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प्रपंच पड़ा भारी, पांच पर गाज, मुख्यमंत्री हैं नाराज

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प्रपंच पड़ा भारी, पांच पर गाज, मुख्यमंत्री हैं नाराज उत्तराखंड सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मीटिंग के दौरान एक कर्मी की हरकत के बाद पांच पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। सीएम धामी की सुरक्षा में चूक के इस मामले में इंटेलिजेंस ने कार्रवाई करते हुए इन कर्मियों को उनके मूल तैनाती स्थान पर हटा दिया है।

खबरों के मुताबिक, राज्य संपत्ति विभाग के कर्मी द्वारा की गई इस घटना को उत्तराखंड में कुछ ऐसे लोगों द्वारा तूल दिया जा रहा है जो सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और इस कर्मी के आचरण को लेकर कई और अधिकारियों से भी गलत आचरण किए जाने की जानकारी मिली है। लेकिन अब तक कर्मी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं।

राज्य संपत्ति विभाग ने उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर हंगामा करने वाले कर्मी वीरेंद्र भट्ट के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सोमवार के बाद मंगलवार को उक्त कर्मी मुख्यमंत्री कैंप के बाहर भी नजर आया। ऐसे में विभाग ने इस कर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का मन बना लिया है, लेकिन यह देखना होगा कि पहले की तरह इस बार कार्रवाई पर क्या असर पड़ता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले को लेकर खासे नाराज हैं।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सचिवालय अपने कार्यालय की ओर जा रहे थे, इसी दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी ने हंगामा किया। इस दौरान पांचों सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। इन सुरक्षाकर्मियों को अब उनकी मूल तैनाती स्थानों पर भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में प्रथम दृष्टया इन पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई है।

प्राथमिक जांच के बाद, मंगलवार को इंटेलिजेंस मुख्यालय ने एएसआई शमशेर सिंह को हटाते हुए उन्हें जिला हरिद्वार, कांस्टेबल पिंकी शैव को जिला देहरादून, कांस्टेबल संजीत शर्मा को पीएसी हरिद्वार, कांस्टेबल शीला शर्मा को जिला हरिद्वार और कांस्टेबल पीएसी अनिल सिंह को आईआरबी द्वितीय देहरादून भेज दिया गया है।

विकासनगर में अवैध मदरसों पर शासन की कार्रवाई लगातार जारी

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विकासनगर में अवैध मदरसों पर शासन की कार्रवाई लगातार जारी है। मंगलवार को पांच अवैध मदरसे सील किए गए, जिनमें से तीन केदारवाला, एक अपर छरबा और एक खुशहालपुर में था। इस दौरान यहां भारी भीड़ भी जमा हो गई।

सोमवार को भी टीम ने एक के बाद एक 10 अवैध मदरसों को सील किया था। हालांकि, इस दौरान टीम को मुस्लिम समुदाय से हल्का-फुल्का विरोध भी देखने को मिला, लेकिन भारी पुलिस बल के बीच कार्रवाई बिना किसी रुकावट के जारी रही। अब तक कुल 19 अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है, जबकि 10 और मदरसों पर कार्रवाई होनी बाकी है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस कार्रवाई के लिए प्रशासन, पुलिस, एमडीडीए, मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक विभाग, शिक्षा विभाग और मदरसा बोर्ड की एक टीम गठित की है। सोमवार को एसडीएम विनोद कुमार और सीओ, विकासनगर बीएल शाह के नेतृत्व में टीम ने सहसपुर में अवैध मदरसों पर कार्रवाई की। ढाकी में मदरसा जामिया सब्बीबुल रशाद द्वितीय शाखा और उस्मानपुर में मुस्लिम समुदाय के हल्के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि केवल मदरसों को ही टारगेट किया जा रहा है।

जब लोग विरोध करने लगे, तो सीओ और थाना प्रभारी सहसपुर, शंकर सिंह बिष्ट ने स्थिति को संभाला और लोगों से कहा कि अगर मदरसे वैध हैं, तो वे तहसील प्रशासन के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत करें। वहीं, बैरागीवाला में मदरसा जामिया अनवारुल कुरान को सील करते समय स्थानीय जनप्रतिनिधि टीम के साथ उलझ गए। जनप्रतिनिधियों का दावा था कि मदरसे में कोई छात्र नहीं पढ़ता, लेकिन सर्वे टीम ने वहां 15 छात्रों को पंजीकृत पाया।

