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रुद्रपुर: नेपाल जा रही कार किच्छा में दुर्घटनाग्रस्त, महिला की मौत व तीन घायल

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दिल्ली से नेपाल जा रही कार किच्छा में दुर्घटनाग्रस्त, एक महिला की मौत, तीन घायल

उधमसिंहनगर जनपद के किच्छा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह लगभग 4:30 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दिल्ली से नेपाल जा रही डिज़ायर कार किच्छा में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में सवार नेपाल मूल की महिला जयंती की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे में प्रीति भट्ट, करन सिंह और सुवास गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को स्थानीय लोगों और पुलिस की सहायता से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली और क्षतिग्रस्त कार को कब्जे में लेकर घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार नेपाल की ओर जा रही थी तभी किच्छा क्षेत्र में यह हादसा हुआ।

उत्तराखंड: धामी सरकार ने एक और अवैध मजार को ढहाया

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उत्तराखंड : हरिद्वार जिले में एक और अवैध मजार धामी सरकार ने ध्वस्त की

सरकारी भूमि पर अवैध संरचना में कोई नहीं मिले अवशेष

हरिद्वार: जिले की लक्सर तहसील में सुल्तानपुर के पास गांव नेहादपुर सुठारी धामी सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए ग्राम समाज की जमीन पर बनी अवैध मजार ध्वस्त कर दिया।सरकारी भूमि पर बनी इस अवैध संरचना को दो सप्ताह पूर्व नोटिस दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक एसडीएम सौरभ अस्वल की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम और भारी पुलिस फ़ोर्स तैनात कर ये कारवाई की गई और पहले पूरे क्षेत्र को किया गया भारी संख्या में सुरक्षा बल के जवानों द्वारा सील किया ।

उल्लेखनीय है कि सनातन जिले माने जाते हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर इस तरह की अवैध मजारे बना कर अवैध कब्जे किए जाने के मामले प्रशासनिक सर्वे में सामने आए थे ।

आज तड़के मजार को प्रशासन की टीम ने मौके पर बुलडोज़र चलाकर पूरी तरह ध्वस्त किया,
डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि अवैध कब्जे पर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है जिसका अनुपालन कराया जा रहा है ।उन्होंने बताया कि दो सप्ताह पूर्व उक्त संरचना के वैध दस्तावेजों के बारे में खादिम को नोटिस दिया गया था,उनके द्वारा कोई भूमि दस्तावेज नहीं दिखाए जाने पर आज कार्रवाई की गई है ,कार्रवाई के दौरान किसी भी विवाद से बचने के लिए पुलिस ने पूरे इलाके में कड़ा पहरा लगाया गया।

धामी सरकार की स्पष्ट नीति
सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और कब्जों को लेकर स्पष्ट नीति है कि किसी भी सूरत में अवैध मजार अवैध निर्माण अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं होंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार अभी तक 9500 एकड़ सरकारी जमीन अवैध कब्जा मुक्त करवा चुकी है साथ ही 560 से अधिक अवैध मजारों को भी ध्वस्त कर चुकी है।

अब 15 दिन के भीतर करना होगा शैक्षणिक रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण, ये मिलेगा फायदा

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सरकार शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटी है. इसी क्रम में शैक्षणिक रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण पर डेडलाइन दी गई है.

देहरादून: उत्तराखंड में विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण पर डेडलाइन दी गई है. इस दौरान प्रदेश में उच्च शिक्षा के अंतर्गत छात्रों के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजिलॉकर में अपलोड करना होगा. राज्य में साल 2021 से 2024 तक के सभी रिकॉर्ड्स विभिन्न प्लेटफार्म पर अपलोड करने के निर्देश जारी हुए हैं.

प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों के शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण अब बड़ी चुनौती बन गया है. दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने दस्तावेजों के डिजिटलीकरण को लेकर समय सीमा तय की है. जिसके तहत 15 दिनों के भीतर विश्वविद्यालयों को यह काम पूरा करना होगा.

राज्य सरकार ने सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर शैक्षणिक वर्ष 2021 से 2024 तक के समस्त शैक्षणिक दस्तावेज, क्रेडिट रिकॉर्ड तथा छात्रों की अपार आईडी से जुड़ा डेटा डिजीलॉकर, नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी और अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें. इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता दे रही है. इसी क्रम में प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्रों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, क्रेडिट डेटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एनएडी और एबीसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है. इससे छात्रों को किसी भी समय, कहीं भी अपने शैक्षणिक दस्तावेज आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता, सुगमता और समय की बचत सुनिश्चित होगी.

UGC ने विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिलॉकर पर अपलोड करने की समयसीमा बढ़ाकर 30 नवम्बर 2025 कर दी है. इसलिए प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को इस समय सीमा का पालन करने और साल 2021 से 2024 तक के सभी छात्रों के दस्तावेज, अपार आईडी डेटा और क्रेडिट रिकॉर्ड तत्काल एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के निर्देश जारी किए गए हैं.

उधर 19 नवम्बर 2025 को दून विश्वविद्यालय में एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर डेटा अपलोडिंग की प्रगति की समीक्षा के लिए कार्यशाला एवं बैठक आयोजित की जाएगी. इसमें सभी विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रकों, नोडल अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों को अद्यतन रिपोर्ट व आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है.

केन्द्र सरकार की एनएडी-एबीसी प्रणाली न केवल विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक पहचान उपलब्ध कराती है, बल्कि क्रेडिट ट्रांसफर को भी सरल बनाती है. यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

अब ये होगी पदोन्नति में शिथिलता की नई परिभाषा, शासन ने जारी किए संशोधित नियम

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उत्तराखंड शासन ने अहम कदम उठाया है. जिसके तहत पदोन्नति में शिथिलता को दूर करने की कोशिश की गई है.

