नौले-धारों और नदियों के पुनर्जीवन पर डीएम आशीष चौहान सख्त

0
2

नौले-धारों और नदियों के पुनर्जीवन पर डीएम का फोकस, बांदल नदी के लिए बनेगी विस्तृत डीपीआर

देहरादून। प्राकृतिक जल स्रोतों, नौले-धारों और नदियों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा) की जिला स्तरीय बैठक में अधिकारियों को प्रभावी और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों का लाभ धरातल पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए और स्थानीय लोगों तक उसका सीधा फायदा पहुंचना चाहिए।

वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य आधारित कार्य करने और स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मसूरी वन प्रभाग की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी

बैठक के दौरान वन प्रभाग मसूरी की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पूर्ण हो चुके कार्यों का तत्काल सत्यापन कराने और लंबित भुगतानों की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए।

51 रिचार्ज शाफ्ट के कार्य पूरे

लघु सिंचाई विभाग ने बैठक में जानकारी दी कि जिले में 51 रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने इन कार्यों से भूजल स्तर और जल संरक्षण पर पड़े प्रभाव का आकलन करने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के साथ संयुक्त रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।

गडूल नदी में शुरू होंगे संरक्षण कार्य

‘एक जनपद-एक नदी’ योजना के तहत सोग नदी कैचमेंट की सहायक गडूल नदी में जल संरक्षण और पुनर्जीवन कार्य शुरू किए जाएंगे। इसके लिए बजट भी जारी किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ जल्द कार्य प्रारंभ करने को कहा।

ऐतिहासिक नौले और धारों की तैयार होगी डीपीआर

जिले के ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व वाले पांच चयनित नौले एवं धारों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इसके लिए आर्किटेक्ट को स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र डिजाइन और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

बांदल नदी के समग्र विकास की बनेगी योजना

जिलाधिकारी ने बांदल नदी के संरक्षण, संवर्धन और समग्र विकास के लिए विस्तृत डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। लघु सिंचाई, सिंचाई, वन, जल संस्थान और ग्राम्य विकास विभाग को संयुक्त रूप से प्रस्ताव तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने को कहा गया।

वर्षा जल संरक्षण के लिए चेकडैम श्रृंखला विकसित करने पर जोर

जल संरक्षण संरचनाओं की समीक्षा करते हुए डीएम ने सघन वृक्षारोपण, चाल-खाल, खंती और चेकडैम निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए सीरीज ऑफ चेकडैम विकसित किए जाएं, जिससे भूजल स्तर में सुधार हो और स्थानीय लोगों को स्थायी लाभ मिल सके।

बैठक में बाण गंगा, खट्टा पानी, नौका धारा, पानी वाला बैण्ड, मालदेवता, विवेकानंद बावड़ी, नाला पानी, केशरवाला, सौडा सरोली, आम खाला, तुरानी खाला, पंछी खाला और कैरवान सहित विभिन्न जल स्रोतों में चल रहे संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि सारा योजना के अंतर्गत जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कुल 2105.09 लाख रुपये का बजट स्वीकृत है। इसमें से 374.79 लाख रुपये विभिन्न विभागों को जारी किए जा चुके हैं, जबकि अब तक 344.98 लाख रुपये की धनराशि व्यय की जा चुकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here