देहरादून। एशिया की सबसे कठिन और पवित्र धार्मिक यात्राओं में शामिल नंदा राजजात को लेकर चल रहा विवाद और संशय अब समाप्त हो गया है। यात्रा को एक साल के लिए स्थगित करने की घोषणा के बाद पैदा हुई असमंजस की स्थिति पर सोमवार को 484 गांवों की महापंचायत ने बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया कि नंदा राजजात यात्रा इसी साल पूर्व निर्धारित समय के अनुसार ही निकाली जाएगी।
हिमालय का महाकुंभ कही जाने वाली नंदा राजजात यात्रा मां नंदा देवी के सम्मान में हर 12 वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। करीब 280 किलोमीटर लंबी इस दुरूह यात्रा में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह यात्रा अपने अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ कठिन मार्ग और परंपराओं के लिए भी जानी जाती है। इस यात्रा का नेतृत्व चार सींग वाली भेड़, जिसे चौसिंघिया खाडू कहा जाता है, करती है। मान्यता है कि यह खाडू 12 वर्षों में केवल एक बार ही जन्म लेती है।
स्थगन की घोषणा से मचा था हड़कंप
नंदा देवी राजजात समिति ने हाल ही में यह कहते हुए यात्रा को सितंबर 2026 तक टालने की बात कही थी कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संभावित बर्फबारी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय जरूरी है। इस ऐलान के बाद क्षेत्र के गांवों और धार्मिक संगठनों में असंतोष फैल गया, जिसके चलते आज 484 गांवों की महापंचायत बुलाई गई।
महापंचायत में यात्रा को एक साल के लिए स्थगित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया गया और सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राजजात इसी वर्ष निकाली जाएगी। बैठक के दौरान मां नंदा देवी सिद्धपीठ मंदिर कुरुड़ आयोजन समिति का भी गठन किया गया। इसमें कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत को अध्यक्ष चुना गया।
वसंत पंचमी पर निकलेगा बड़ा मुहूर्त
महापंचायत में यह भी तय हुआ कि आगामी 23 जनवरी को वसंत पंचमी के अवसर पर बड़ी जात का मुहूर्त निकाला जाएगा और यात्रा को भव्य रूप से संचालित किया जाएगा। आयोजन समिति ने कहा कि परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप सभी तैयारियां की जाएंगी।
कुरुड़ और नौटी से शुभारंभ को लेकर मतभेद
बताया गया कि यात्रा के स्थगन की एक वजह कुरुड़ और नौटी से नंदा राजजात और नंदा जात के शुभारंभ को लेकर उत्पन्न हुए मतभेद भी थे। हालांकि समिति पदाधिकारियों का कहना है कि उनका फैसला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था। दूसरी ओर, महापंचायत ने स्पष्ट किया कि परंपरा के अनुसार यात्रा इसी साल निकाली जाएगी।
होमकुंड पर होता है यात्रा का समापन
चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होने वाली यह यात्रा 19 से 22 दिनों तक चलती है और हिमालय के होमकुंड (रूपकुंड के पास) पर समाप्त होती है। यही वह स्थान है, जहां चौसिंघिया खाडू को पूजा सामग्री के साथ कैलाश पर्वत की दिशा में विदा किया जाता है। मान्यता है कि इसके बाद खाडू मां नंदा देवी के संदेशवाहक के रूप में रहस्यमय तरीके से अदृश्य हो जाता है।
महापंचायत के इस फैसले के बाद अब नंदा राजजात यात्रा को लेकर फैली अनिश्चितता दूर हो गई है और श्रद्धालु एक बार फिर इस पवित्र और ऐतिहासिक यात्रा के लिए तैयारियों में जुट गए हैं।


