कांग्रेस में “फेस की लड़ाई” तेज! 2027 से पहले बढ़ी गुटबाजी, क्या कमजोर हो रहा जनाधार?
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर Indian National Congress के भीतर नेतृत्व की जंग खुलकर सामने आ गई है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में “कौन बनेगा चेहरा?” को लेकर दिग्गज नेताओं के बीच संघर्ष तेज हो गया है।
हर नेता बनना चाहता है पार्टी का चेहरा
राज्य में कांग्रेस के कई बड़े नेता:
- Ganesh Godiyal
- Yashpal Arya
- Pritam Singh
- Harak Singh Rawat
- Karan Mahara
सभी को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं, लेकिन अंदरखाने नेतृत्व की दौड़ जारी है।
गुटबाजी और बयानबाजी से बढ़ी चिंता
- नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी
- एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक घेराबंदी
- संगठन में अनुशासनहीनता के संकेत
इससे 2027 में सत्ता वापसी का दावा कमजोर पड़ सकता है।
लगातार हार से कमजोर हुआ आधार
- 2017 विधानसभा चुनाव में हार
- लोकसभा चुनावों में भी झटका
- संगठन का जमीनी स्तर पर कमजोर होना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का “बेस धीरे-धीरे खिसक रहा है”।
क्या कह रहे हैं राजनीतिक जानकार?
विश्लेषक Jai Singh Rawat के अनुसार:
- कांग्रेस कैडर आधारित पार्टी नहीं रही
- यही कारण है कि अनुशासन की कमी दिखती है
- पार्टी को अंदरूनी लड़ाई छोड़कर जमीनी काम पर ध्यान देना होगा
हरीश रावत का संकेत
वरिष्ठ नेता Harish Rawat पहले ही:
- “पंचमुखी नेतृत्व” की बात कर चुके हैं
- खुद को नेतृत्व की दौड़ से दूर बताने की कोशिश की
फिर भी, पार्टी में “फेस की लड़ाई” खत्म होती नहीं दिख रही।
सबसे बड़ा सवाल
2027 का चुनाव किस चेहरे पर लड़ा जाएगा?
क्या हाईकमान समय रहते फैसला ले पाएगा?
या गुटबाजी ही कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनेगी?
- कांग्रेस में CM फेस की जंग! 2027 से पहले बढ़ी गुटबाजी
- अंदरूनी लड़ाई से कमजोर हो रही कांग्रेस? बड़ा सवाल
- दिग्गज नेताओं में टकराव, किसे मिलेगा हाईकमान का भरोसा?
- लगातार हार के बाद भी नहीं थमी खींचतान
- 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी


