Home Blog Page 163

हेमकुंड साहिब: बर्फ से ढकी वादियों में अंतिम अरदास, आज दोपहर बंद होंगे कपाट

0

हेमकुंड साहिब: बर्फ से ढकी वादियों में अंतिम अरदास, आज दोपहर बंद होंगे कपाट

सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब में इन दिनों बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को यहां इस वर्ष की अंतिम अरदास की जाएगी, जिसके बाद गुरुद्वारे के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। दोपहर करीब एक बजे कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अनुसार, कपाट बंद करने की सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब के पाठ के साथ इस प्रक्रिया की शुरुआत होगी। इसके बाद कीर्तन और अरदास के उपरांत, गुरुग्रंथ साहिब को विधिपूर्वक सचखंड में सुशोभित किया जाएगा। दोपहर एक बजे कपाट औपचारिक रूप से बंद कर दिए जाएंगे।

कपाट बंद होने के साक्षी बनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ घांघरिया और आसपास के क्षेत्रों में उमड़ पड़ी है। वहीं, हाल ही में हुई बर्फबारी के चलते हेमकुंड साहिब और इसके आसपास का पूरा इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक गया है, जिससे दृश्य और भी रमणीय हो गया है।

इस अवसर पर लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

मैथिली ठाकुर के राजनीति में कदम रखने की अटकलें तेज, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चर्चाएं गरम

0

मैथिली ठाकुर के राजनीति में कदम रखने की अटकलें तेज, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चर्चाएं गरम

पटना / जबलपुर, अक्टूबर 2025:सियासत कब किसे हीरो बना दे और कब किसी को हाशिए पर ढकेल दे — इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। बिहार की राजनीति में अब एक नया नाम सुर्खियों में है — लोकप्रिय भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर। संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज़ और भक्ति गीतों से पहचान बनाने वाली मैथिली ठाकुर के राजनीतिक मैदान में उतरने की अटकलें अब तेज़ हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मैथिली ठाकुर ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद यह चर्चा ज़ोर पकड़ने लगी है कि मैथिली 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में चुनावी किस्मत आज़मा सकती हैं। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उनके पिता भी साथ मौजूद थे।


मैथिली ठाकुर ने खुद क्या कहा?

जबलपुर दौरे पर पहुंचीं मैथिली ठाकुर से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा:

“मैं भी टीवी पर ये खबरें देख रही हूं। हाल ही में बिहार में मेरी नित्यानंद राय जी और विनोद तावड़े जी से मुलाकात हुई थी। हमने बिहार के भविष्य को लेकर बातें कीं, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। देखते हैं आगे क्या होता है।”

अपने राजनीतिक रुझान को लेकर उन्होंने साफ कहा,

“मैं अपने गांव के क्षेत्र से चुनाव लड़ना पसंद करूंगी, क्योंकि उस जगह से भावनात्मक जुड़ाव है।”

जब उनसे यह पूछा गया कि बिहार चुनाव में वे किसे समर्थन देंगी, तो उन्होंने फिलहाल किसी तरह की राजनीतिक प्रतिबद्धता जताने से इनकार करते हुए कहा:

“मैं इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। हां, देश के विकास में जितना संभव हो, योगदान देने के लिए तैयार हूं।”


बदले बिहार में लौटने की चाह

यह भी कहा जा रहा है कि वर्ष 1995 में, जब बिहार में लालू यादव का शासन आया था, तब मैथिली ठाकुर का परिवार बिहार छोड़कर बाहर चला गया था। लेकिन अब बदलते बिहार की तस्वीर और विकास की रफ्तार देखकर परिवार की यह होनहार बेटी एक बार फिर अपने राज्य की सेवा करने की इच्छा लेकर बिहार लौटने को तैयार दिख रही हैं।


क्या मैथिली ठाकुर बनेंगी बीजेपी का नया चेहरा?

बीजेपी सूत्रों की मानें तो पार्टी राज्य में युवा, लोकप्रिय और साफ-सुथरी छवि वाले चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में मैथिली ठाकुर का नाम इस रणनीति में फिट बैठता है।
उनकी लोकप्रियता, सांस्कृतिक जड़ें, और परिवार की सामाजिक स्वीकार्यता उन्हें एक मजबूत प्रत्याशी बना सकती है — खासकर ग्रामीण, महिला और युवा वोटरों के बीच।


📌 फिलहाल निष्कर्ष?

