देहरादून पुलिस ने यह ट्रैफिक प्लान क्यों लागू हुआ?
गर्मी से छुटकारा पाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के साथ पड़ोसी इलाकों से ढेरों पर्यटक उत्तराखंड की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में देहरादून पुलिस ने तय किया कि अप्रत्याशित ट्रैफिक का सामना करने के लिए एक योजना लागू करनी होगी। मसूरी की ओर जाने वाले मार्ग पर भीड़ तेजी से बढ़ सकती है, ठीक वैसे ही चकराता और ऋषिकेश के रास्ते भी गाड़ियों से भर सकते हैं। इसके बाद न तो शहर के अंदर आवाजाही आसान रहेगी, न ही बाहरी मार्गों पर।
- गर्मियों की लपटों से बचने, पहाड़ों की तरफ अब ज्यादा मेहमान आ रहे हैं।
- गर्मियों के महीनों में सड़कों पर बच्चों के साथ परिवार का आना-जाना बढ़ गया।
- गाड़ियों की तादाद में इजाफे की संभावना है, जब मसूरी और चकराता की ओर रुख किया जाए।
किन रूटों पर सबसे ज्यादा असर रहेगा?
मसूरी, ऋषिकेश, चकराता के साथ देहरादून में पर्यटकों के प्रवेश वाले मार्गों पर इस ट्रैफिक योजना का सबसे ज्यादा प्रभाव दिखेगा। दिल्ली से आने वाले वाहनों के लिए एक मार्ग है, जबकि हरियाणा की ओर से आने वालों के लिए दूसरा तय किया गया है। गाजियाबाद से आने वाले ट्रैफिक को अलग डायवर्जन दिया गया है, मेरठ के लिए भी कुछ ऐसा ही व्यवस्थित किया गया है। मुजफ्फरनगर से आने वाले वाहनों के लिए निर्धारित रास्ता अलग है, सहारनपुर की तरफ से आने वालों के लिए भी कुछ नया तय किया गया है। रुड़की की ओर से आने वाले यातायात के लिए भी विशेष मार्ग बनाए गए हैं।
- उस रास्ते से गुजरने वाली गाड़ियों पर नजर रखी जाएगी, जहाँ दिल्ली से देहरादून का हाईवे बना है।
- थानो रोड से मसूरी की ओर जाने वाले यात्रियों को ऋषिकेश या हरिद्वार से मोड़ा जा सकता है।
- वापसी में साईं मंदिर डायवर्जन का रास्ता अपनाया जाएगा, ओल्ड राजपुर रोड भी शामिल है।
पुलिस ने क्या खास इंतजाम किए हैं?
गाड़ियों की रफ्तार को संभालने के लिए देहरादून पुलिस ने शहर के रास्तों को चार सुपर जोन में बाँटा है। इसके अलावा, दस छोटे जोन भी बनाए गए हैं। उन्नीस सेक्टर ऐसे हैं जहाँ खास ध्यान दिया जा रहा है। बड़े चौराहों पर अब पुलिसकर्मी खड़े रहेंगे। बाजार के ठीक बीच में भी फोर्स तैनात है। जहाँ रूट झटके भरे होते हैं, वहाँ नजर रखी जा रही है। डायवर्जन के स्थानों पर भी अधिकारी तैनात हैं। इससे जाम नहीं बढ़ेगा। अगर कुछ अचानक होता है तो तुरंत फैसला हो सकेगा।
- प्रमुख जगहों पर अब 130 पुलिसवाले ड्यूटी पर हैं।
- कुछ मार्गों पर पुलिस की संख्या बढ़ेगी, खासतौर पर जहाँ नज़र रखना ज़रूरी है।
- कभी-कभी गलत जगह खड़ी गाड़ियों को क्रेन की मदद से हटा दिया जाता है।
- हादसे की स्थिति में चलने वाले वाहन डायवर्जन के नियमों से अलग रखे जाएंगे।
मसूरी जाने वालों को क्या जानना चाहिए?
