धामी की रफ्तार से ध्वस्त चर्चाओं के मोहताज साजिशकर्ता देवभूमि में शोर बहुत हुआ, लेकिन हिला कुछ नहीं।
नेतृत्व बदलने की अफवाहें फैलाने वाले आज भी उसी जगह खड़े हैं, जहाँ से शुरू हुए थे—अटकलबाज़ी में।
“धामी आज हटेंगे, कल हटेंगे” कहने वालों की राजनीति सिर्फ कुर्सी की चर्चा तक सिमट कर रह गई, जबकि पुष्कर सिंह धामी काम की राजनीति लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
2021 में जब धामी पहली बार मुख्यमंत्री बने, हालात उनके पक्ष में नहीं थे।
2022 में इतिहास रचते हुए भाजपा को दोबारा सत्ता में लौटाया।
2024 में लोकसभा चुनाव में फिर 5-0 का क्लीन स्वीप।
निकाय, पंचायत और उपचुनाव—हर मोर्चे पर जीत की मुहर।
चुनाव ही नहीं, संकटों की कसौटी पर भी धामी खरे उतरे।
नकल माफिया, अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच और CBI की संस्तुति देकर उन्होंने जनभावनाओं को सम्मान दिया।
जोशीमठ से सिलक्यारा तक, धराली से थराली तक—आपदाओं में मुख्यमंत्री खुद ग्राउंड ज़ीरो पर डटे रहे, अफसरशाही को नहीं, जवाबदेही को आगे रखा।
हिंदुत्व के मुद्दों पर भी धामी सरकार ने बिना हिचक, बिना शोर ठोस फैसले लिए—
सख्त धर्मांतरण कानून
लैंड जिहाद व लव जिहाद पर कार्रवाई
अवैध मदरसे और मजारों पर सख्ती
चारधाम, मानसखंड और धार्मिक पर्यटन को नई गति
आज धामी सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि
विश्वसनीय नेतृत्व
संकट प्रबंधन का चेहरा
हिंदुत्व एजेंडे का मजबूत स्तंभ
बन चुके हैं।
यही वजह है कि अफवाहें चलाने वाले थकते जा रहे हैं,
और पुष्कर सिंह धामी अबाध गति से शासन चला रहे हैं।
भाजपा हाईकमान का भरोसा, मोदी–शाह का समर्थन और जनता का विश्वास—
यही है धामी की असली ताकत।


