यूसीसी नियमावली उत्तराखंड

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    यूसीसी नियमावली उत्तराखंड

    1. दायरा:
      • उत्तराखंड राज्य के सभी क्षेत्रों पर लागू होगा, केवल अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर।
      • राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के निवासी भी इसके दायरे में आएंगे।
    2. प्राधिकार:
      • ग्रामीण क्षेत्र: एसडीएम रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे।
      • नगर पंचायत/नगर पालिका: संबंधित एसडीएम रजिस्ट्रार और कार्यकारी अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे।
      • नगर निगम: नगर आयुक्त रजिस्ट्रार और कर निरीक्षक सब रजिस्ट्रार होंगे।
      • छावनी क्षेत्र: संबंधित CEO रजिस्ट्रार और रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर या सीईओ द्वारा अधिकृत अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे।
      • रजिस्ट्रार जनरल के तहत सभी रजिस्ट्रार और सब रजिस्ट्रार कार्य करेंगे, जो सचिव स्तर के अधिकारी और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन होंगे।
    3. रजिस्ट्रार जनरल के कर्तव्य:
      • यदि रजिस्ट्रार निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं करते हैं तो मामला रजिस्ट्रार जनरल के पास जाएगा।
      • रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील 60 दिन के भीतर रजिस्ट्रार जनरल से की जा सकती है।
    4. रजिस्ट्रार के कर्तव्य:
      • सब रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ 60 दिन में फैसला करना।
      • लिव-इन या विवाह कानूनों के उल्लंघन की सूचना पुलिस को देना।
    5. सब रजिस्ट्रार के कर्तव्य:
      • दस्तावेजों की जांच और आवेदक से स्पष्टीकरण की प्रक्रिया 15 दिन में करनी होगी, तत्काल मामलों में तीन दिन में।
      • नियम उल्लंघन या समय पर आवेदन न देने पर जुर्माना और पुलिस को सूचित करना।
      • विवाह की जानकारी सत्यापित न होने पर माता-पिता या अभिभावकों को सूचित करना।
    6. विवाह पंजीकरण:
      • 26 मार्च 2010 से पहले हुए विवाह का पंजीकरण अगले 6 महीनों में करवाना होगा।
      • संहिता लागू होने के बाद हुए विवाह का पंजीकरण विवाह तिथि से 60 दिन के भीतर करना होगा।
    7. आवेदकों के अधिकार:
      • यदि रजिस्ट्रार समय पर कार्रवाई नहीं करता है तो ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
      • अस्वीकृति के खिलाफ 30 दिन के भीतर अपील की जा सकती है।
    8. लिव-इन रिलेशनशिप:
      • संहिता लागू होने से पहले लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण एक महीने के भीतर कराना होगा।
      • संहिता लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश के एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा।
      • लिव-इन समाप्ति के लिए एक साथी द्वारा ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है।
      • यदि महिला गर्भवती हो जाती है तो रजिस्ट्रार को सूचना देनी होगी और बच्चे के जन्म के 30 दिन के भीतर इसे अपडेट करना होगा।
    9. विवाह विच्छेद:
      • तलाक या विवाह शून्यता के आवेदन में विवाह पंजीकरण, अदालत केस नंबर, अंतिम आदेश की तिथि, बच्चों का विवरण और कोर्ट के अंतिम आदेश की कॉपी की आवश्यकता होगी।
    10. वसीयत आधारित उत्तराधिकार:
      • वसीयत तीन तरीकों से हो सकेगी: ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरकर, हस्तलिखित या टाइप्ड वसीयत अपलोड करके, या तीन मिनट की वीडियो में वसीयत बोलकर।
    11. यूसीसी की यात्रा:
      • 27 मई 2022: यूसीसी पर विशेषज्ञ समिति का गठन।
      • 02 फरवरी 2024: यूसीसी पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत।
      • 08 फरवरी 2024: राज्य विधानसभा द्वारा अनुमोदन।
      • 08 मार्च 2024: भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदन।
      • 12 मार्च 2024: यूसीसी उत्तराखंड अधिनियम 2024 जारी।
      • 18 अक्टूबर 2024: यूसीसी नियमावली प्रस्तुत।
      • 27 जनवरी 2025: यूसीसी लागू।
    12. यूसीसी क्रियान्वयन योजना:
      • ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल (ucc.uk.gov.in) का विकास।
      • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) प्रशिक्षण भागीदार के रूप में नामित।
      • जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए।
      • हेल्पडेस्क (1800-180-2525) स्थापित किया गया।
      • विधिक प्रश्नों के समाधान के लिए जिला स्तरीय अधिकारी नियुक्त।
      • नागरिक जागरूकता के लिए शॉर्ट वीडियो और बुकलेट्स उपलब्ध कराए गए।
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