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नैनीताल पुलिस ने किया ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड गिरोह भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार

नैनीताल पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग एप से फ्रॉड करने वाले चार आरोपी अरेस्ट किए हैं.

नैनीताल: पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग एप से फ्रॉड करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने अलग-अलग शहरों के रहने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ज्योलीकोट चौकी इंचार्ज की तहरीर पर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड व खातों में मोटी रकम के हस्तांतरण का डाटा मिला है. आरोपित क्षेत्र में रहकर बीते एक सप्ताह से ऑनलाइन गेमिंग में पैसा लगाने व बैंक खाता उपलब्ध कराने के लिए लोगों को प्रलोभन दे रहे थे.

ज्योलीकोट पुलिस को सूचना मिली कि कुछ बाहरी व्यक्ति लोगों को गेमिंग एप की जानकारी देने के साथ ही उनके बैंक खाते व सिम कार्ड मांग रहे है. लोगों द्वारा बैंक खाता देने के एवज में खाते में आने वाली रकम का तीन प्रतिशत कमिशन के तौर पर देने का लालच दिया जा रहा है. सूचना के बाद ज्योलीकोट पुलिस चेकिंग अभियान में जुट गई. इसी बीच वाहन भुजियाघाट से ज्योलीकोट की ओर आता हुआ मिला.

वाहन रोक पुलिस ने पूछताछ की तो वाहन चालक व सवार तीनों लोगों की भूमिका संदिग्ध नजर आई. वाहन की तलाशी लेने पर भीतर बैग में मोबाइल, सिम व डेबिट कार्ड बरामद हुए. जिसके बाद पुलिस चारों को हिरासत में लेकर चौकी ले आई. जहां सख्ती से पूछताछ में चारों ने सच उगल दिया. एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि चारों ने पूछताछ में पता चला कि वह ऑनलाइन गेमिंग में प्रयोग करने के लिए लोगों के बैंक खाते लेते है.

बीते एक सप्ताह से वह क्षेत्र में रुके थे. मगर क्षेत्र के लोगों द्वारा बहुत पूछताछ करने के कारण उन्हें कोई खाता देने वाला व्यक्ति नहीं मिल सका. इसके अलावा वह इंटरनेट मीडिया में फेक अकाउंट बनाकर लोगों को ठगते थे. पुलिस ने आरोपियों के पास से मिले खातों और अन्य दस्तावेजों की जानकारी निकलवाने को साइबर सेल कर्मियों को बुलाकर जांच करवाई. जिसमें से एक के ई-मेल में मिले खाते से लाखों का लेनदेन होने की पुष्टि हुई.

एसएसपी ने बताया कि मामले में लालकुआं हाउसिंग अलवर राजस्थान निवासी शुभम गुप्ता, पुख्ता बाजार जहांगिराबाद बुलंदशहर निवासी पियूष गोयल, मोदीनगर गाजियाबाद निवासी ऋषभ कुमार, महावीरापुर सेक्टर पांच गुरुग्राम निवासी मोहित राठी को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध बीएनएस की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

उत्तराखंड पंचायत उपचुनाव: 321 पदों पर 2266 उम्मीदवार, 27,221 निर्विरोध

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उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव की चुनावी तस्वीर साफ। 321 पदों के लिए 2266 प्रत्याशी लड़ेंगे चुनाव, जबकि 27,221 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। 20 नवंबर को मतदान और 22 नवंबर को मतगणना होगी। जिलावार उम्मीदवारों की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव की चुनावी तस्वीर अब साफ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, अब कुल 321 पदों के लिए 2266 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। यह आंकड़ा नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद सामने आया है, जिससे साफ है कि अधिकांश रिक्त पदों पर चुनाव नहीं होगा।

