Sunday, January 25, 2026
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हरिद्वार में एक और भीषण हादसा, पिकअप ने कार को मारी टक्कर, व्यापारी की मौत, तीन लोग घायल

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हरिद्वार में एक ही दिन में दो सड़क हादसों में 3 लोगों की मौत हो गई है

हरिद्वार: लक्सर हरिद्वार मार्ग पर एक और सड़क हादसा हो गया है. यहां एक अनियंत्रित पिक अप वाहन ने कार सवार को टक्कर मार दी. इस हादसे में ज्वालापुर के व्यापारी की मौत हो गई. गुरुवार देर शाम को मिस्सरपुर स्थित मैंगो फॉर्म हाउस के पास ये हादसा हुआ. हादसे में व्यापारी बिजेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हादसे में उनकी पत्नी समेत चार लोगों को भी चोटें आई हैं. गुरुवार सुबह भी लक्सर हरिद्वार मार्ग पर जियापोता गांव के पास सड़क हादसे में दो सगे भाइयों की मौत हो गई थी.

जानकारी के मुताबित ज्वालापुर के चौहानान मोहल्ला निवासी टेंट हाउस कारोबारी कार से घर लौट रहे थे. कनखल थाना क्षेत्र में मिस्सरपुर स्थित मैंगो फॉर्म हाउस के पास एक अनियंत्रित पिक अप वाहन ने उनकी कार में टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. कार सवार बिजेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए.

शादियों में पनीर खाने वाले सावधान! यूपी बॉर्डर से पुलिस ने पकड़ा 700 किलो ‘जहरीला’ पनीर

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हरिद्वार पुलिस ने शादी समारोह में खपाने के लिए ले जा रहे 700 किलो पनीर को पकड़ा. पुलिस ‘हानिकारक’ बताकर दफनाया.

हरिद्वार: इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है. शादी समारोह में अमूमन लोगों की पसंद पनीर की सब्जी होती है, लेकिन यह पनीर सही है या नहीं इसका हमें अंदाजा नहीं होता. रोजाना सैकड़ों की संख्या में हो रही शादियों को लेकर खाद्य आपूर्ति विभाग के साथ पुलिस विभाग भी अलर्ट मोड पर है. जिसके तहत मिलावटी और नकली पनीर से लेकर अन्य खाद्य उत्पाद को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है. इसी कड़ी में पुलिस ने उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड आ रही पनीर की एक बड़ी खेप को बॉर्डर पर ही पकड़ लिया. जिसका सैंपल लेकर पनीर को गड्ढे में दबा दिया गया.

700 किलो पनीर बरामद: बता दें कि नवंबर महीने में रोजाना सैकड़ों शादियां एक शहर में हो रही हैं. खाद्य सामग्रियों की पूर्ति के लिए न केवल उत्तराखंड बल्कि, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी पनीर मावा और अन्य खाद्य पदार्थ मंगवाए जा रहे हैं. जिसे पहाड़ों में भेजा जा रहा है. लिहाजा, इन खाद्य पदार्थों को लेकर खाद्य आपूर्ति विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों ही अलर्ट मोड पर है. गुरुवार को भी करीब 700 किलो पनीर उत्तर प्रदेश से देहरादून भेजा जा रहा था. जिसे पुलिस ने पकड़ लिया.

हिरासत में गाड़ी का ड्राइवर: पुलिस के मुताबिक, बिना नंबर प्लेट की गाड़ी में बिना बिल और बिना फूड सेफ्टी सर्टिफिकेट के पनीर को देहरादून में भेजा जा रहा था, लेकिन तभी पुलिस कर्मियों को गाड़ी पर शक हुआ. जब गाड़ी की चेकिंग की गई तो उसमें कई ड्रम मिले. जिसमें काफी मात्रा में पनीर भरा हुआ था. ऐसे में पुलिस ने तत्काल खाद्य आपूर्ति की टीम को बुलाकर सभी खाद्य पदार्थों को मौके पर ही नष्ट कर दिया. साथ ही ड्राइवर को हिरासत में ले लिया.

 हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि दीपावली से लगातार मिलावटी खाने पीने की सामान को लेकर उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड की सीमा पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में इस वाहन को पकड़ा गया है. फिलहाल, यह तस्दीक की जा रही है कि यह सामान कहां से लाया गया था और किसे सप्लाई होनी थी? इसका असल मालिक कौन है? फिलहाल, सैंपल के तौर पर भी पनीर को रखकर जांच के लिए भेजा गया है.

14 दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस की ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली, PCC ने बनाई संचालन समिति

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समिति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी बड़े नेताओं को शामिल किया, जिला और महानगर के नेताओं व विधायकों को पर्यवेक्षक बनाया गया है

देहरादून: अगले माह 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एआईसीसी बिहार चुनाव अभियान की तरह ही ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली करने जा रही है. रैली को सफल बनाने के लिए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने गुरुवार को एक प्रदेश स्तरीय संचालन समिति गठित कर दी है. इस समिति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी बड़े नेताओं को शामिल किया है. प्रदेश स्तर पर व्यापक रूप से जिला और महानगर के नेताओं व विधायकों को पर्यवेक्षक बनाया गया है.

कांग्रेस की दिल्ली रैली की तैयारी: पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अध्यक्षता में गठित की गई समिति में नेता प्रतिपक्षत यशपाल आर्या सहित पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन को शामिल किया गया है.

कांग्रेस नेता बनाए गए पर्यवेक्षक: दिल्ली में होने जा रही रैली को सफल बनाने के लिए प्रदेश स्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां देने के साथ ही जिला व महानगर स्तर के नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है. उत्तरकाशी के पुरोला से बिहारी लाल, उत्तरकाशी से दिनेश गौड़, रुद्रप्रयाग जिले से प्रदीप थपलियाल, कोटद्वार से रघुवीर सिंह बिष्ट, महानगर कोटद्वार से पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, पौड़ी से कविंद्र, टिहरी से विधायक विक्रम सिंह नेगी, चमोली से मुकेश नेगी जो पूर्व जिला अध्यक्ष भी रहे हैं को जिम्मेदारी सौंपी गई है.

इनको मिली जिम्मेदारी: इसके अलावा देवप्रयाग से पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, हरिद्वार महानगर से विधायक रवि बहादुर जबकि हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. इसी तरह रुड़की महानगर से सचिन गुप्ता, रुड़की ग्रामीण से विधायक फुरकान अहमद, रुद्रपुर से विधायक तिलक राज बेहड़, हल्द्वानी से विधायक सुमित हृदयेश, अल्मोड़ा से विधायक मनोज तिवारी, पिथौरागढ़ से विधायक हरीश धामी विधायक समेत कई और नेताओं को भी कांग्रेस पार्टी ने पर्यवेक्षक नियुक्त किया है.

पर्यवेक्षक करेंगे ये व्यवस्था: गणेश गोदियाल ने बताया कि पर्यवेक्षकों को समुचित व्यवस्थाएं करने, कार्यकर्ताओं से समन्वय स्थापित करने, परिवहन व्यवस्था करने के साथ-साथ रैली में अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है. समग्र मार्गदर्शन के लिए यह सभी पर्यवेक्षक अपने प्रभार वाले निर्धारित क्षेत्र में रैली से संबंधित सभी व्यवस्थाओं के संचालन से लेकर निगरानी और रिपोर्टिंग का दायित्व संभालेंगे.

उपलब्धता के अनुपात में उत्तराखंड को आवंटित हो यमुना जल: महाराज

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ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक में सिंचाई मंत्री ने रखा उत्तराखंड का पक्ष

देहरादून/नोएडा। ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य में सिंचाई की कमी से पर्वतीय इलाकों में उगने वाली नकदी फसल फल, सब्जी आदि की उत्पादकता में कमी से पलायन का जिक्र करते हुए उत्तराखंड राज्य को उसकी मांग के अनुसार यमुना जल आवंटित किए जाने का अनुरोध किया।