पुलिस ने सख्ती दिखाई और जनप्रतिनिधि शांत हो गए। एसडीएम ने बताया कि आठ अवैध मदरसों में कुल 303 छात्र पढ़ रहे थे, जबकि दो अवैध मदरसों के छात्र संख्या की जानकारी नहीं मिल पाई। टीम ने सहसपुर थाना क्षेत्र के सहसपुर, ढाकी, खुशहालपुर, जस्सोवाला, बैरागीवाला, धर्मावाला और तिमली में 10 अवैध मदरसों को सील किया। कई मदरसे ट्यूशन के नाम पर चल रहे थे और कुछ अवैध मदरसे किराए पर लिए गए भवनों में चल रहे थे। यहां किरायेदारों और आसपास के लोगों ने बताया कि छात्र ट्यूशन के लिए इन कमरों में आते थे। किरायेदारों और भवन मालिकों ने टीम से केवल कमरों को सील करने की अपील की, जिसे टीम ने माना और कई जगह अवैध मदरसों को चल रहे कमरों को सील कर दिया।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पहुंचे देहरादून

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी और अन्य लोगों के साथ क्रिकेटर ऋषभ पंत की बहन साक्षी पंत की शादी में शिरकत करने के लिए देहरादून पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर जैसे ही धोनी पहुंचे, उनके प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद वह मसूरी के लिए निकल पड़े।

सूत्रों के मुताबिक, धोनी करीब ढाई बजे विशेष चार्टर्ड विमान से देहरादून एयरपोर्ट पहुंचे। जैसे ही वे एयरपोर्ट पहुंचे, प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया, लेकिन धोनी ने किसी से भी बातचीत नहीं की।

इसके बाद धोनी अपनी ब्लैक रंग की कार में बैठकर रवाना हो गए। एयरपोर्ट के सूत्रों के अनुसार, अभी कुछ और क्रिकेटरों के एयरपोर्ट पहुंचने की संभावना है, और सभी मसूरी में शादी समारोह में शामिल होने के लिए जाएंगे।

यूथ फाउंडेशन जलवायु संकट से लड़ने के लिए युवाओं, सरकार और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाया

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“चिपको से जियोथर्मल इनोवेशन तक: उत्तराखंड लिख रहा है हरित क्रांति का नया अध्याय”

वाडीया इंस्टीट्यूट के सभागार में यूथ फाउंडेशन द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के साथ “जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा: चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार कार्यक्रम में उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को जलवायु संकट के प्रति जागरूक करने और सामूहिक कार्यवाही का ऐलान किया। कार्यक्रम में पर्यावरण योद्धा गौरा देवी के योगदान को याद करते हुए युवाओं को नई पीढ़ी के “चिपको आंदोलन” का नेतृत्व करने का आह्वान किया गया।

मुख्यमंत्री का ऐतिहासिक संबोधन: “प्रकृति बचेगी, तभी उत्तराखंड बचेगा”

मुख्य अतिथि पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को गौरा देवी की विरासत: चिपको आंदोलन का नया अवतार बताते हुए कहा, “यह सम्मेलन उत्तराखंड के लिए एक जन-आंदोलन की शुरुआत है। हर साल वनाग्नि हमारे जंगलों, जैव विविधता और आजीविका को भस्म कर देती है। हमारी सरकार ने ड्रोन टेक्नोलॉजी, अग्निशामक दलों का आधुनिकीकरण और जैव विविधता संरक्षण मिशन शुरू किया है, लेकिन यह लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं, हर नागरिक की है।”

युवाओं से अपील:
युवाओं से आग्रह है: अपने कॉलेज में “ग्रीन चैंपियन” टीम बनाएँ, उत्तराखंड के लिए सोशल मीडिया अभियान चलाएँ, और जलवायु संरक्षण को प्राथमिकता दें।

इस मुहिम में हमें वैज्ञानिक संस्थानों, ग्रामीण समुदायों और निजी क्षेत्र का सहयोग भी चाहिए। वाडिया इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों से मैं अनुरोध करता हूँ कि वे ग्लेशियर शोध को और गति दें। गाँवों में “वन पंचायतों” को मजबूत करें। निजी उद्योग हरिद्वार जैसे शहरों में जल संरक्षण तकनीकों को अपनाएँ।