हालांकि, अभी तक किसी भी राजनीतिक दल या स्वयं मैथिली ठाकुर की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे ये साफ है कि उनके राजनीति में प्रवेश की संभावनाएं नकारा नहीं जा सकतीं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले अगर मैथिली ठाकुर सियासत में उतरती हैं, तो यह राज्य की राजनीति को एक नया आयाम दे सकता है — जहां भक्ति के सुर अब जनसेवा के मंच पर गूंज सकते हैं।

Physics Wala Online Coaching Class मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में सरस आजीविका मेले का किया उद्घाटन, 2.20 करोड़ रुपये की योजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में सरस आजीविका मेले का किया उद्घाटन, 2.20 करोड़ रुपये की योजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

ऋषिकेश, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में आयोजित “सरस आजीविका मेला” में प्रतिभाग करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) की 12 आर्थिक गतिविधियों हेतु 1.20 करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण किया। साथ ही, 10 अन्य सीएलएफ के लिए प्रस्तावित 1 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों का शिलान्यास भी किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने “Rising Tehri – Physics Wala Online Coaching Class” का भी उद्घाटन किया। इस पहल के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं जेईई, नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अपने गांव-घर में रहते हुए ऑनलाइन माध्यम से कर सकेंगे।


“ग्रामोत्थान परियोजना” की पहल की सराहना

मुख्यमंत्री ने इस मेले में ग्राम्य विकास विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा संचालित ग्रामोत्थान परियोजना की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल ग्रामीण विकास को गति देने के साथ ही महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।


आजीविका मेले से “वोकल फॉर लोकल” को मिला नया आयाम

मुख्यमंत्री ने मेले में उपस्थित स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और बड़ी संख्या में मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा,

“यह मेला हमारी ग्रामीण संस्कृति, परंपरा, कौशल और उद्यमिता को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को साकार करने में सहयोगी बन रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि इन मेलों के जरिए ग्रामीण कारीगर, महिला समूह, हस्तशिल्पी और कृषि उत्पादक अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सफल हो रहे हैं। मेले में “स्वदेशी अपनाओ” थीम पर आधारित स्टॉल्स लोगों को स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का संदेश दे रहे हैं।


“स्वदेशी अपनाना, सपनों में निवेश करना है” – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, तो वह केवल एक वस्तु की खरीद नहीं होती, बल्कि वह हमारे ग्रामीण कारीगरों, मातृशक्ति और उद्यमियों के सपनों में सीधा निवेश होता है।

उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव स्वदेशी पर टिकी है। यह मेला उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा।”


महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार के ठोस कदम

मुख्यमंत्री श्री धामी ने बताया कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

  • “लखपति दीदी योजना” के अंतर्गत अब तक राज्य की 1.65 लाख महिलाएं लखपति बन चुकी हैं।
  • “मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना” के अंतर्गत 2000 स्टॉल्स के जरिए 5.5 करोड़ रुपये के उत्पादों का विपणन किया गया है।
  • “मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना” महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शुरू किए गए “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के माध्यम से राज्य की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं।


5 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं स्वयं सहायता समूहों से

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 68,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनसे 5 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा 7,500 से अधिक ग्राम संगठन और 534 क्लस्टर लेवल संगठन भी गठित किए जा चुके हैं।


महिला किसानों को भी मिल रहा लाभ

महिला किसानों के विषय में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “फार्म लाइवलीहुड योजना” और “महिला किसान सशक्तिकरण योजना” के अंतर्गत 3 लाख से अधिक महिला किसानों के कौशल और क्षमता का विकास कर चुकी है।

  • 2.5 लाख एग्रीन्यूट्री गार्डन और किचन गार्डन स्थापित किए गए हैं।
  • 500 से अधिक फार्म मशीनरी बैंक उपलब्ध कराए गए हैं।
  • 5,000 से अधिक महिला किसान ऑर्गेनिक खेती से भी जुड़ी हैं।

इन प्रयासों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, और वे आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।


कार्यक्रम में गणमान्यजन रहे उपस्थित

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, श्री सुबोध उनियाल, अनेक स्वयं सहायता समूहों के सदस्य, ग्रामीण उद्यमी एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