बड़ी संख्या में निर्विरोध जीत
दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने 32,985 रिक्त पदों के लिए उपचुनाव की अधिसूचना जारी की थी। कुल 30,800 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। राज्यभर में 27,221 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। केवल 321 पदों पर ही अब मतदान होगा, जिससे चुनाव आयोग और प्रशासन का काम काफी आसान हो गया है। नामांकन निरस्त होने और वापस लेने वाले प्रत्याशियों की संख्या भी काफी कम रही है।

321 पदों पर किस वर्ग के कितने उम्मीदवार?
जिन 321 पदों पर चुनाव होने हैं, उनमें सदस्य ग्राम पंचायत के 316 पदों के लिए 2255 उम्मीदवार, प्रधान के चार पदों के लिए नौ उम्मीदवार, और सदस्य जिला पंचायत के एक पद के लिए दो उम्मीदवार शामिल हैं। सबसे ज्यादा मुकाबला अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर और पौड़ी जैसे जिलों में देखने को मिलेगा। उदाहरण के लिए, ऊधमसिंह नगर में 109 पदों के लिए 226 उम्मीदवार, जबकि पौड़ी में 60 पदों के लिए 123 उम्मीदवार मैदान में हैं। बागेश्वर में 1611 पदों के लिए 1555 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जो एक बड़ा आंकड़ा है। अधिक जिलावार जानकारी के लिए आप राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना (External Link Suggestion) देख सकते हैं।

मतदान और मतगणना की तारीख
नामांकन प्रक्रिया 13 और 14 नवंबर को संपन्न हुई थी। नाम वापसी के बाद अब आयोग ने सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। अब 20 नवंबर को कुल 235 मतदान स्थलों पर वोट डाले जाएंगे। इसके बाद, 22 नवंबर को मतगणना की जाएगी और चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इस उपचुनाव के बाद राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के रिक्त पद भर जाएंगे, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिलेगी।

उत्तराखंड: सार्वजनिक जगह पर शराब पीते पकड़े गए 42 लोग

सार्वजनिक स्थानों में बैठकर जाम छलकाना युवकों को पड़ा भारी, कुल 42 व्यक्ति दबोचे

छुट्टी के समय महिलाओं पर फब्तियाँ कसने वाले शराबियों पर सिडकुल पुलिस की बड़ी कार्रवाई

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद हरिद्वार द्वारा सार्वजनिक स्थानों, होटलढाबों एवं सड़क किनारे शराब पीकर हुड़दंग मचाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है।

इसी क्रम में सिडकुल क्षेत्र में फैक्ट्रियों से छुट्टी के समय राह चलने वाली महिलाओं पर शराब के नशे में फब्तियाँ कसने की मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आज दिनांक 17/11/2025 को थाना सिडकुल पुलिस द्वारा विभिन्न टीमें गठित की गईं।

पुलिस टीमों ने अभियान चलाकर सार्वजनिक स्थानों, शराब की दुकानों व सड़क किनारे शराब पीकर हुड़दंग मचाने वाले कुल 42 व्यक्तियों को विभिन्न स्थानों से पकड़ा।

इन सभी के विरुद्ध धारा 81 पुलिस एक्ट के अंतर्गत चालानी कार्रवाई करते हुए कुल 10,500/- संयोजन शुल्क वसूल किया गया। साथ ही सभी को भविष्य में ऐसी हरकत न करने की सख्त चेतावनी दी गई।

MDDA Action: शिमला बाईपास पर अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त

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देहरादून में अवैध विकास पर जीरो टॉलरेंस, शिमला बाईपास क्षेत्रों में एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त और अवैध व्यावसायिक निर्माण सील