मुख्यमंत्री ने मंच से सभी को तीन संकल्प लेने का आह्वान किया:
पहला – “मैं हर महीने कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाऊँगा/लगाऊँगी।”
दूसरा – “मैं अपने घर में वर्षा जल संचयन का प्रबंध करूँगा/करूँगी।”
तीसरा – “मैं अपने समुदाय को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करने का प्रयास करूँगा/करूँगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा जिस प्रकार से यूथ फाउंडेशन के जाबाज़ युवाओं ने कर्नल कोठियाल के मार्गदर्शन और नेतृत्व में हर परिस्थिति में साहसिक कार्य किए, चाहे वह गंगोत्री की दैविय त्रासदी हो , केदारनाथ जैसी भीषण आपदा हो या फिर पिथौरागढ़ की आपदा, फॉरेस्ट फायर , कोविड महामारी हो या नंदा राजजात यात्रा हो या गोट विलेज जैसे मॉडल हो उनसे ये प्रतीत होता है कि जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा में भी यूथ फाउंडेशन अग्रणी भूमिका निभाएगा और यूथ फाउंडेशन को इस मिशन की कामयाबी के लिए शुभकामनाएं दी।

अंतर-मंत्रालयी सहयोग पर जोर:

  • “पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वाडिया इंस्टीट्यूट को एकजुट होकर इस चुनौती पर काम करना होगा। हम 2030 तक उत्तराखंड को ‘कार्बन न्यूट्रल’ बनाने की राह पर हैं।

कार्यक्रम में गौरा देवी के साहस और पर्यावरण प्रेम को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “गौरा देवी जी ने पेड़ों से लिपटकर इतिहास रचा। आज उनकी विरासत युवाओं के हाथों में है”

गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी का योगदान: “लोकगीतों से जगाएंगे पर्यावरण चेतना”

प्रख्यात लोक गायक एवं सामाजिक कार्यकर्ता गढ़रत्न श्री नरेंद्र सिंह नेगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “पहाड़ की संस्कृति और लोकगीत प्रकृति के प्रति सम्मान सिखाते हैं। मैं युवाओं के साथ मिलकर पर्यावरण जागरूकता के लिए संगीत यात्राएं आयोजित करूंगा।”

यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल ने युवाओं को दिया मंत्र: “जोश और होश के साथ लड़ें जंग”

फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा, ” जलवायु युद्ध में जीत के लिए हमें जोश और होश दोनों चाहिए। युवा समाधान का हिस्सा हैं और हमें गौरा देवी की विरासत को 21वी सदी की तकनीक से जोड़कर ज़मीन पर काम करना है। हम सब मिलकर जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में काम कर दुनिया को एक बार फिर पर्यावरण का संदेश देंगे।

वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने रखे ठोस सुझाव

– डॉ. जे. वी. सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक,पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय): ने कहा”हम AI-आधारित जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करेंगे, ताकि वनाग्नि और बाढ़ जैसी आपदाओं का पहले अनुमान लग सके।”

  • डॉ. विनीत कुमार गहलोत (निदेशक, वाडीया इंस्टीट्यूट): “हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने पर शोध को प्राथमिकता देंगे। कार्यक्रम का संचालन नवीन पिरशाली द्वारा किया इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और युवाओं के साथ सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री ने किया चार हेली सेवाओं का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को चार हेली सेवाओं का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया है। इन सेवाओं के जरिए जरिए देहरादून से नैनीताल, बागेश्वर और मसूरी और हल्द्वानी से बागेश्वर का हवाई सम्पर्क स्थापित हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “उड़ान“ योजना के अंतर्गत शुरू की जा रही इन चार हेली सेवाओं से राज्य में पर्यटन एवं आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेंगे। बागेश्वर नैनीताल और मसूरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वादियाँ, हरे-भरे पहाड़, ऐतिहासिक मंदिर और समृद्ध संस्कृति देश और दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। नैनीताल अपनी मनोरम झीलों, नयना देवी शक्तिपीठ और कैंची धाम जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। सरयू और गोमती नदी के पावन संगम पर स्थित बागेश्वर का क्षेत्र, पवित्र बागनाथ मंदिर और प्रसिद्ध उत्तरायणी मेले के लिए जाना जाता है। हेली सेवा की शुरुआत से अब इन क्षेत्रों की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का आनंद लेने वाले पर्यटक यहां और भी आसानी से पहुँच सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून से इन स्थानों पर पहुंचने में सड़क मार्ग से लगभग 8 से 10 घंटे लगते हैं, इस सेवा के प्रारंभ होने से यह यात्रा करीब 1 घंटे की हो जाएगी। इमरजेंसी की स्थिति में इन क्षेत्रों में रहने वाले हमारे लोगों को बहुत सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आम आदमी को भी हवाई यात्रा करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से उड़ान योजना प्रारंभ की थी। इस योजना ने प्रदेश में हवाई संपर्क को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जिसके अंतर्गत राज्य के कई हिस्सों में हवाई पट्टियों और हेलीपोर्ट्स का विकास किया गया है।

राज्य में 18 हेलीपोर्ट्स से हेली सेवाओं के संचालन की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिनमें से अब तक 12 हेलीपोर्ट्स पर सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा चुकी हैं। इन हेली सेवाओं से अब तक गौचर, श्रीनगर, चिन्यालीसौड़, हल्द्वानी, मुन्स्यारी, पिथौरागढ़, पंतनगर, चंपावत और अल्मोड़ा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि हेली सेवाएं राज्य में न केवल आवागमन को सुगम बनाएंगी, बल्कि दैवीय आपदा के समय राज्य के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के लिए भी एक जीवनरेखा के रूप में भी कार्य करेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में हवाई संपर्क को और अधिक सशक्त बनाने के लिए घरेलू उड़ानों को बढ़ावा देने के साथ ही उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार के लिए भी लगातार प्रयासरत है।

सीएम ने यात्रियों से की वर्चुअल बातचीत

मुख्यमंत्री ने इन हेली सेवाओं के शुभारंभ अवसर पर इनसे यात्रा करने वाले लोगों से वर्चुअल माध्यम से बातचीत भी की। सबंधित क्षेत्रों के विधायकगणों, अन्य जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोगों ने इन सेवाओं के शुभारंभ करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, श्री खजानदास, श्रीमती सविता कपूर, श्री बृज भूषण गैरोला, मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री सचिन कुर्वे, गढ़वाल कमिश्नर श्री विनय शंकर पाण्डेय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी युकाडा श्रीमती सोनिका, वर्चुअल माध्यम से विधायक श्री सुरेश गड़िया, श्रीमती पार्वती दास, श्री राम सिंह कैड़ा एवं अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सप्ताह में सात दिन संचालित होगी सेवा

देहरादून से मसूरी की हेली सेवा उत्तराखंड हवाई सम्पर्क योजना के तहत संचालित की जा रही है, जबकि शेष तीन हेली सेवाएं केंद्र सरकार की क्षेत्रीय सम्पर्क योजना के तहत संचालित की जा रही हैं। देहरादून – मसूरी के बीच पांच सीटर, जबकि शेष जगहों के लिए सात सीटर हेलीकॉप्टर सेवाएं देगा। देहरादून से बागेश्वर, नैनीताल और और हल्द्वानी से बागेश्वर की हेली सेवा सप्ताह में सातों दिन दिन में दो बार संचालित होगी। जबकि मसूरी देहरादून हेली सेवा पहले माह में प्रतिदिन एक उड़ान भरेगी।

किराया विवरण
01 – देहरादून – नैनीताल
किराया – 4500 प्रति यात्री
देहरादून से उड़ान- सुबह 8.15, दोपहर- 02.25 बजे
नैनीताल से उड़ान- सुबह 9.10, दोपहर- 03.20 बजे

02 – देहरादून – बागेश्वर
किराया – 4000 प्रति यात्री
देहरादून से उड़ान- सुबह 10.20, दोपहर- 12.30 बजे
बागेश्वर से उड़ान- सुबह 11.10, दोपहर- 01.20 बजे

