छुट्टी न मिलने से नाराज मजदूरों ने AI की मदद से बब्बर शेर का फर्जी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे गांव में दहशत फैल गई। वीडियो की जांच में वन विभाग को सच्चाई पता चली और मामला AI से बनाई गई अफवाह का निकला।
पौड़ी गढ़वाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां एक ओर तकनीक की दुनिया में क्रांति ला रहा है, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसका गलत इस्तेमाल भी कर रहे हैं। उत्तराखंड के यमकेश्वर क्षेत्र से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां छुट्टी न मिलने से नाराज मजदूर ने AI की मदद से बब्बर शेर का फर्जी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
AI-Generated Lion Sparks Panic After Workers Upload Fake Video to Get Leave
शुक्रवार को पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित यमकेश्वर ब्लॉक के माला गांव में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में दावा किया गया कि धन्वंतरी धाम के आसपास बब्बर शेर घूम रहा है। वीडियो इतना असली लग रहा था कि गांव वालों में डर फैल गया। लोग घरों में दुबक गए और जंगल की ओर जाने से बचने लगे। इस वीडियो के वायरल होते ही पूरे गांव में चर्चा शुरू हो गई। लोग सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करने लगे, गांव में हर जगह “शेर आ गया” की आवाज गूँज रही थी। डर का माहौल ऐसा बन गया कि काम कर रहे श्रमिकों ने काम छोड़कर घर लौटने की बात कह दी। हैरानी की बात यह रही कि खुद ठेकेदार भी इस वीडियो को देखकर भ्रमित हो गया और उसने भी गांव में शेर आने की पुष्टि कर दी। श्रमिकों द्वारा काम रोके जाने के बाद परियोजना का काम पूरे दिन ठप पड़ गया।
वन विभाग में मचा हड़कंप
जैसे ही वीडियो की जानकारी वन विभाग तक पहुंची, लालढांग रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों के सामने बड़ी परेशानी यह थी कि इस क्षेत्र में बब्बर शेर पाया ही नहीं जाता, वहीं जंगल में कोई पंजों के निशान नहीं थे और न ही किसी तरह की हलचल नजर आई। वन विभाग सवालों के जंगल में भटकता रहा कि आखिर शेर आया कहां से?
जांच में खुला बड़ा राज
शनिवार को जब वन विभाग की टीम ने श्रमिकों से गहन पूछताछ की, तब पूरी सच्चाई सामने आई। दरअसल, श्रमिकों ने ठेकेदार से छुट्टी मांगी थी, लेकिन जब छुट्टी नहीं मिली, तो एक मजदूर ने AI टूल्स की मदद से शेर की फोटो और वीडियो बना डाली। उसने इस फर्जी वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जिससे गांव में अफवाह फैल गई और डर का माहौल बन गया। AI से बना यह शेर इतना असली लग रहा था कि इसे देखकर वन विभाग भी अलर्ट हो गया। इस तरह AI का एक फर्जी वीडियो पूरे गांव को दहशत में डालने के लिए काफी साबित हुआ। जांच पूरी होने के बाद साफ हो गया कि न कोई शेर आया था और न जंगल में कोई खतरा था। इसके बाद गांव में हालात सामान्य हो गए और वन विभाग ने राहत की सांस ली।
वन विभाग का आधिकारिक बयान
लैंसडौन वन प्रभाग के एसडीओ सुधीर कुमार ने बताया कि “जांच में सामने आया कि काम से छुट्टी न मिलने पर मजदूर ने AI की मदद से फर्जी फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था। मामले की जांच की गई है।” यह घटना एक बड़ा सबक है कि AI जितना ताकतवर है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है अगर इसका गलत इस्तेमाल किया जाए। आज लोग छुट्टी पाने के लिए बीमारी नहीं, बल्कि AI से शेर बना रहे हैं, जो भविष्य में बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकता है।