नोएडा, गौतम बुद्ध नगर स्थित ऊपरी यमुना नदी बोर्ड भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में भारत सरकार, जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन गंगा संरक्षण विभाग, ऊपरी यमुना नदी बोर्ड द्वारा आयोजित रिव्यू कमेटी की नवीं बैठक में गुरुवार को यमुना नदी से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जलस्तर, प्रदूषण और जल-बंटवारे के मुद्दे शामिल रहे। बैठक में प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के सिंचाई, पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, पंचायतीराज, लोक निर्माण, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इन पांचों राज्यों के मध्य जल बंटवारे को लेकर 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ और यमुना बेसिन राज्यों के बीच यमुना जल प्रवाह में से उत्तर प्रदेश को कुल 4.032 बी.सी. एम. जल आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद ऊपरी यमुना नदी बोर्ड समिति का छठ सदस्य बना। लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर समझौता न हो पाने की स्थिति में केंद्र के हस्तक्षेप के बाद उत्तराखंड राज्य को उसकी मांग से लगभग 32% कम यमुना जल आवंटित किया गया।

श्री महाराज ने बैठक के दौरान राज्य का पक्ष रखते हुए कहा कि ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 8वीं रिव्यू कमेटी की 21 फरवरी 2024 की बैठक में उत्तराखंड राज्य को तत्कालीन उत्तर प्रदेश के 4.032 बी.सी.एम. यमुना जल के हिस्से में से 0.311बी.सी.एम.यमुना जल आवंटित हुआ था जो कि मांग से 32 प्रतिशत कम था। यमुना जल आवंटन को लेकर सहमति इस शर्त के साथ दी गई थी कि 2025 के बाद समझौता ज्ञापन 12 मई 1994 की समीक्षा की जाएगी।

श्री महाराज ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को लखवाड़ एवं किशाऊ बहुउद्देश्य परियोजनाओं से निर्मित होने वाले जलाशयों के दुष्परिणाम का भी सामना करना पड़ेगा राज्य में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसलिए समझौता ज्ञापन 12 मई 1994 की समीक्षा करते हुए उत्तराखंड राज्य को यमुना जल की उपलब्धता के अनुपात में जल आवंटित किया जाये।

श्री महाराज ने दिल्ली में यमुना जल को दूषित होने से बचाने के लिए हरियाणा से यमुना नदी में अमोनिया और अन्य प्रदूषकों के निर्वहन को रोकने के लिए फैक्ट्रियों के पानी का पहले ट्रीटमेंट किया जाने का सुझाव देते हुए कहा कि इसके लिए, फैक्ट्रियों को अमोनिया-विशिष्ट उपचार प्रौद्योगिकियों में निवेश करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अपशिष्ट का यमुना में छोड़े जाने से पहले ठीक से उपचार किया जाए।

ऊपरी यमुना नदी बोर्ड, रिव्यू कमेटी की नवीं बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, दिल्ली के सिंचाई मंत्री प्रवेश वर्मा, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रीमति श्रुति चौधरी और राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत मौजूद रहे।

क्या आपको भी बार-बार होता है माइग्रेन के चलते सिरदर्द? जरूर अपनाएं ये उपाय

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बहुत से लोग माइग्रेन का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं. कुछ लोगों को बार-बार माइग्रेन का दर्द होता है, इसलिए यह उपाय आजमाएं

माइग्रेन एक आम लेकिन गंभीर सिरदर्द है जिसमें सिर के एक तरफ बहुत तेज दर्द होता है. ज्यादातर मरीजों को ऐसा महसूस होता है जैसे कोई उनके सिर में ड्रम बजा रहा हो. इस दौरान, मरीजों को न सिर्फ तेज रोशनी बल्कि आस-पास की आवाजें भी महसूस होती हैं, कभी-कभी जी मिचलाने और उल्टी के साथ. एक आम गलतफहमी यह है कि सिर्फ दवा से ही इस बीमारी से आराम मिल सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि दवा के साथ-साथ लाइफस्टाइल में बदलाव और रेगुलर एक्सरसाइज, खासकर योग, माइग्रेन से आराम दिलाने में बहुत फायदेमंद हो सकते हैं.

माइग्रेन एक ऐसी समस्या है जिससे आजकल हर कोई परेशान है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा. इससे आराम पाने के लिए इन टिप्स को जरूर फॉलो करें.

आइस पैक: जब आपको माइग्रेन का दर्द हो, तो अपने माथे, कनपटी या गर्दन पर आइस पैक लगाना एक अच्छा उपाय है. इससे प्रभावित जगह पर ब्लड फ्लो कम होगा और दर्द से राहत मिलेगी. एक तौलिया ठंडे पानी में भिगोकर प्रभावित जगह पर रखना भी फायदेमंद हो सकता है.