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर तेज की गई प्रवर्तन कार्यवाही, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आगे भी जारी रहेगी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा अवैध प्लॉटिंग और निर्माणों पर निरंतर सख्त कार्रवाई की जा रही है। प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत आने वाले सभी सेक्टरों में ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्यवाही नियमित रूप से संचालित हो रही है। इसी क्रम में आज शिमला बाईपास क्षेत्र में व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें कई अवैध निर्माणों पर निर्णायक कार्रवाई की गई। प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत शिमला बाईपास रोड, देहरादून के विविध क्षेत्रों में किए गए अवैध आवासीय निर्माणों एवं प्लॉटिंग पर संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशानुसार ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई संपन्न हुई। कमल राठौड़ एवं अन्य द्वारा श्रीराम इंक्लेव, मेहुवाला माफी (निकट ईंट भट्टा) में लगभग 10 बिघा क्षेत्र में की गई अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। इस कार्यवाही में सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता जितेन्द्र कुमार एवं सुपरवाइजर मौजूद रहे। इसी प्रकार, सर्वेश्वर दत्त द्वारा रावत मोहल्ला, बालावाला (निकट इंटर कॉलेज, बालावाला) में किए गए अवैध व्यावसायिक भवन पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। इस कार्यवाही में सहायक अभियंता प्रमोद मेहरा, अवर अभियंता मनीष मेहरा एवं सुपरवाइजर उपस्थित रहे।

 

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशन में प्रवर्तन टीम सक्रिय

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि एमडीडीए का स्पष्ट और दृढ़ संकल्प है कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण, अवैध प्लॉटिंग या अनियमित विकास को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण को जो भी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं उन सभी पर नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। एमडीडीए द्वारा नियमित निरीक्षण, फील्ड विज़िट और सख्त प्रवर्तन कार्यवाही को तेज किया गया है। आज शिमला बाईपास क्षेत्र में की गई कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देहरादून का विकास नियोजित, सुरक्षित और कानून के अनुरूप हो। किसी भी व्यक्ति को नियमों के विरुद्ध जाकर विकास कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और भविष्य में ऐसी सभी गतिविधियों पर और अधिक कठोरता से कार्रवाई की जाएगी।

 

अवैध निर्माण-प्लॉटिंग पर कार्यवाही हमारे निरंतर अभियान का हिस्सा

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा एमडीडीए लगातार फील्ड निरीक्षण कर रहा है और जहां भी अवैध निर्माण या अवैध प्लॉटिंग पाई जाती है, वहां तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। शिमला बाईपास क्षेत्र में आज की गई ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्यवाही हमारे निरंतर अभियान का हिस्सा है। सभी से अपील है कि किसी भी निर्माण कार्य से पूर्व एमडीडीए से विधिवत स्वीकृति लेना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर इसी प्रकार कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। हमारा प्रयास है कि देहरादून का विकास सुव्यवस्थित और नियमानुसार बने।

उत्तराखंड में पिछले तीन सालों के भीतर बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की होगी जांच, सीएम ने दिए निर्देश

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उत्तराखंड: हाल ही में कुछ जगहों पर कूटरचित यानी फर्जी दस्तावेजों के जरिए बाहरी लोगों को बसाने के मामले सामने आए हैं. जिस पर सीएम धामी ने सख्ती दिखाई है. जिसके तहत सीएम धामी सभी जिलाधिकारियों को पिछले तीन साल में बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं. साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है.

बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं. दिल्ली दौरे के दौरान बीते दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर तमाम विषयों पर चर्चा किया था तो वहीं आज सीएम धामी ने दिल्ली से ही प्रदेश के सभी जिलाधिकारी के साथ वर्चुअल बैठक की. जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही प्रशासनिक कामों में पारदर्शिता लाने की बात कही.

 

करीब चार घंटे चले इस वर्चुअल बैठक में सीएम ने अधिकारियों को शीतकालीन यात्रा की तैयारियों को तेज करते हुए सभी पर्यटक स्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए. बैठक के दौरान सीएम धामी ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित रजत जयंती उत्सव कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमाम विषयों को साझा किया था.

पीएम की ओर से साझा किए गए विजन के अनुसार भी सभी जिलों में काम किए जाए. क्योंकि, रजत जयंती उत्सव में राज्य के 25 सालों की यात्रा के साथ ही अगले 25 सालों में किए जाने वाले विजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया था. लिहाजा, जिला अधिकारी प्रशासनिक कामों को बेहतर बनाने के साथ ही इस विजन पर भी काम करें.

उत्तराखंड में समय-समय पर डेमोग्राफिक चेंज का मामला उठता रहा है. कई बार ऐसे मामले के सामने आए कि गलत तरीके से दस्तावेज तैयार कर लोगों को बसाया जा रहा है. जिस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम धामी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वो पिछले तीन साल में बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच करें और इसमें जो भी दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है. जहां एक ओर मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए लगातार खाली पदों पर भर्ती की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में दवाइयां और उपकरणों की कमी को भी दूर करने पर जोर दिया जा रहा है.

बैठक के दौरान सीएम धामी ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में दवाइयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हो, इस बाबत अहम दिशा निर्देश दिए. साथ ही अस्पतालों में महिला और बाल रोग चिकित्सकों की तैनाती की मौजूदा स्थिति की सूची भी शासन को उपलब्ध कराने को कहा.

 

दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट के बाद उत्तराखंड सरकार भी पूरी तरह से अलर्ट है. ऐसे में सीएम ने दिल्ली में हुई घटना को ध्यान में रखते हुए बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की सघन चेकिंग के निर्देश दिए. इसके अलावा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कामों में तेजी लाने के साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि वो खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करें.

इसके अलावा सीएम धामी ने प्रभावित क्षेत्रों में ठंड से बचने के व्यापक इंतजाम पर ध्यान देने को कहा है. इतना ही नहीं अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में वेरिफिकेशन ड्राइव में तेजी लाया जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए. ताकि, संदिग्ध और अपराध में लिप्त लोगों को पकड़ा जा सके. साथ ही आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके.

सऊदी हादसा: उमरा पर गए 45 भारतीयों की मौत, पीएम मोदी ने जताया दुख

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सऊदी अरब में उमरे पर गए भारतीय तीर्थ यात्रियों का जत्था एक बड़े हादसे का शिकार हो गया है। इस भीषण बस हादसे में 45 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार भारत से उमरा करने गए इन लोगों की बस एक डीजल टैंकर से टकरा गई. जिससे बस में आग लग गई. हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कुल 54 लोग 9 नवंबर को यहां से जेद्दा गए थे।

वे 23 नवंबर को लौटने वाले थे. इन 54 लोगों में से चार लोग रविवार को अलग-अलग कार से मदीना गए, जबकि चार अन्य मक्का में ही रुक गए. इस दुर्घटना में कम से कम 45 लोग मारे गए. अधिकारी के अनुसार, इस हादसे के समय बस में 46 लोग सवार थे, जो मदीना से लगभग 25 किलोमीटर दूर एक तेल टैंकर से टकरा गई।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जाहिर किया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मदीना में भारतीय नागरिकों से जुड़ी दुर्घटना से मुझे गहरा दुख हुआ है. मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है”.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ये हादसा सऊदी समयानुसार रात 11 बजे के आसपास हुआ है. कथित तौर पर बस में ज्यादातर यात्री तेलंगाना राज्य से थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस हादसे में केवल एक ही व्यक्ति जीवित बचा है.. बताया जा रहा है कि यह लोग मक्का
से लौटे रहे थे और मदीना जा रहा था।

सऊदी अरब में हुए इस दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में भारत के एक ही परिवार के 18 सदस्यों की मौत हो गई. इस हादसे के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. मृतकों में 9 बच्चे और 9 बड़े शामिल हैं।

रात डेढ़ बजे दुर्घटना की जानकारी मिली. मदीना से 30 किलोमीटर दूर ये एक्सिडेंट हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सऊदी समयानुसार रात 11 बजे के आसपास (भारतीय समयानुसार लगभग 1:30 बजे) यह एक्सीडेंट हुआ. शुरुआती जानकारी के मुताबिक बस में सवार ज्यादातर यात्री तेलंगाना राज्य से थे।

स्थिति पर नजर रखने के लिए तेलंगाना सचिवालय में एक नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) बनाया गया है. इसके नंबर हैं- +91 7997959754, +91 9912919545. वहीं जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया है- 8002440003 (टॉल फ्री)

शेख हसीना को फांसी की सजा, अलर्ट पर है सरकार

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नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध का दोषी करार दिया है. तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने इस मामले में शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई है. जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अगुवाई वाली तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला छह पार्ट में सुनाया, जो 400 पेज में है.

