अग्निशमन विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए।

खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष निगरानी

मुख्यमंत्री ने होटल, ढाबों और खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच करने के निर्देश दिए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस और पंजीकरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया है।

उन्होंने नो-प्लास्टिक अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने और यात्रा समाप्ति के बाद तत्काल सफाई अभियान चलाकर क्षेत्र को पूर्व स्थिति में लाने के निर्देश भी दिए।

महाकुंभ-2027 की तैयारियां प्रभावित न हों

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा के दौरान महाकुंभ-2027 की तैयारियों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आना चाहिए। दोनों व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विकास कार्यों को तय समय पर आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को एक बार फिर उत्कृष्ट प्रबंधन और बेहतर व्यवस्थाओं का उदाहरण प्रस्तुत करना है, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालु देवभूमि से सकारात्मक अनुभव लेकर लौटें।

उत्तराखंड के युवाओं को जापान में मिलेगा रोजगार

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उत्तराखंड के युवाओं के लिए जापान में नौकरी के नए अवसर, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने किया देहरादून दौरा

CM धामी की पहल को मिली रफ्तार, कौशल विकास और जापानी भाषा प्रशिक्षण से खुलेंगे वैश्विक रोजगार के द्वार

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर उत्तराखंड सरकार द्वारा युवाओं को विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में जापान की प्रतिष्ठित कंपनी अनाडुकी ग्लोबल करियर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को देहरादून स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय और दून विश्वविद्यालय का दौरा कर राज्य के कौशल विकास एवं भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जायजा लिया।

प्रतिनिधिमंडल में हिदेतारो उसुई, माई इकुता और मिहोको मात्सुमोतो शामिल रहे। इस दौरे का उद्देश्य उत्तराखंड और जापान के बीच कौशल विकास, जापानी भाषा प्रशिक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय रोजगार सहयोग को मजबूत करना है।

जापानी भाषा सीख रहे युवाओं से किया संवाद

क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जापानी भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से बातचीत की। प्रतिनिधियों ने छात्रों की भाषा दक्षता, तकनीकी कौशल और रोजगार संबंधी तैयारियों का आकलन किया।

उन्होंने छात्रों को जापानी भाषा के सही उच्चारण, व्यावहारिक संवाद, कॉरपोरेट एथिक्स और जापान की कार्य संस्कृति के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्तमान समय में जापान में आईटी, हॉस्पिटैलिटी, इंजीनियरिंग और केयरगिविंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित और जापानी भाषा जानने वाले युवाओं की भारी मांग है।

दून विश्वविद्यालय में रोजगार और शिक्षा पर चर्चा

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने दून विश्वविद्यालय में जापानी भाषा विभाग के शिक्षकों और प्लेसमेंट अधिकारियों के साथ बैठक कर भाषा शिक्षा को और अधिक रोजगारोन्मुख बनाने पर चर्चा की। साथ ही जापान में उच्च शिक्षा, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधियों ने कहा कि जापान में सफल करियर के लिए केवल भाषा ज्ञान ही नहीं, बल्कि वहां की कार्य संस्कृति, सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक मूल्यों की समझ भी जरूरी है।

CM धामी की पहल से खुल रहे वैश्विक अवसर

निदेशक सेवायोजन नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण के साथ युवाओं को अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति और रोजगार से जुड़ी आवश्यक दक्षताओं का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने कहा कि जापान सहित विभिन्न देशों के साथ बढ़ता सहयोग उत्तराखंड के युवाओं के लिए बेहतर रोजगार और उज्ज्वल करियर के नए अवसर लेकर आ रहा है। उन्होंने बताया कि जापानी प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की है और भविष्य में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।

उत्तराखंड के युवाओं के लिए बड़ा अवसर

राज्य सरकार की यह पहल उन युवाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है जो विदेशों में रोजगार और बेहतर करियर की तलाश कर रहे हैं। जापानी भाषा प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तराखंड के युवा अब वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकेंगे।

हरिद्वार गंगा कॉरिडोर: CM धामी ने 235 करोड़ की 4 बड़ी परियोजनाओं का किया शिलान्यास | Mahakumbh 2027

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हरिद्वार को मिलेगी विकास की नई रफ्तार, CM धामी ने 235 करोड़ की चार बड़ी परियोजनाओं का किया शिलान्यास

महाकुंभ-2027 और कांवड़ यात्रा की तैयारियों को मिलेगा नया आयाम, हरिद्वार बनेगा विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगर

हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार ने धर्मनगरी हरिद्वार को आधुनिक, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 235 करोड़ रुपये की लागत वाली चार महत्वपूर्ण आधारभूत अवसंरचना परियोजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया।

इन परियोजनाओं के माध्यम से आगामी महाकुंभ-2027 की तैयारियों को नई गति मिलेगी, वहीं हर वर्ष आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों को बेहतर एवं सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही पर्यटन, व्यापार, परिवहन, होटल उद्योग और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