📌 निष्कर्ष

सरस आजीविका मेला न केवल स्थानीय उत्पादों के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभरा है, बल्कि यह महिलाओं और ग्रामीण समुदायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर भी बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री की यह पहल उत्तराखंड को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और उद्यमशील राज्य बनाने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है।

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शाम में पंडित उल्हास कशालकर की सुरमयी प्रस्तुति ने मोहा मन

0

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शाम में पंडित उल्हास कशालकर की सुरमयी प्रस्तुति ने मोहा मन

देहरादून, विरासत साधना के अंतर्गत आज का दिन नृत्य, संगीत और संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्चों ने नृत्य राग प्रतियोगिता में भाग लेकर दर्शकों को अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से चकित कर दिया। खास बात यह रही कि अधिकतर प्रस्तुतियां बालिकाओं की थीं, जिन्होंने नृत्य के माध्यम से अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत हुई सानिका बर्थवाल की प्रस्तुति से, जिन्होंने “बरसन लागी बदरिया रूम झूम के…” पर नृत्य कर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद सेंट जोज़ेफ एकेडमी की प्रणिका झिल्डियाल, हैरिटेज स्कूल की समीक्षा नेगी, डुमरी एडुविला इंस्टीट्यूट की प्रकिता जखमोला, वेनहेल स्कूल की एशवेन नेगी व गौरी चमनवाल, सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल की आकृति मैठाणी, सेंट कबीर स्कूल की साहनवी बिजल्वाण व देवयाना कोठियाल, जीआईसी नथुवावाला के ध्रुव वर्मा, और न्यू ब्लूसूम स्कूल की तेजल त्यागी ने अपने-अपने अद्वितीय अंदाज़ में प्रस्तुति दी, जिन्हें देखकर दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

सेंट पेट्रिक स्कूल की एरिका रोज पिंटू की प्रस्तुति “सब सरकार तुम्हई से है…” ने माहौल को भावविभोर कर दिया। वहीं अस्मिता खेत्रपाल, शेम्या अग्रवाल, आराध्या बहुगुणा, स्वर्ण शिखा खंडूड़ी, अक्षिता राव, और ओजस्वी कुनवाल की प्रस्तुतियां भी बेहद सराही गईं। सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के उपरांत प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।


उज़्बेक लोकसंगीत की गूंज से गूंजा विरासत का मंच

आज की सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत हुई उज़्बेकिस्तान के मशहूर म्यूज़िकल ग्रुप की प्रस्तुति से, जिसने अपने पारंपरिक गीत-संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ग्रुप की अगुवाई कर रहीं थीं मुख्य कोरियोग्राफर फोतिमाबोनू उमरोवा, उनके साथ रहीं नर्तकियां लोला चोलिबोयेवा और रुशाना ओक्टामोवा, और गायन में शामिल हुए फ़ैक्सरिद्दीन ज़ोलनाज़रोव, इब्रोहिम उर्चिनोव और शाक्सज़ोद योल्दाशेव

इन कलाकारों ने अपने गीतों के माध्यम से न केवल उज़्बेक संस्कृति की झलक पेश की, बल्कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक सौहार्द का सुंदर संदेश भी दिया। उनके प्रस्तुत गीत “कट्टा अशुला” ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। यह पारंपरिक उज़्बेक शैली बिना वाद्य यंत्रों के प्रस्तुत की जाती है, जिसमें केवल स्वर और लय का उपयोग होता है।

तोकशिरबेक ख़ाविदोव, फ़ख़रिद्दीन नज़रोव और शहज़ाद युलदाशोव ने अपने एकल गायन से दर्शकों के दिल जीत लिए। “लड़की हसीन हो, लड़का जवान हो…” जैसे गीतों पर श्रोता भी सुरों के संग बह चले।


सरोद की सुरों से बंधी विरासत की शाम – प्रतीक श्रीवास्तव की प्रस्तुति ने लूटी वाहवाही

प्रसिद्ध सरोद वादक प्रतीक श्रीवास्तव ने जैसे ही अपने वाद्य की झंकार छेड़ी, सांस्कृतिक संध्या का वातावरण एकदम सुरमयी हो गया। उनके साथ तबला वादक शुभ महाराज की जुगलबंदी ने प्रस्तुति को और भी उत्कृष्ट बना दिया। उन्होंने राग श्याम कल्याण से आरंभ कर राग मेघ के साथ समापन किया, जो एक सशक्त संगीतमय यात्रा की तरह रहा।

