उत्तराखंड सरकार ने प्रदूषण कम करने और पेट्रोल डीजल बचाने के लिए एक अच्छी शुरुआत की है जिसका नाम है उत्तराखंड नो व्हीकल डे इस नियम के मुताबिक हर शनिवार को सरकारी दफ्तरों के बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से अपनी निजी या सरकारी गाड़ियां घर पर ही छोड़कर आने को कहा गया है वे इसकी जगह बस साइकिल या पैदल दफ्तर जा रहे हैं सूचना विभाग जैसे कई दफ्तरों में लोग इसका पालन भी कर रहे हैं लेकिन परेशानी तब खड़ी हो जाती है जब वीकेंड आते ही दिल्ली एनसीआर पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों से हजारों पर्यटक अपनी गाड़ियां लेकर देहरादून और मसूरी पहुंच जाते हैं इस वजह से सरकार की इस कोशिश का जमीन पर उतना असर नहीं दिख पा रहा है जितना होना चाहिए
उत्तराखंड का नो व्हीकल डे क्या है?
अगर बिल्कुल सीधे और सरल शब्दों में समझें तो नो व्हीकल डे उत्तराखंड सरकार की एक ऐसी मुहिम है जिसके तहत हफ्ते में एक दिन यानी शनिवार को गाड़ियों का इस्तेमाल न करने का फैसला लिया गया है इस नियम के तहत राज्य के सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले सभी बड़े अफसरों और कर्मचारियों से यह अपील की गई है कि वे शनिवार को अपनी पर्सनल कार बाइक या सरकारी गाड़ी घर पर ही खड़ी रखें दफ्तर आने-जाने के लिए वे या तो पैदल चलें साइकिल का इस्तेमाल करें या फिर बस और ऑटो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करें
उत्तराखंड में क्यों बढ़ा ट्रैफिक?
शनिवार और रविवार को पहाड़ों की ठंडी हवा खाने के लिए लोग भारी संख्या में उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो सिर्फ दो दिनों के भीतर आशारोड़ी चेक पोस्ट और नए एक्सप्रेस वे से करीब 45,000 से ज्यादा गाड़ियां देहरादून शहर में आईं हैं जिनमे छोटी कारें टूरिस्ट बसें और मोटरसाइकिलें शामिल थीं इस भारी भीड़ की वजह से नो व्हीकल डे का असर सिर्फ दफ्तरों तक ही सीमित होकर रह गया है और सड़कों पर प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा
उत्तराखंड की मौजूदा स्थिति क्या है
शहर के हालात और इस नियम को अच्छे से समझने के लिए आप नीचे दी गई टेबल को देख सकते हैं:
| विषय | नियम और जमीन पर स्थिति |
|---|---|
| नो व्हीकल डे का नियम | सरकारी कर्मचारी शनिवार को निजी या सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। |
| वीकेंड पर गाड़ियों की एंट्री | आशारोड़ी चेक पोस्ट से महज दो दिनों में 45,000 से ज्यादा गाड़ियां अंदर आईं। |
| सबसे ज्यादा जाम वाले इलाके | देहरादून के मुख्य रास्ते, राजपुर रोड और मसूरी का मॉल रोड। |
| पुलिस का नया प्लान | भीड़ बढ़ने पर किमाड़ी मार्ग से रूट डायवर्जन और नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को क्रेन से उठाना। |
आखिर क्यों पड़ी No Vehicle Day नियम की जरूरत?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी की कैबिनेट बैठक में इस योजना को हरी झंडी दी गई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी लोगों से ईंधन संरक्षण की अपील की थी इसी बात को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार चाहती है कि हफ्ते में कम से कम एक दिन हम अपनी गाड़ियों को आराम दें ताकि प्रदूषण भी कम हो और पेट्रोल डीजल की बचत भी हो सके
उत्तराखंड नो व्हीकल डे से चुनौती क्यों बढ़ी?
इतनी गाड़ियां एक साथ आने की वजह से देहरादून और मसूरी पुलिस को ट्रैफिक संभालने में बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है जाम से निपटने के लिए पुलिस ने पूरे रूट को अलग अलग सुपर जोन और सेक्टरों में बांट दिया है जब मसूरी जाने वाले मुख्य रास्ते पर गाड़ियां बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं तो ट्रैफिक को किमाड़ी मार्ग जैसे वैकल्पिक रास्तों की तरफ मोड़ दिया जाता है