03 – हल्द्वानी – बागेश्वर
किराया – 3500 प्रति यात्री
हल्द्वानी से उड़ान- सुबह 08.30, दोपहर- 02.45 बजे
बागेश्वर से उड़ान- सुबह 09.00, दोपहर- 03.00 बजे

04 – देहरादून – मसूरी
किराया – 2578 प्रति यात्री

मुख्यमंत्री धामी वाडिया इंस्टीट्यूट में जलवायु परिवर्तन एवं नवीकरणीय ऊर्जा- चुनौतियाँ और समाधान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में हुए शामिल

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वाडिया इंस्टीट्यूट में जलवायु परिवर्तन एवं नवीकरणीय ऊर्जा- चुनौतियाँ और समाधान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए। सीएम ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन संपूर्ण विश्व के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने खड़ा है। उन्होंने पिछले वर्ष की गर्मी के अनुभव को याद करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण देहरादून सहित विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान पहले की तुलना में बहुत अधिक रहा। ऐसे समय में, जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरूकता फैलाने एवं इसके समाधानों पर गहनता से चर्चा करने का एक सराहनीय प्रयास है। यह संगोष्ठी न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को समझने का एक अवसर है, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारे संकल्पों को मजबूती देने का भी एक विशिष्ट मंच है ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में “हरियाली मिशन“ के अंतर्गत लाखों की संख्या में पौधे रोपे जा रहे हैं। “जल शक्ति अभियान“ के माध्यम से 1000 गाँवों में तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों को भी पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन ऑथोरिटी का गठन भी किया है, जिसके अन्तर्गत अभी तक 5500 जलीय स्त्रोतों तथा 292 सहायक नदियों का चिन्हीकरण कर उनका उपचार किया जा रहा है। वाडिया इंस्टीट्यूट के सहयोग से हमने ग्लेशियर अध्ययन केंद्र भी स्थापित किया है, जिससे हम प्रकृति द्वारा दिए जाने वाले संकेतों को समझ सकें और उसके क्षरण को रोकने हेतु प्रभावी नीतियाँ बनाकर कार्य कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन ग्रीन-गेम्स की थीम पर किया गया। पूरे आयोजन के दौरान मेडल प्राप्त करने वाले सभी खिलाड़ियों के नाम पर एक-एक रूद्राक्ष के पौधे लगाकर 2.77 हेक्टेयर वन क्षेत्र को ’खेल वन’ के रूप में स्थापित किया गया। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां जीडीपी की तर्ज़ पर जीईपी यानि ग्रोस इनवायरमेंट प्रोडक्ट का इंडेक्स तैयार कर जल, वन, भूमि और पर्वतों के पर्यावरणीय योगदानों का आँकलन करने का प्रयास हो रहा है। जीवाश्म आधारित ईंधन के स्थान पर ग्रीन ऊर्जा को वृहद् स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। “नई सौर ऊर्जा नीति” लागू करने के साथ ही वर्ष 2027 तक 1400 मेगावाट सोलर क्षमता पाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में “पी०एम० सूर्यघर योजना” और “मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना” के अंतर्गत सब्सिडी का लाभ उठाकर बड़ी संख्या में लोग सोलर पैनल लगवा रहे हैं।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन संपदाओं को संरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि स्थानीय लोगों को वनों से जोड़ा जाए। इससे हमारे वन भी संरक्षित रहेंगे और लोगों को आजीविका भी मिलेगी। वनों में लगने वाली आग को न्यून करने के लिए विस्तृत प्लान बनाया गया है।

इस मौके पर लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल(से नि), प्रमुख वन संरक्षक डॉ धनंजय मोहन, निदेशक वाडिया डा विनीत कुमार गहलोत, वैज्ञानिक डॉ जे बी सिंह, डा हृदया चौहान सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक और श्रोता मौजूद रहे।

रंगों की तरह ही हमें अपने जीवन में प्रेम ख़ुशी और सकारात्मकता के रंग भरने चाहिए डॉ शैलेन्द्र

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पत्रकार होली मिलन कार्यक्रम में आज जमकर धूम मची। आपसी प्रेम व भाईचारे के इस मिलन उत्सव में कवियों ने जहां कविताओं का वाचन कर उपस्थित लोगों के मन को गुदगुदाया वही ढोल-नगाड़ों के साथ पत्रकारों ने जमकर नृत्य करने के साथ ही एक-दूसरे को गले लगाकर होली की शुभकामनाएं दी।