पुलिस ने मसूरी में पार्किंग की भीड़ को देखते हुए एक तरह का कदम उठाया है। जब स्थानीय पार्किंग 90% भर चुकी होगी, तब पर्यटकों के वाहनों को किंग क्रेग जैसी जगहों पर लाकर रोका जा सकता है। उधर से फिर यात्री स्थानीय टैक्सी में बैठकर आगे बढ़ जाएंगे।
- सुबह-सवेरे मसूरी घूमने का प्लान हो, तो रवानगी ढलते समय से पहले ही हो जाए।
- पार्किंग का इंतज़ाम होटल में पहले से होना चाहिए।
- शायद किंग क्रेग में पार्किंग के नए नियम चलने लगें।
- जहाँ मना हो, वहीं गाड़ी न छोड़ें।
- शायद आपको वहाँ की टैक्सियों पर भरोसा करना पड़े।
पर्यटकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
यात्रा से पहले रूट की जानकारी, मौसम और पुलिस के निर्देश जरूर चेक कर लेना। जल्दबाजी में गाड़ी चलाना, पार्किंग गलत जगह करना या उल्टी दिशा में जाना भीड़ बढ़ा सकता है। अपने साथ पानी, दवाइयां और आवश्यक कागजात रखना घरवालों के साथ यात्रा करने वालों के लिए फायदेमंद होता है।
- अब गूगल मैप पर पुलिस के सच्चाई वाले अपडेट भी आने लगे हैं।
- हल्की धूप में चलते समय पानी की बोतल अपने पास होना चाहिए।
- रुकना है तो सोच लें – पार्किंग की इजाजत वहाँ नहीं है।
- हर समय बच्चों की दवा साथ होनी चाहिए।
- जब ट्रैफिक पुलिस हाथ हिलाए, तभी गाड़ी आगे बढ़े।
स्थानीय लोगों को कैसे राहत मिलेगी?
गाड़ियों का दबाव शहर में कम करने के लिए नई सड़कों पर भेजा जाएगा। आवाजाही सुचारू रखना उतना ही जरूरी है स्थानीय लोगों के लिए, जितना बाहर से आने वालों के लिए। भीड़ कम करना योजना का मकसद है, खासतौर पर जहाँ दुकानें, स्कूल, अस्पताल या बड़े चौराहे हैं। अब लोग ट्रैफिक में फंसे बिना आसानी से घूम पाएंगे, रोज की दिक्कत कम होगी।
- अब रास्तों पर भागती भीड़ के बीच थोड़ी सी छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
- मोड़ तब होंगे, जब स्थानीय मार्गों की जरूरत पड़ेगी।
- हॉस्पिटल पहुँचने के लिए सड़कें मुक्त रहनी चाहिए, नहीं तो दिक्कत होगी।
- गाड़ियाँ गलत जगह खड़ी करने वालों पर सख्ती से अमल होगा।
यात्रा से पहले क्या तैयारी करें?
थोड़ी देर शुरुआत से पहले देहरादून, मसूरी या फिर ऋषिकेश के सफर में आराम जोड़ देती है। वीकएंड में भीड़ अचानक उमड़ सकती है, इसलिए वक्त थोड़ा ज्यादा रखना समझदारी की निशानी है। बुकिंग से लेकर पार्किंग, मौसम का हाल और गुजरने के रास्ते – अगर ये सब पहले देख लिए जाएं, तो सफर में टालमटोल कम हो जाती है।
- शहर जाने का समय सुबह-शाम से अलग होना चाहिए।
- पता चलता है ट्रैफ़िक के बारे में सोशल मीडिया के आधिकारिक पेज से।
- लंबे समय तक भीड़ होने पर रास्ता अलग कर लेना सही रहता है।
शाम के उस वक्त, जब देहरादून में भीड़ घिरने लगती है, पुलिस की ट्रैफिक टीम धीमे दिमाग से चलने लगती है। पर्यटक और निवासी, एक साथ इस व्यवस्था को समझने लगते हैं। गर्मी छुड़ाने आए लोग घबराहट छोड़कर शांति में डूब जाते हैं। सही ओर मुड़ने पर गलती की जगह, वक्त खुद-ब-खुद बच जाता है। पुलिस के संकेत पर चलने से गाड़ियों का झुंझलाहट भरा बहाव कम हो जाता है। जहाँ ठहरने का निशान है, वहाँ खड़े होने के बजाय आगे बढ़ने पर रास्ते फिसलते नहीं। नियमों को चुनौती देने के बजाय उन्हें स्वीकार करने पर दिमाग हल्का पड़ जाता है।