प्रतीक का संगीत सफर मात्र 6 वर्ष की उम्र में आरंभ हुआ था, जब उनके दादा पंडित रवि चक्रवर्ती, मैहर घराने के प्रख्यात सरोद वादक, ने उन्हें सरोद की दीक्षा दी। इसके बाद उनके चाचा डॉ. राजीब चक्रवर्ती ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में वह पंडित अजय चक्रवर्ती और पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार से उन्नत शिक्षा ले रहे हैं।

प्रतीक श्रीवास्तव ने देश-विदेश में अनेक संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है और अपनी स्पष्ट तानों तथा लयकारी से संगीत जगत में विशेष पहचान बनाई है।


पंडित उल्हास कशालकर की गायकी ने रचा संगीत का जादू

सांस्कृतिक संध्या का सबसे बहुप्रतीक्षित क्षण तब आया जब मंच पर उपस्थित हुए हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के स्तंभ, पद्मश्री पंडित उल्हास कशालकर। रिमझिम बारिश और मौसम की चुनौती के बावजूद उनकी गायकी ने माहौल को सधा कर रखा।

उन्होंने अपने गायन की शुरुआत राग संपूर्ण मालकौंस से की और दो पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत कीं —

  • बड़ा ख़याल: “बराज रही…”
  • छोटा ख़याल: “कित ढूंढन जाऊं…”

दोनों ही बंदिशें विलंबित तीन ताल में थीं और उनकी प्रस्तुति में गायकी का गहराई से अनुभव किया गया।

पंडितजी के साथ मंच पर संगत कर रहे थे:

  • प्रो. ओजेश प्रताप सिंह – स्वर संगत एवं तानपुरा
  • डॉ. विनय मिश्रा – हारमोनियम
  • कौस्तुव स्वैन – तबला
  • अंशुमान भट्टाचार्य – तानपुरा

ग्वालियर, जयपुर और आगरा घरानों के अद्भुत समन्वय के लिए पहचाने जाने वाले पंडित उल्हास कशालकर को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तानसेन पुरस्कार और पंडित ओंकारनाथ ठाकुर पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। आज भी वे ITC संगीत अनुसंधान अकादमी में गुरु के रूप में कार्यरत हैं और युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सिखा रहे हैं।


निष्कर्षतः, विरासत महोत्सव की यह शाम कला, संगीत और संस्कृति का ऐसा संगम रही, जिसने देहरादून के सांस्कृतिक परिदृश्य को एक नई ऊंचाई दी।

युवा वर्ग के दिलो में धामी ने बढ़ाया अपना कद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का युवाओं के नाम भावनात्मक संदेश

नेता वही जो सही समय पर नब्ज पकड़ ले फिर फैसला लेने का जूनून भी अगर युवा वर्ग के लिए जरुरी है तो कदम आगे बढ़ाये जाने में कोई हिचक नहीं होनी चहिये कुछ ऐसा ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलन कर रहे युवा छात्रों के बीच पहुंच कर एक सन्देश देने का काम किया जिससे धामी का कद युवा वर्ग के बीच एक नयी मिसाल बना है पहली बार राज्य का मुख्यमंत्री आंदोलन के बीच पंहुचा फिर वही किया जो युवा चाहते थे धामी के इस कदम ने सियासत कर रहे विपक्ष सहित उस राजनीति को भी खतम कर दिया जिसकी भूमिका बनायीं जा रही थी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का युवाओं के नाम भावनात्मक संदेश

“उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, हमारे शहीदों और आंदोलनकारियों का सपना है – एक ऐसा सपना, जो हर बेटे-बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए देखा गया था।”

आज जब प्रदेश के कुछ युवा सड़कों पर हैं, तो एक ‘मुख्य सेवक’ होने के नाते मेरा यह नैतिक दायित्व है कि हर आवाज़ को सुनूं, हर पीड़ा को समझूं और हर दिल तक पहुंचूं। आंदोलन कर रहे युवा भी हमारे अपने हैं, हमारे परिवार का हिस्सा हैं।