थोड़ी कॉफी: इसमें मौजूद कैफीन माइग्रेन के दर्द को कम करने में मदद कर सकता है. यह शरीर को पीठ दर्द की दवाओं को तेजी से एब्जॉर्ब करने में भी मदद करता है. हालांकि, कॉफी कम मात्रा में पीनी चाहिए.

शांत घर: तेज रोशनी और तेज आवाज से सिरदर्द और बढ़ सकता है. इसलिए, अपने घर को शांत और कम रोशनी वाला रखना सबसे अच्छा उपाय है. इससे सिरदर्द और मतली से जल्दी राहत मिल सकती है.

एक्सरसाइज: माइग्रेन होने पर एक्सरसाइज करना अच्छा आइडिया नहीं है. इससे दर्द और बढ़ सकता है. लेकिन, जब आपको माइग्रेन नहीं हो रहा हो तो रेगुलर एक्सरसाइज करने से सिरदर्द को रोकने में मदद मिल सकती है. एक्सरसाइज से एंडोर्फिन और दूसरे केमिकल निकलते हैं जो दर्द कम करने में मदद करते हैं. यह स्ट्रेस भी कम करता है और आपको बेहतर नींद लेने में मदद करता है.

मैग्नीशियम: मैग्नीशियम माइग्रेन के दर्द को रोकने में बहुत मददगार होता है. इसलिए, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और बादाम और काजू जैसे नट्स ज्यादा खाना अच्छा है, क्योंकि इनमें मैग्नीशियम भरपूर होता है. इसके अलावा, दूध, मछली और चिकन में मौजूद राइबोफ्लेविन भी माइग्रेन के दर्द को रोकने में मदद करता है.

नींद: बहुत ज्यादा या बहुत कम सोने से माइग्रेन का दर्द और बढ़ सकता है. इसलिए, आपको रात में 7-8 घंटे सोना चाहिए. साथ ही, हर सुबह एक ही समय पर उठना पक्का करें.

योग: एक्सरसाइज के उलट, योग में शरीर की धीमी हरकतें होती हैं. यह मन को शांत करने में भी मदद करता है. स्टडीज से पता चलता है कि योग माइग्रेन के दर्द की फ्रीक्वेंसी को कम करता है, और अगर यह होता भी है, तो दर्द कम गंभीर होता है.

ट्रिगर से बचें: कभी-कभी आप जो खाना खाते हैं, माहौल, तेज रोशनी और तेज गंध माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकते हैं. ऐसे कारणों को पहचानना और उनसे बचना सबसे अच्छा है.

मेडलाइनप्लस के एक स्टडी में कहा गया है कि हेल्दी डाइट, पूरी नींद, हर दिन एक ही समय पर सोना और वजन कंट्रोल में रखने से माइग्रेन के कारण होने वाले सिरदर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा, एक्सपर्ट रोजाना के स्ट्रेस और एंग्जायटी से निपटने के लिए योग, मेडिटेशन और प्राणायाम करने की सलाह देते हैं. वे स्मोकिंग और शराब पीने जैसी आदतों से बचने की भी सलाह देते हैं.

भीषण दुर्घटना में दो सगे भाइयों की जान गई, सड़क पर बिखरे मिले शव

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हरिद्धार: जनपद हरिद्धार में कनखल थाना क्षेत्र के ग्राम जियापोता में गुरुवार को एक सड़क हादसे में बाइक सवार दो भाईयों की मौत हो गई। जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को उपचार चल रहा है। जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

जानकारी के मुताबिक कनखल थाना क्षेत्र के ग्राम कटारपुर निवासी दो भाई साकिब और वासिक पासपोर्ट बनवाने के लिए घर से बाईक पर सवार होकर आज सुबह निकले थे। बताते हैं कि ग्राम जियापोता में सामने से आ रही दूसरी बाईक से उनकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार दोनों युवकों में एक पीछे से आ रही बस के नीचे और दूसरा ट्रक के नीचे जा गिरे। जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दूसरी बाईक पर सवार दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