इन चार परियोजनाओं का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने अलकनंदा होटल, हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम में—

  • 43.25 करोड़ रुपये की लागत से प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमि पूजन किया।
  • 66.76 करोड़ रुपये की लागत से हर की पैड़ी एवं सुभाष घाट पुनरुद्धार परियोजना का शिलान्यास किया।
  • 66.34 करोड़ रुपये की लागत से हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास कार्यों का शुभारंभ किया।
  • 58.84 करोड़ रुपये की लागत से रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास किया।

हरिद्वार बनेगा विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये परियोजनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि हरिद्वार को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी बनाने के व्यापक विजन का हिस्सा हैं। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी सोच के तहत राज्य सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर और विवेकानंद कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।

महाकुंभ-2027 को बनाया जाएगा ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी महाकुंभ-2027 को इतिहास का सबसे दिव्य, भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित महाकुंभ बनाने के लिए सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि हरिद्वार में नए घाटों और पुलों का निर्माण, प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण, यातायात व्यवस्था का आधुनिकीकरण तथा श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है।

हेलीपोर्ट, पॉड टैक्सी और रोपवे परियोजनाओं पर भी काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार को केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से संपन्न शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

  • हरिद्वार मेडिकल कॉलेज का निर्माण अंतिम चरण में है।
  • लालढांग में मॉडल डिग्री कॉलेज और श्यामपुर में स्वास्थ्य केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
  • हेलीपोर्ट, पॉड टैक्सी और हर की पैड़ी से चंडी देवी व मनसा देवी तक रोपवे परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
  • मोतीचूर और शंकराचार्य फ्लाईओवर क्षेत्रों में पार्किंग, गेम जोन और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।

स्थायी कांवड़ इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब केवल अस्थायी व्यवस्थाओं तक सीमित रहने के बजाय कांवड़ यात्रा मार्गों के स्थायी और आधुनिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि हर वर्ष आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

सुशासन और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और देवभूमि की अस्मिता को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।

उत्तराखंड के ग्रोथ सेंटर्स को मिलेगा नया बल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दिए मार्केट लिंकेज और कोल्ड स्टोरेज के निर्देश

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उत्तराखंड के ग्रोथ सेंटर्स को मिलेगा नया बल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दिए मार्केट लिंकेज और कोल्ड स्टोरेज के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी संबंधित विभागों को इन केंद्रों को बाजार, निजी भागीदारी और आधुनिक भंडारण सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित ग्रोथ सेंटर्स की कार्यप्रणाली और प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि ग्रोथ सेंटर्स स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं और इन्हें अधिक प्रभावी बनाने के लिए मजबूत मार्केट लिंकेज तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सफल मॉडल को मिलेगा प्रोत्साहन, बंद केंद्रों को किया जाएगा सक्रिय

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेशभर में संचालित ग्रोथ सेंटर्स की नियमित समीक्षा की जाए। बेहतर प्रदर्शन करने वाले केंद्रों को तकनीकी और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, जबकि निष्क्रिय पड़े केंद्रों को दोबारा सक्रिय करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

उन्होंने सभी उत्पादों को ट्रेसेबिलिटी, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया, ताकि उत्तराखंड के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान मिल सके।

पशुपालकों से संवाद बढ़ाने पर जोर

बैठक में शीप एंड वूल डेवलपमेंट बोर्ड की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने पशुपालकों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित संवाद और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि अन्य राज्यों में इस क्षेत्र में बेहतर मॉडल कार्यरत हैं तो उनका अध्ययन कर उत्तराखंड में भी लागू किया जाना चाहिए।

कोल्ड स्टोरेज और माइक्रो स्टोरेज चेन होगी विकसित

मुख्य सचिव ने ग्रोथ सेंटर्स को कोल्ड स्टोरेज चेन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्टैंड-अलोन माइक्रो स्टोरेज चेन विकसित की जा सकती है। इससे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और किसानों व उत्पादकों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

हाउस ऑफ हिमालयाज और नाबार्ड की भूमिका होगी अहम

उन्होंने निर्देश दिए कि हाउस ऑफ हिमालयाज के साथ सभी संबंधित विभागों की समन्वय बैठक आयोजित की जाए, ताकि ग्रोथ सेंटर्स के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही संभावनाशील लेकिन निष्क्रिय ग्रोथ सेंटर्स की हैंडहोल्डिंग किए जाने पर भी जोर दिया।

मुख्य सचिव ने नाबार्ड को ग्रोथ सेंटर्स में मौजूद कमियों की पहचान कर आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं, फॉरेस्ट (JICA) से जुड़े ग्रोथ सेंटर्स के लिए विस्तृत बिजनेस प्लान तैयार करने को भी कहा।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव कहकशां नसीम, आनन्द श्रीवास्तव, झरना कामठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।