जस्टिस मुर्तजा की अगुवाई वाली ट्रिब्यूनल में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है. हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है. शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए.

ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने के आदेश दिए थे. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि ज्यादातर मौतें बांग्लादेशी सुरक्षाबलों की ओर से आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले घातक धातु के छर्रों से भरी सेना की बंदूकों से चली गोलियों के कारण हुईं. शेख हसीना की सरकार में सेना, पुलिस और आरएबी ने न्याय प्रक्रिया से हटकर हत्याएं कीं. शेख हसीना और अन्य आरोपियों ने संयुक्त रूप से आपराधिक साजिश रची थी.

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि शेख हसीना के साथ ही इस मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून भी आरोपी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों ने मिलकर मानवता के खिलाफ अपराध किए. राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ.

मुख्यमंत्री धामी ने जिलाधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जिलाधिकारियों के साथ चार घंटे की बैठक की। इस बैठक में अधिकारियों को शीतकालीन यात्रा की तैयारियों को तेज करने और सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में यह भी कहा गया कि रजत जयंती उत्सव कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किए गए विजन के अनुरूप सभी जनपदों में कार्यों का समयबद्ध संपादन सुनिश्चित किया जाए।

हाल ही में कुछ स्थानों पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बाहरी लोगों को बसाने के मामले सामने आए हैं। इसके मद्देनजर जिलाधिकारियों को पिछले तीन साल में जारी स्थाई निवासी प्रमाण पत्रों की जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

सभी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और महिला व बाल रोग चिकित्सकों की तैनाती के लिए सूची शासन को उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया।

दिल्ली में हाल ही में हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की सघन चेकिंग करने, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित क्षेत्रों में ठंड से बचने के व्यापक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा अधिकारियों को वैरिफिकेशन ड्राइव में तेजी लाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखने हेतु भी निर्देशित किया गया।

देहरादून में सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी, कैसे मिलेगा मरीजों को बेहतर इलाज?

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राजधानी देहरादून के कई सरकारी हॉस्पिटलों में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है.

देहरादून: देहरादून जिले के सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी बनी हुई है. राजधानी के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बीते लंबे समय से चली आ रही है, हालांकि इस कमी को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से कदम भी उठाई जा रहे हैं. लेकिन स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.

विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव के कारण जिले के स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बन रहे हैं, जिस कारण मरीजों को दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोरोनेशन अस्पताल या फिर प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है. वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो देहरादून जनपद मे सामान्य और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को मिलाकर 331 पद स्वीकृत हैं, इनमें से संविदा, “यू कोट, वी पे” (You Quote, We Pay) व नियमित नियुक्ति के तहत डॉक्टर्स जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन इन पदों के सापेक्ष सिर्फ 45% विशेषज्ञ चिकित्सक ही विभिन्न अस्पतालों में नियुक्त है.

देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज शर्मा ने बताया कि इसकी मुख्य वजह यह है कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स अपेक्षाकृत कम ज्वाइन कर रहे हैं और यह समस्या अभी भी बनी हुई है. हालांकि सरकार की तरफ से डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं और उन्हें सेवायें देने के लिए प्रोत्साहित किए जा रहे हैं. कुछ माह पूर्व सरकार ने नए डॉक्टरों की भर्ती की थी. एक बार फिर से 285 चिकित्सकों का अधियाचन निकलने वाला है. उन्होंने कहा कि यह एक समस्या है कि “यू कोट, वी पे” के माध्यम से भी डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है.