हमने उत्तराखंड को बेहतर बनाने का जो सपना देखा है, उसमें संवाद और विश्वास की सबसे बड़ी भूमिका है।
सरकार और युवा – हम सब एक ही परिवार हैं। और परिवार का मतलब होता है – हर सदस्य की भलाई।

नकल विरोधी कानून: युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए एक सख्त कदम

वर्ष 2023 में हमने पूरे देश में सबसे पहले और सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया।
यह कानून इस बात का प्रमाण है कि हम उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं।

लेकिन जैसा अक्सर होता है, कुछ लोग हर अच्छे प्रयास को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे लोग, जो कानून का उल्लंघन करते हैं या करवाते हैं – अब उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
ऐसे हाकिमों और उनके हाकमो को इस बार ऐसा सबक मिलेगा, जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे।

कोई भेदभाव नहीं, सिर्फ न्याय

मैं अपने सभी छात्रों को यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार की नीयत में कभी भी भेदभाव या मनभेद की भावना नहीं रही है।
हमारी नीतियां सबके लिए हैं – समान, निष्पक्ष और पारदर्शी।


चलें संवाद की राह पर, बढ़ें विश्वास के साथ

मैं सभी युवाओं से यही अपील करता हूं कि हम संवाद और विश्वास की राह पर आगे बढ़ें।
मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।
हमारा लक्ष्य एक है – उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना।

और यह सपना तभी पूरा होगा जब हम मिलकर चलेंगे, एक परिवार की तरह।

जय उत्तराखंड।
जय भारत।

परीक्षा विवाद में युवाओं के बीच पहुंचे सीएम धामी, सीबीआई जांच की संस्तुति

परीक्षा विवाद में युवाओं के बीच पहुंचे सीएम धामी, सीबीआई जांच की संस्तुति

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को परेड ग्राउंड में आंदोलनरत युवाओं के बीच पहुंचकर उनकी चिंताओं को सीधे सुना और आश्वस्त किया कि सरकार उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की हालिया परीक्षा में हुए विवाद की CBI जांच की संस्तुति करेगी

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार युवाओं के मन में किसी भी प्रकार का संदेह या अविश्वास नहीं रहने देना चाहती। यही कारण है कि उन्होंने न केवल सीबीआई जांच के लिए सहमति दी, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि किसी प्रकार की रुकावट जांच प्रक्रिया में नहीं आने दी जाएगी।


धरना स्थल पर पहुंचकर दिया भरोसा

परेड ग्राउंड में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बीच दोपहर बाद अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने कहा,

“यह बातचीत सचिवालय या कार्यालय में भी हो सकती थी, लेकिन मैंने स्वयं यहां आकर आपसे मिलने का निर्णय लिया, क्योंकि आपके संघर्ष और तकलीफ को महसूस करता हूं। मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं।”

उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने 25,000 से अधिक पारदर्शी भर्तियाँ की हैं, जिनमें कहीं से कोई शिकायत नहीं आई। सिर्फ एक मामले में शंका सामने आई है, और उसे भी गंभीरता से लिया जा रहा है।


एसआईटी जांच के साथ अब सीबीआई जांच भी

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल यह मामला हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी द्वारा जांचा जा रहा है और समिति ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। फिर भी, युवाओं की मांग को प्राथमिकता देते हुए अब सरकार CBI जांच की संस्तुति करने जा रही है।


युवाओं के सपनों का सम्मान

भावुक अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जानते हैं कि उत्तराखंड का युवा पढ़ाई पूरी कर सरकारी नौकरी का सपना देखता है।

“मैंने भी वही परिस्थितियां देखी हैं, उन्हीं गलियों से होकर आया हूं। मैं जानता हूं कि युवाओं के जीवन में सरकारी नौकरी का सपना कितना मायने रखता है।”


मुकदमे होंगे वापस, भरोसा बहाल होगा

आंदोलन के दौरान अगर किसी भी युवा पर मुकदमा दर्ज हुआ है, तो सरकार उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू करेगी।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा,

“हम सबका लक्ष्य है कि अमृतकाल के इस दौर में उत्तराखंड देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बने। इसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अहम है।”


निष्कर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम दर्शाता है कि उनकी सरकार युवा हितों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। सीबीआई जांच की संस्तुति, मुकदमों की वापसी और धरना स्थल पर स्वयं पहुंचकर संवाद स्थापित करना – यह सभी निर्णय युवाओं के प्रति एक उत्तरदायी और जवाबदेह नेतृत्व की तस्वीर पेश करते हैं।

