मानसून को लेकर गढ़वाल मंडल हाई अलर्ट पर, चारधाम यात्रा की सुरक्षा के लिए 2 जुलाई को होगी मॉक ड्रिल

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मानसून को लेकर गढ़वाल मंडल हाई अलर्ट पर, चारधाम यात्रा की सुरक्षा के लिए 2 जुलाई को होगी मॉक ड्रिल

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले गढ़वाल मंडल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप के निर्देशन में सभी जिलाधिकारियों को संभावित आपदा स्थितियों से निपटने के लिए एक्शन मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार चारधाम यात्रा मार्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों और अन्य संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले 2 जुलाई को सभी जनपदों में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों का परीक्षण करना है।

उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन किया जाएगा। इससे वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

प्रशासन ने पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, पेयजल विभाग समेत सभी संबंधित एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है। सभी विभागों को पर्याप्त संसाधन, उपकरण और मानव बल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी मौसम विभाग के पूर्वानुमानों और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखने के लिए सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

गढ़वाल मंडल में इस बार मानसून को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है, ताकि चारधाम यात्रा सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित हो सके तथा किसी भी प्राकृतिक आपदा का प्रभाव न्यूनतम रहे।

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