प्रथम पुरस्कार की हैट्रिक – डीजी बंसी का नहीं कोई मुकाबला! उत्तराखंड के सूचना विभाग ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।लगातार तीसरे वर्ष प्रथम पुरस्कार जीतकर सूचना विभाग ने यह साबित कर दिया कि जब नेतृत्व स्पष्ट हो, सोच सकारात्मक हो और टीम में तालमेल हो—तो नतीजे खुद बोलते हैं।
इस ऐतिहासिक हैट्रिक के पीछे जिस नाम की सबसे मजबूत छाया दिखाई देती है, वह है सूचना विभाग के महानिदेशक बंसीधर तिवारी।
एक नहीं, कई विभागों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उनका परफॉर्मेंस स्कोर हमेशा 100 पर कायम रहा है—यही उन्हें भीड़ से अलग करता है।
मीडिया हो या मैदानी कर्मचारी—सबको समान हक
डीजी बंसीधर तिवारी को हमेशा मीडिया कर्मियों और पत्रकारों के अधिकारों के लिए मजबूती से खड़े देखा गया।
पॉजिटिव सोच के साथ कलम चलाने वालों को मंच मिला, सम्मान मिला—
और जो नकारात्मक एजेंडे के साथ चले, उन्हें भी सिस्टम की निष्पक्षता का अहसास समय-समय पर कराया गया।
ग्राउंड जीरो तक सरकार की आवाज
सूचना विभाग आज केवल सचिवालय तक सीमित नहीं है।
राज्य के हर जिले, हर ब्लॉक और हर गांव तक सरकार की योजनाओं, फैसलों और उपलब्धियों को पहुंचाने में विभाग पूरी ताकत से जुटा है।
यह संभव हुआ है डीजी बंसीधर तिवारी के स्ट्रॉन्ग लीडरशिप मॉडल और कर्मियों के आपसी सहयोग से।
झांकी बनी पहचान, पुरस्कार बना परंपरा
पिछले तीन वर्षों से राज्य की झांकी का लगातार प्रथम स्थान हासिल करना कोई संयोग नहीं, बल्कि सतत मेहनत, बेहतर प्लानिंग और प्रभावी प्रस्तुति का नतीजा है।
आज सूचना विभाग की झांकी केवल सजावट नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, नीति और विजन का प्रतीक बन चुकी है।
उत्तराखंड के लिए यह गर्व का विषय है कि
एक विभाग, एक टीम और एक नेतृत्व
लगातार तीन साल से पूरे राज्य का मान बढ़ा रहा है।
सूचना विभाग – जहां परफॉर्मेंस बोलता है
डीजी बंसीधर तिवारी – जहां मुकाबला नहीं, मिसाल है