आनन-फानन में दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बताई गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। हादसे के बाद ट्रक और बस चालक मौके से फरार हो गए। पुलिस दोनों की तलाश में जुटी है।

देहरादून में 28–30 नवम्बर को होगा WSDM 2025 व USSTC 2025, वैश्विक विशेषज्ञों संग आपदा प्रबंधन पर मंथन

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आज देहरादून मे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस मे यूकाॅस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) तथा 20वाँ उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC 2025) का आयोजन, 28 से 30 नवम्बर 2025 तक ग्राफिक एरा (डीम्ड-टू-बी) विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित किए जाएंगे। ये आयोजन हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिक संस्थानों, नवोन्मेषकों, युवा नेतृत्व, आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों और समुदाय प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर भारत की वैज्ञानिक प्रणाली और आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण प्रयास करेंगे। रहेंगे।

विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) के उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष होंगे माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, श्री पुष्कर सिंह धामी, जिनके नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारी, जलवायु परिवर्तन और समुदाय आधारित वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा दिया गया है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे डॉ. जितेन्द्र सिंह, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। उनके मार्गदर्शन और भागीदारी से भारत की विज्ञान-आधारित आपदा प्रबंधन और स्पेस-आधारित प्रौद्योगिकी की प्रतिबद्धता उजागर होती है।

दिनांक 30 नवंबर 2015 को होने वाले समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह जी, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति समापन समारोह को अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायी बनाएगी।

प्रो. दुर्गेश पंत ने बताया कि विज्ञान प्रौद्योगिकी सम्मलेन में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों की शुरुआत की जाएगी, जिनमें उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा प्रसार सम्मान, भागीरथ पुरस्कार और उत्तराखण्ड युवा महिला वैज्ञानिक पुरस्कार शामिल हैं। ये पुरस्कार विज्ञान संचार, आपदा प्रबंधन, जलवायु , सामुदायिक सहभागिता और महिला वैज्ञानिक नवाचारों में उत्कृष्ट योगदान और यूकॉस्ट की वैज्ञानिक प्रतिभा संवर्धन एवं जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक सहभागिता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उत्तराखण्ड का प्रथम राज्य-स्तरीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग 2025 भी इसी अवसर पर आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य विज्ञान जागरूकता, जलवायु साक्षरता, नवाचार और आपदा तैयारी को राज्य के प्रत्येक गाँव तक पहुँचाना है। इसमें राज्य के सभी 13 जिलों से टीमें वैज्ञानिक क्विज़, नवाचार प्रदर्शनी, आपदा प्रतिक्रिया चुनौतियों और जलवायु समस्या समाधान प्रतियोगिताओं में भाग लेंगी। यह पहल राज्य में बाल वैज्ञानिक और जलवायु प्रहरी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मलेन का मुख्य विषय है, “समुदायों के निर्माण हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना”, और यह 5E Framework (Engage, Educate, Enable, Empower, Excel) पर आधारित है। सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों जैसे बाढ़, भूस्खलन, वनाग्नि, हीटवेव, बादल फटना और हिमनद झील जोखिम का समाधान करना और भारत तथा हिमालयी क्षेत्र में वैश्विक सहयोग एवं ज्ञान साझा करने का मंच स्थापित करना है। सम्मेलन में छह प्रमुख प्लेनरी/ विचार विमर्श सत्र आयोजित होंगे, जिनमें आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं ग्लेशियर खतरे, मानवता की सुरक्षा, हिमालय के संरक्षक, बहु-आपदा जोखिम, तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से जागरूकता शामिल हैं। इसके अलावा बारह विशेष प्रौद्योगिकी सत्र (STS) आयोजित किए जाएंगे, जिनमें नीति, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, तकनीकी नवाचार, वित्तीय समाधान और हिमालयन कॉरिडोर लचीलापन से जुड़ी पहलें शामिल हैं।