इसके माध्यम से भी सरकार निरंतर यह प्रयास कर रही है कि किस तरह से विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को भरा जाए, ताकि ग्रामीण और दूर दराज के शेत्रों में इन्हें तैनात किया जा सके. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो जनपद देहरादून की चिकित्सा इकाइयों में चिकित्सा अधिकारी के कुल 311 पद स्वीकृत हैं, इनमें से 284 कार्यरत हैं, रिक्त पद 27 चल रहे हैं. जबकि 253 नियमित चिकित्सा अधिकारी के पद हैं. देहरादून के विभिन्न अस्पतालों में संविदा के तहत 23 डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. बांडेड डॉक्टरों की संख्या 7 है. 23 सामान्य चिकित्सक स्नातकोत्तर प्रशिक्षण ले रहे हैं. जबकि जनपद में 10 डॉक्टर्स अनुपस्थित चल रहे हैं. वर्तमान में जिले के भीतर 248 डॉक्टर कार्यरत हैं. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अभी कुछ नए डॉक्टरों ने भी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जॉइनिंग की है.

गौर हो कि सरकारें डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए “यू कोट, वी पे” (You Quote, We Pay) योजना का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसमें डॉक्टर अपनी सैलरी (वेतन) की दर खुद कोट करते हैं और सरकार भुगतान करती है. यह योजना खास तौर पर उत्तराखंड जैसे राज्यों में दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई है, ताकि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके.

अल्मोड़ा लमगड़ा में लूटपाट के बाद बुजुर्ग महिला की हत्या, दहशत में ग्रामीण

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अल्मोड़ा लमगड़ा ब्लॉक में बुजुर्ग महिला की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है.

अल्मोड़ा: लमगड़ा ब्लॉक के सांगण साहु गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई. गांव के बीचों-बीच स्थित घर में 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला गंगा देवी पत्नी मोहन सिंह का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला. गले का गलोबंद गायब होने और शरीर पर चोट के निशान मिलने से लूटपाट के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है. शांत पहाड़ी क्षेत्र में हुई इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और वे जल्द से जल्द हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं.

पुलिस ने बताया कि गंगा देवी अकेले घर में रहती थी. महिला का पति मोहन सिंह, लमगड़ा बाजार में रेस्टोरेंट चलाता है और अधिकांश समय वहीं रहता है. प्रतिदिन की तरह सुबह जब गंगा देवी बाहर नहीं दिखाई दी, तो दोपहर तक चिंता बढ़ने पर पड़ोसी उनके घर पहुंचे. दरवाजा खुला हुआ था, अंदर टीवी चालू थी और गंगा देवी बिस्तर पर मृत अवस्था में पड़ी मिली. घटना को देखकर ग्रामीणों ने तुरंत उसके पति और दूर चंडीगढ़ में नौकरी कर रहे बेटे रविंद्र को सूचना दी. दोनों सूचना मिलते ही गांव पहुंचे और मामले की जानकारी लमगड़ा पुलिस थाने में दी गई.

थानाध्यक्ष प्रमोद पाठक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की. पुलिस के अनुसार मृतका के कान से खून बह रहा था, गले पर निशान थे और गलोबंद भी गायब था, जबकि अन्य आभूषण घर में सुरक्षित मिले. इससे साफ संकेत मिलता है कि वारदात को अंजाम देने वालों का मकसद लूटपाट हो सकता है. लेकिन घर गांव के बीच में स्थित होने और आसपास लोगों की आवाजाही होने के कारण मामले ने और भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि प्राथमिक जांच में हत्या की आशंका जताई जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी. उन्होंने कहा कि पुलिस टीम हर संभव एंगल से मामले की जांच कर रही है. संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है और गांव में सुराग जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद भी ली जाएगी.

इधर, घटना के बाद गांव में भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठाई है. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया. घटना शुक्रवार की है और पुलिस को सूचना बीते दिन दी गई, जिसके बाद महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.