राजपुर रोड स्थित विश्व संवाद केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डॉ शैलेंद्र बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित रहे। उन्होंने कहा की होली का पर्व हमें असत्य पर सत्य की विजय और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश देता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भक्त प्रह्लाद की भक्ति और उसकी सत्यनिष्ठा के कारण भगवान विष्णु ने उसे बचाया और अहंकारी होलिका का अंत हुआ। इससे हमें यह सीख मिलती है कि अहंकार और अन्याय की उम्र ज्यादा नहीं होती, अंततः जीत सत्य की ही होती है। उन्होंने होली का महत्व बताते हुए कहा कि फाग उत्सव का भारतीय पंरपरा में विशेष महत्व है। यह पर्व हमें समरसता का संदेश देता है।

होली प्रेम व भाईचारे का त्योहार है, इसलिए होली को भाईचारे के साथ मनाया जाना चाहिए। मुख्य वक्ता डॉक्टर शैलेन्द्र ने पत्रकारों द्वारा दी गई सुंदर प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कहा पत्रकार अपनी लेखन, प्रस्तुति, निष्पक्ष विश्लेषण और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता के माध्यम से देश व समाज को जागरूक करने का कार्य करते हैं। उनकी रचनात्मकता, सत्यनिष्ठा और साहस प्रशंसा के योग्य हैं।प्रांत प्रचार प्रमुख संजय कुमार ने सामाजिक एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि होली मिलन समारोह में आपसी नजदीकियां बढ़ती है। इस तरह के आयोजन से सामाजिक बंधुओं के बीच मेल मिलाप बढ़ता है।

आरएसएस के विभाग प्रचारक धनंजय ने कहा कि होली का त्योहार हमारी सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक और भारतीयता का प्रतीक है। सबको एक रंग में रंग देने का यह त्योहार है।

कार्यक्रम में वीरेंद्र डंगवाल पार्थ, शाक्त ध्यानी, शैलेन्द्र, चंद्रा स्वामी, अजय जोशी, जसबीर हलदार, अजय जोशी ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में आगंतुकों का विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष सुरेंद्र मित्तल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम संयोजक व मंच संचालन प्रांत मीडिया संवाद प्रमुख बलदेव पाराशर ने किया। होली मिलन कार्यक्रम में प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब पोर्टल संचालित करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों, पत्रिका एवं मैगज़ीन के संपादकों सहित अनेक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार बंधुओंव पत्रकार बहनों ने भाग लिया।

लोकसभा के बजट सत्र में राहुल गांधी की ये है मांग

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करीब एक महीने के अंतराल के बाद संसद के बजट सत्र की कार्यवाही पुनः शुरू हो गई है। सत्र के दूसरे भाग के पहले कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक महत्वपूर्ण मांग रखी, जिसमें उन्होंने कहा कि “पूरे देश में वोटर लिस्ट पर सवाल उठ रहे हैं। सभी विपक्षी दल इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं और अब पूरा विपक्ष यही कह रहा है कि वोटर लिस्ट पर चर्चा होनी चाहिए।”

राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कहा, “हम आपकी टिप्पणी को स्वीकार करते हैं कि सरकार मतदाता सूची नहीं बनाती है, लेकिन हम इस पर चर्चा की मांग करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “देशभर में मतदाता सूची पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र सहित हर राज्य में विपक्ष ने एक स्वर में इन सवालों को उठाया है।”

वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, “चुनाव आयोग सरकार के नियंत्रण में है… यदि लोकतंत्र इसी तरह चलता रहा और चुनाव आयोग सरकार के पक्ष में काम करता रहा, तो जो परिणाम आएंगे, वे आप सबके सामने हैं… अगर यही व्यवस्था चलती रही, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सिर्फ एक दिखावा होगा… हमें कई वर्षों से इस पर संदेह है… जमीन पर क्या हो रहा है, यह सभी को पता है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।”

इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सौगत रॉय ने कहा कि मतदाता सूची में कुछ खामियां हैं, और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुर्शिदाबाद और बर्दवान संसदीय क्षेत्रों तथा हरियाणा में एक ही ईपीआईसी (चुनावी फोटो पहचान पत्र) संख्या वाले मतदाता पाए गए हैं। टीएमसी ने यह भी कहा कि तृणमूल का एक प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची पर अपनी चिंताओं को उठाने के लिए नवनियुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूचियों में व्यापक संशोधन की भी मांग की, खासकर अगले साल पश्चिम बंगाल और असम में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले।

सौगत रॉय ने दावा किया, “कुछ गंभीर खामियां हैं। महाराष्ट्र में इस बात की चर्चा की गई है, जहां मतदाता सूचियों में गड़बड़ी हुई थी। हरियाणा में भी इस पर ध्यान दिलाया गया। अब वे पश्चिम बंगाल और असम में भी घुसने की कोशिश कर रहे हैं, जहां अगले साल चुनाव होने हैं।” तृणमूल नेता ने कहा, “पूरी मतदाता सूची में व्यापक संशोधन किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग को देश को यह जवाब देना चाहिए कि इन सूचियों में गड़बड़ी क्यों हुई।”

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए बड़ा फैसला: वीआईपी दर्शन शुल्क खत्म कर सकती है धामी सरकार

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उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए बड़ा फैसला: वीआईपी दर्शन शुल्क खत्म कर सकती है धामी सरकार

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा में वीआईपी दर्शन को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार एक अहम कदम उठा सकती है। राज्य सरकार की योजना है कि इस बार चार धाम यात्रा में वीआईपी दर्शन पर लिया जाने वाला शुल्क खत्म किया जाए। यह निर्णय खासतौर पर तीर्थयात्रियों के बीच अच्छे संदेश को फैलाने के लिए लिया जा सकता है, क्योंकि वीआईपी दर्शन शुल्क को लेकर पहले कई बार विवाद और असहमति हो चुकी है।

वीआईपी दर्शन शुल्क के बारे में पूर्व विवाद
2023 में, बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने वीआईपी दर्शन के लिए 300 रुपये का शुल्क लिया था, जिससे समिति को लाखों रुपये की आय प्राप्त हुई थी। हालांकि, इस शुल्क व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे, क्योंकि लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और इस शुल्क की लेखा-जोखा रखना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाए गए थे कि इस व्यवस्था से धार्मिक आस्था में पैसों का प्रभाव पड़ता है, जो सही नहीं है।

मुख्यमंत्री धामी का निर्णय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मुद्दे पर विशेष रूप से संवेदनशील हैं और उन्हें धर्म रक्षक के रूप में देखा जा रहा है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह निर्णय लिया है कि चारधाम यात्रा में वीआईपी दर्शन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह कदम उत्तराखंड सरकार द्वारा तीर्थयात्रियों के बीच समानता का संदेश देने के लिए उठाया गया है।

चारधाम यात्रा की तैयारियों पर समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री धामी 10 मार्च को चारधाम यात्रा की तैयारियों पर एक समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें यात्रा से संबंधित सभी उच्च अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में यात्रा को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले किए जा सकते हैं।

पंजीकरण प्रक्रिया को और सुलभ बनाना
आगामी चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को भी सरल और अधिक सुसंगत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग ने होली के बाद पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई है। इस बार पंजीकरण में आधार कार्ड को अनिवार्य किया जा सकता है, और इसके लिए पोर्टल को अपडेट किया जा रहा है।

निष्कर्ष
इस फैसले से न केवल चार धाम यात्रा की साख में सुधार होगा, बल्कि तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को और भी सुगम और समर्पित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम उत्तराखंड में धर्म और आस्था को सशक्त करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल साबित हो सकता है।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 37 साल का इंतजार? 1988 के बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ कोई फाइनल नहीं जीत सकी टीम इंडिया

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच चैंपियंस ट्रॉफी का खिताबी मुकाबला: एक ऐतिहासिक अवसर

भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस साल की चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला रविवार को दुबई में खेला जाएगा, और यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बन चुका है। भारतीय टीम के सामने यह चुनौती होगी कि वह 12 साल बाद इस ट्रॉफी को जीते और न्यूजीलैंड के खिलाफ एक लंबा अनचाहा रिकॉर्ड भी तोड़े। 1988 के बाद से भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ किसी भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट फाइनल को नहीं जीता है। 37 साल बाद, अगर भारत यह मुकाबला जीतता है, तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी, और टीम पहली बार किसी आईसीसी टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड को हराने में सफल होगी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का रिकॉर्ड
भारत ने आखिरी बार 1988 में शारजाह कप के फाइनल में न्यूजीलैंड को हराया था। इसके बाद से भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार तीन फाइनल हार चुका है, जिनमें 2000 चैंपियंस ट्रॉफी, 2005 वीडियोकॉन त्रिकोणीय सीरीज और 2021 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल शामिल हैं। भारत के लिए न्यूजीलैंड हमेशा एक मुश्किल प्रतिद्वंद्वी साबित हुआ है, और आईसीसी टूर्नामेंटों में न्यूजीलैंड का भारत के खिलाफ जीत का रिकॉर्ड 10-6 है। खास बात यह है कि न्यूजीलैंड ने आईसीसी नॉकआउट चरण में भारत के खिलाफ चार में से तीन मुकाबले जीते हैं।

भारत के गेंदबाजी संयोजन पर नजरें
भारत का आत्मविश्वास इस बार बढ़ा हुआ है, क्योंकि उसकी स्पिन चौकड़ी ने दुबई के सपाट पिच पर शानदार प्रदर्शन किया है। वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव ने पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया है। इसके अलावा रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल ने भी गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती दी है। अगर फाइनल उसी पिच पर खेला जाता है, जहां भारत और पाकिस्तान का मुकाबला हुआ था, तो ये चारों स्पिनर कीवी टीम को सख्त चुनौती दे सकते हैं।

न्यूजीलैंड के लिए भी स्पिनरों से उम्मीद
न्यूजीलैंड की टीम भी भारत के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन के लिए अपने स्पिनरों पर निर्भर करेगी। केन विलियमसन और रचिन रवींद्र जैसे खिलाड़ी स्पिन गेंदबाजी को अच्छी तरह खेलते हैं। न्यूजीलैंड के पास भी मिचेल सैंटनर, माइकल ब्रेसवेल और रवींद्र जैसे स्पिनर हैं, जो भारत के खिलाफ सफलता प्राप्त करने के लिए अहम होंगे। पिछले साल टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड के स्पिनरों ने भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया था, और वे एक बार फिर 2000 के बाद पहली बार आईसीसी वनडे खिताब जीतने के लिए उसी प्रदर्शन को दोहराना चाहेंगे।

विराट और रोहित पर पूरा दारोमदार
चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत के लिए विराट कोहली और रोहित शर्मा पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। कोहली हाल ही में शानदार फॉर्म में हैं और पिछले पांच मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक जड़ चुके हैं। वहीं, रोहित शर्मा को क्रीज पर लंबे समय तक टिकने की जरूरत होगी, ताकि वे मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर से दबाव कम कर सकें। रोहित के लिए यह फाइनल बहुत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि वह लंबे समय से भारतीय क्रिकेट के सितारे रहे हैं।

हार्दिक पांड्या का अहम रोल
भारत की सफलता में हार्दिक पांड्या का भी महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। वह ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पांड्या ने सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन किया था, और इस बार भी उनसे बड़ी उम्मीदें होंगी।

टीमों का संभावित संयोजन:

भारत: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, ऋषभ पंत, रविंद्र जड़ेजा, वरुण चक्रवर्ती।

न्यूजीलैंड: मिचेल सैंटनर (कप्तान), माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे, लोकी फर्ग्यूसन, मैट हेनरी, टॉम लाथम, डेरिल मिशेल, विल ओ’रूर्के, ग्लेन फिलिप्स, रचिन रवींद्र, नाथन स्मिथ, केन विलियमसन, विल यंग, जैकब डफी।

निष्कर्ष:
भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला यह फाइनल मुकाबला एक ऐतिहासिक क्षण बन सकता है। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी दुर्गति को खत्म करने और 37 साल पुरानी हार का बदला लेने का शानदार मौका मिलेगा। विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ-साथ पूरी टीम को एकजुट होकर इस जीत के लिए संघर्ष करना होगा, और यदि वे अपने प्रदर्शन को जारी रखते हैं, तो चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का सपना पूरा हो सकता है।