सम्मेलन में 20 से अधिक कार्यशालाएँ, इंटरैक्टिव मंच और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जैसे शी फॉर स्टेम (SHE for STEM ) ,जैव विविधता और जैव प्रौद्योगिकी, जल गुणवत्ता निगरानी, वरिष्ठ नागरिकों के लिए नवाचार, भीड़ प्रबंधन प्रशिक्षण, युथ लीडरशिप और समुदायों की आवाज़ आदि। साथ ही एक इनोवेशन और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन भी होगा, जिसमें राज्य एवं केंद्रीय सरकार, स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थान और नवोन्मेषक भाग लेंगे, जो पूर्व चेतावनी प्रणालियों, स्पेस-आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जलवायु विश्लेषण और सामुदायिक स्तर की आपदा प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करेंगे। NDRF, SDRF, ITBP, BRO, NIM, NCC, NSS और SSB द्वारा व्यावहारिक प्रदर्शन और बचाव प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएंगे।

यह दोनों सम्मलेन उत्तराखण्ड की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और जलवायु लचीलापन की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। ये आयोजन राज्य को एक सशक्त, जागरूक और भविष्य के लिए तैयार उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में योगदान देंगे, जिसमें मजबूत वैज्ञानिक आधार, सशक्त समुदाय, सशक्त युवा और वैश्विक स्तर पर सहभागिता, आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियाँ सुनिश्चित होंगी।
वहीं उल्लेखनीय है कि दिनांक 28 नवंबर 2025 प्रातः 10 बजे 20 वें उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2025 के प्रारंभिक सत्र के मुख्य अतिथि रहेंगे डा. रमेश पोखरियाल “निशंक” पूर्व शिक्षा मंत्री, भारत सरकार व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड व डा. डीके असवाल, सदस्य, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी, भारत सरकार मुख्य वक्ता के रूप मे रहेंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूकाॅस्ट के प्रबंधक जनसम्पर्क अमित पोखरियाल, संयुक्त निदेशक व आयोजन सचिव डा. डीपी उनियाल, आयोजन सचिव, विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन 2025 प्रहलाद अधिकारी व पुनीत सिंह प्रमुख रुप से उपस्थित रहे

हरिद्वार में बनेगी राज्य की पहली हेलीपैड वाली बिल्डिंग, छत से उड़ान भर सकेंगे हेली

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बिल्डिंग निर्माण को लेकर यूकाडा की टीम ने टेक्निकल जानकारी जुटाई है. हवाई मार्गों से भी सर्वे किया गया है.

हरिद्वार: 2027 अर्द्धकुंभ मेले से पहले हरिद्वार सीसीआर टॉवर का विस्तार किया जाएगा. पुराने टावर के बराबर में ही रोड़ीबेलवाला मैदान में नई बिल्डिंग बनाई जाएगी. इस बिल्डिंग की छत पर आधुनिक हेलीपैड बनाया जाएगा. यह उत्तराखंड की पहली ऐसी सरकारी बिल्डिंग होगी, जिसकी छत पर हेलीकॉप्टर न सिर्फ लैंड करेंगे बल्कि उड़ान भी भर सकेंगे. 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना को हाई पावर कमेटी से अनुमति मिल गई है. बुधवार को यूकाडा की टीम ने हेलीकॉप्टर से सर्वे कर संभावनाओं का अध्ययन किया.

मेला प्रशासन के अनुसार सीसीआर के ठीक पास सीसीआर की नई बिल्डिंग भी प्रस्तावित है. जिसमें चार मंजिलों का निर्माण होना है. नई बिल्डिंग अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी. इसमें मेला प्रबंधन की सभी तकनीकी, सुरक्षा और कम्युनिकेशन यूनिटों को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है. इस बिल्डिंग की छत पर जो हेलीपैड बनाया जाएगा, उसमें हेलीकॉप्टर सीधे सीसीआर टावर की छत पर लैंड कर सकेगा. इससे शहर के व्यस्त मार्गों और मेलाक्षेत्र के भीतर लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी.

इसके साथ ही यह हेलीपैड मेडिकल एम्बुलेंस और आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा. बताया जा रहा है कि किसी भी बड़े हादसे, आपदा या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को तुरंत एयरलिफ्ट कर देहरादून या अन्य बड़े मेडिकल केंद्रों में भेजा जा सकेगा.

अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने बताया नई इमारत के डिज़ाइन, सुरक्षा प्रबंधन और हेलीपैड तक पहुंचने वाले मार्गों का जायजा लिया गया है. यूकाडा की टीम ने टेक्निकल जानकारी जुटाई है. आसामान में हवाई मार्गों को भी परखा गया है. भवन का ढांचा हेलीकॉप्टर संचालन के अनुसार तैयार किया जाएगा. जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए.

गौरतलब है कि हरिद्वार में भी तक कोई भी सरकारी हेलीपैड नहीं है. यहां गुरुकुल, भेल हेलीपैड पर ही वीआईपी हेलीकॉप्टर उतरते हैं. भल्ला कॉलेज के हेलीपैड पर क्रिकेट स्टेडियम बन गया है. इसलिए बड़े नेताओं के हेलीकॉप्टर या फिर इमरजेंसी के लिए ही नया हेलीपैड बनाने की कवायद शुरू हो गई है. बुधवार को दिन भर आसमान में हेलीकॉप्टर गरजते रहे.

उत्तराखंड एआई मिशन 2025 का आयोजन, राज्यपाल ने लॉन्च किया एआई पॉलिसी सॉफ्टवेयर

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उत्तराखंड के राजभवन में बीते दिन उद्भव 2025 कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान दिवस के अवसर पर संविधान शपथ और दीप प्रज्वलन से हुई।

इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई पॉलिसी सॉफ्टवेयर का भी लॉन्च किया। राज्यपाल ने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का युग है और आने वाले समय में एआई का पूर्ण रूप से विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से हर प्रकार की समस्या का समाधान किया जा सकता है और तकनीकी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें ड्रोन तकनीक का प्रयोग हुआ, जो नई तकनीकी का उदाहरण है। उत्तराखंड एआई मिशन 2025 में राज्य की 25 संस्थाओं ने भाग लिया।

राज्यपाल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न देशों की यात्राओं में एआई पर जोर दिया गया और अगले साल दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई अन्य देश भी भाग लेंगे।

उत्तराखंड में 99 क्विंटल अनाज सड़ा, हाईकोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड:DM के वसूली आदेश को माफ करने पर सवाल, कोर्ट ने लगाई फटकार

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उत्तराखंड हाईकोर्ट में 2021 की आपदा राहत सामग्री घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। यह मामला उधम सिंह नगर में सस्ता गल्ला योजना के तहत वितरित किए जाने वाले 99 क्विंटल से अधिक अनाज के खराब होने और डीएम के आदेश के बावजूद दोषियों से वसूली माफ किए जाने से जुड़ा है।

रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने पर कोर्ट सख्त

मुख्य न्यायाधीश नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने संबंधित विभाग की ओर से मूल रिकॉर्ड पेश न किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरा मूल रिकॉर्ड हर हाल में गुरुवार तक प्रस्तुत किया जाए, अन्यथा कोर्ट आगे की सुनवाई नहीं बढ़ाएगा। मामले की सुनवाई आज होनी है।

याचिकाकर्ता का आरोप- राहत सामग्री न बांटी गई, न सुरक्षित रखी

हरिद्वार निवासी याचिकाकर्ता अभिजीत ने अपनी जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि 2021 की आपदा के दौरान सस्ता गल्ला योजना के तहत आपदा पीड़ितों के लिए 99 क्विंटल से अधिक अनाज आया था।लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में यह अनाज सड़ गया। न इसे वितरण के लिए भेजा गया और न ही इसे सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था की गई।

वसूली के आदेश के बाद भी ‘माफी’ पर सवाल

जांच के बाद उस समय के जिलाधिकारी उधम सिंह नगर ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली के आदेश दिए थे।लेकिन बाद में जिलापूर्ति कमिश्नर ने इस वसूली को माफ कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने गंभीर लापरवाही और घोटाला करार दिया है।

कड़े एक्शन और जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि—

  • नुकसान की पूरी वसूली की जाए,
  • दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो,
  • और मामले से जुड़े अन्य संभावित धन के दुरुपयोग की जांच कराई जाए।

कल रिकॉर्ड आने के बाद जारी होंगे आगे के आदेश

कोर्ट मूल रिकॉर्ड के प्रस्तुत होने के बाद मामले में आगे के आदेश जारी कर सकता है।