युवाओं को भाया धामी का नेतृत्व, साजिशों की लंका जलाकर बना युवा ‘हनुमान’

युवाओं को भाया धामी का नेतृत्व, साजिशों की लंका जलाकर बना युवा ‘हनुमान’

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में हालिया घटनाक्रम यह स्पष्ट कर गया कि युवाओं का भरोसा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर कायम है। जहां एक ओर सरकार के खिलाफ साजिश रचने वालों ने युवाओं को भ्रमित कर आंदोलन की आग भड़काने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर युवा वर्ग ने धैर्य और समझदारी का परिचय देते हुए अपने ‘मत’ से इन साजिशों को नाकाम कर दिया।

UKSSSC भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मुद्दे को हवा देकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई। एक खास गुट ने युवाओं की भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया और सड़क पर उतरकर जनाक्रोश का माहौल तैयार करने की योजना बनाई। लेकिन युवा अब पहले जैसे नहीं हैं — वे समझदार भी हैं और सटीक समय पर निर्णय लेने में सक्षम भी।

जब छात्रसंघ चुनावों के नतीजे सामने आए, तो तस्वीर साफ हो गई — ABVP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीत सिर्फ एक संगठन की जीत नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो विकास, पारदर्शिता और स्थायित्व पर विश्वास रखती है।

राजनीति नहीं, कामकाज पर वोट
UKSSSC मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। लेकिन राज्य के 100 से ज्यादा कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों में ABVP की व्यापक जीत ने इन दावों की हवा निकाल दी। सबसे खास बात यह रही कि देहरादून का DAV PG कॉलेज, जो कथित साजिश के केंद्र से कुछ ही दूरी पर स्थित है, वहां भी छात्रों ने सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया।

यह दिखाता है कि विपक्ष द्वारा फैलाया गया भ्रम ज्यादा दूर तक असर नहीं कर सका। सोशल मीडिया पर भी यही देखा जा सकता है कि युवाओं ने सरकार के साथ खड़े होकर नकारात्मक राजनीति को खारिज कर दिया।

धामी सरकार की पारदर्शिता बनी युवाओं की पसंद
पुष्कर सिंह धामी सरकार ने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए नकल विरोधी कानून लागू किया, तकनीकी निगरानी बढ़ाई और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए। इन प्रयासों ने यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर संवेदनशील और प्रतिबद्ध है।

ABVP की जीत क्या दर्शाती है?
ABVP की यह जीत सिर्फ संगठन की ताकत नहीं, बल्कि उस भरोसे की अभिव्यक्ति है जो आज का युवा भाजपा और धामी सरकार की नीतियों पर कर रहा है। छात्र राजनीति में मिली यह सफलता बताती है कि युवाओं ने विपक्ष के आरोपों के बजाय सरकार की नीयत और नीति पर विश्वास जताया है।

निष्कर्ष
उत्तराखंड के युवाओं ने यह दिखा दिया कि वे भावनाओं के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। सरकार विरोधी साजिशों को खारिज कर उन्होंने जिस प्रकार ‘हनुमान’ बनकर साजिश की लंका जलाई, वह इस बात का प्रमाण है कि आज का युवा जागरूक है, जिम्मेदार है और विकास की राजनीति में विश्वास करता है।

GST बचत उत्सव पटेलनगर में चला सीएम धामी का अभियान

0

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून के पटेलनगर में ‘जीएसटी बचत उत्सव‘ के उपलक्ष्य में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान व्यापारियों एवं आम लोगों से भेंट कर जी.एस.टी. की घटी दरों के लाभ के बारे में फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में आर्थिक सुधारों का नया दौर शुरू हुआ है और जीएसटी की दरों में कमी से समाज में सभी वर्गों के जीवन को खुशहाल बनाने की ऐतिहासिक पहल हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी की नई दरों से उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती होने से आम लोगों को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने व्यापारियों से जीएसटी की घटी दरों के बारे में ग्राहकों को पूरी जानकारी देने का आग्रह भी किया। इस दौरान स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर प्रदेश एवं देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी आह्वान किया।

इस दौरान व्यापारियों और आम लोगों ने जीएसटी दरों को घटाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नवरात्रि पर्व पर की गई इस नई शुरूआत से बाजार और खरीददारों में काफी उत्साह है। जीएसटी का यह उत्सव आगामी दीपावली के पर्व के दौरान आम लोगों के जीवन और कारोबार में उल्लास भरेगा।

इस दौरान विधायक विनोद चमोली, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

भूकम्प को लेकर सचिवालय में हुई खास बैठक

0

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड भूकम्प जोखिम मूल्यांकन एवं शमन (UERAM) के सम्बन्ध में बैठक ली। बैठक में आईआईटी रूड़की और वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ने कहा कि भूकम्प के प्रति संवेदनशीलता की दृष्टि से प्रदेश का एक बड़ा भू-भाग के जोन 5 में है, जिसके कारण यूईआरएएम के उद्देश्य, एक औपचारिक सुरक्षा-संचालित वातावरण तैयार करते हुए भूकंप से होने वाले मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करना, पर विशेष फोकस किया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के लोगों को भूकम्प जैसी परिस्थितियों के लिए जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को भूकम्प के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए भूकम्प की मॉक ड्रिल के लिए एक दिन निर्धारित करते हुए नियमित रूप से भूकम्प जागरूकता दिवस मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे भूकम्प जैसी परिस्थिति में न्यूनतम मानवीय और आर्थिक नुकसान होगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि यूएसडीएमए द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के साथ एक विस्तृत एमओयू किया जाए जिसमें विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के लिए संस्थानों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि वाडिया संस्थान ग्लेशियर लेक पर काम कर रहा है तो आईआईटी रूड़की भूकम्प जोखिम मूल्यांकन और शमन पर कार्य कर सकता है। मुख्य सचिव ने कहा कि भूकम्प के प्रति संवेदनशीलता की दृष्टि से भवन निर्माण के लिए कुछ मापदंड भी निर्धारित किए जाने चाहिए। उन्होंने भूकम्परोधी भवनों के सम्बन्ध सीबीआरआई के साथ एमओयू किए जाने की आववश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर सचिव विनोद कुमार सुमन एवं अपर सचिव आनन्द स्वरूप सहित आईआईटी रुड़की, वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान और सीबीआरआई के वैज्ञानिक उपस्थित थे।

राज्य दिव्यांग बोर्ड मीटिंग में सीएम धामी ने दिए निर्देश

0

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड की बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनोें के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों के कल्याण के चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों का पूरा लाभ उन्हें सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ मिले। समाज के इस वर्ग की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिए कि समय-समय पर प्रदेशभर में दिव्यांगजनों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाए। इन शिविरों में दिव्यागजनों को उन्हें उपचार एवं चिकित्सा सुविधाओं के साथ ही प्रमाण-पत्र, कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण भी मौके पर ही उपलब्ध कराए जाएं।

मुख्यमंत्री ने सचिव समाज कल्याण को निर्देश दिए कि बैठक में प्राप्त सुझावों पर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न शासकीय सेवाओं में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान आरक्षण के प्रावधानों के अनुसार दिव्यांगजनों को पूरा लाभ दिया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि समाज कल्याण विभाग पेंशन योजनाओं में विशेष रूप से यह सुनिश्चित करे कि जो भी पात्र व्यक्ति दिव्यांग पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आते हों, उन्हें योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिले।

उन्होंने सभी सचिवगणों से अपेक्षा की कि दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों पर विभागीय स्तर पर सतत गंभीरता से कार्यों का अनुश्रवण कर उनके हितों से सीधे जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन समाज का एक अभिन्न अंग हैं और उन्हें सक्षम बनाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है।

बैठक में उपस्थित विधायकगणों एवं बोर्ड सदस्यों ने भी कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने उन सभी सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की समस्याएँ किसी भी सरकार के लिए केवल प्रशासनिक विषय न रहकर मानवीय सरोकार से जुड़ी जिम्मेदारी भी हैं, और इसी भाव से राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

बैठक में विधायक भरत चौधरी, सविता कपूर के साथ ही सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, रंजीत सिन्हा, चन्द्रेश कुमार, वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, निदेशक समाज कल्याण प्रकाश चन्द्र एवं राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्यगण उपस्थित रहे।