देहरादून: उत्तराखंड शासन ने सरकारी सेवकों की पदोन्नति में शिथिलता प्रदान करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 द्वारा जारी उत्तराखंड सरकारी सेवक पदोन्नति के लिए अधीनस्थ सेवा में शिथिलीकरण संशोधन नियमावली, 2025 के तहत अब शिथिलता की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाया गया है.

सरकारी सेवकों के लिए पदोन्नति में शिथिलता के नए नियम तय किए गए हैं. सरकार ने उत्तराखंड सरकारी सेवक पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा में शिथिलता संशोधन नियमावली 2025 लागू की है. यह संशोधित नियमावली तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है. इसका मकसद राज्य कर्मियों को पदोन्नति में शिथिलता का लाभ देने के लिए स्पष्टता लाना है. कार्मिक सचिव शैलेश बगौली ने पदोन्नति में शिथिलता संशोधन नियमावली से जुड़े आदेश जारी किए हैं.

नए नियमों के अनुसार यदि किसी विभाग में पदोन्नति हेतु निर्धारित योग्यता अवधि पूरी नहीं हो रही है, तो संबंधित विभागाध्यक्ष अब न्यूनतम आवश्यक सेवा अवधि में से अधिकतम 50 प्रतिशत तक की शिथिलता दे सकते हैं. इसके लिए विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति अनिवार्य होगी. समिति में नियंत्रक वित्त, कार्मिक प्रतिनिधि और विभागाध्यक्ष द्वारा नामित एक अधिकारी शामिल रहेगा.

महत्वपूर्ण यह है कि शिथिलता केवल उन्हीं पदों पर दी जा सकेगी, जिनके लिए वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति होती है. इसके अलावा यदि किसी सेवा नियमावली में उच्चतर पद पर पदोन्नति हेतु अधीनस्थ सेवा में अलग-अलग श्रेणियों का सम्मिलित अनुभव अनिवार्य है, तो उस स्थिति में भी 50 प्रतिशत तक की शिथिलता दी जा सकती है.

दस्तावेज में दिए गए उदाहरण के अनुसार यदि किसी संवर्ग में उच्च पद ख पर पदोन्नति हेतु 18 वर्ष का सम्मिलित अनुभव अनिवार्य हो, परंतु किसी अधिकारी की उपलब्ध सेवा 16 वर्ष है, तो नई नियमावली के अनुसार 2 वर्ष तक की कमी को शिथिल किया जा सकेगा. यानी अब न्यूनतम सेवा से प्रोबेशन पीरियड को कम किया जायेगा. हालांकि, यह शिथिलता प्रदान करते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिकारी ने कतिपय अधीनस्थ पदों पर न्यूनतम सेवा अवधि अवश्य पूरी की हो.

शासन के अनुसार संशोधित नियमावली का उद्देश्य पदोन्नति प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी को रोकना तथा योग्य अधिकारियों को समय पर प्रमोशन का अवसर प्रदान करना है. सचिव शैलेश बगौली द्वारा यह आदेश जारी किया गया है. नए नियम लागू होने से विभिन्न विभागों में लंबित पदोन्नति प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

उत्तराखंड में पिछले लंबे समय से रिक्त पदों पर समय से पदोन्नति किए जाने के निर्देश दिए जाते रहे हैं. इसका मकसद जहां एक तरफ कर्मचारी या अधिकारी को समय से पदोन्नति देना है तो वहीं रिक्त पदों को समय से भरना भी है. वही ऐसी स्थिति में नए पदों पर भर्ती के मौके तैयार होते हैं, जिससे युवाओं को भी सरकारी सेवा में जाने का मौका मिल पाता है.

अवैध बाइक रेंटल प्रतिष्ठानों पर परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन, कई प्रतिष्ठान कराए बंद

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देहरादून में अवैध बाइक रेंटल प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के दौरान परिवहन विभाग की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा.

देहरादून: राजधानी देहरादून क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित बाइक रेंटल प्रतिष्ठानों के खिलाफ परिवहन विभाग द्वारा सख्त एक्शन लिया गया. जिसके तहत रेलवे स्टेशन के पास कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई. साथ ही अवैध रूप से चल रहे प्रतिष्ठानों को मौके पर ही बंद कराया गया. कार्रवाई के दौरान प्रतिष्ठान स्वामियों और स्थानीय व्यापारियों द्वारा टीम का विरोध किया गया. प्रतिष्ठान स्वामियों और स्थानीय व्यापारियों की परिवहन विभाग की टीम के साथ नोकझोंक भी हुई और धरना भी दिया गया. लेकिन टीमों द्वारा अपनी कार्रवाई जारी रखी गई.

टीम को मिली ये अनियमितताएं

  • वाहनों का लाइसेंस में दिए गए स्थान से अलग-अलग स्थान पर पार्क किया जाना
  • बिना लाइसेंस के वाहनों का संचालन करना
  • निजी (गैर-परिवहन) वाहनों का वाणिज्यिक उपयोग करना
  • लाइसेंस में दिए गए पते से अलग-अलग स्थान पर प्रतिष्ठान संचालित करना
  • संस्थान द्वारा प्रतिदिन किराए पर दिए जाने वाले वाहनों का अभिलेख न रखा जाना
  • संचालन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाएं यथा पार्किंग, स्वागत कक्ष, शौचालय आदि न होना
  • संस्थान में लाइसेंस प्रदर्शित न होना
  • संस्थान में शिकायत एवं सुझाव पुस्तिका/पेटी न होना

टीमों द्वारा अनियमितता पाए जाने पर मोटरयान वाहन अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. कार्रवाई के दौरान प्रतिष्ठान स्वामियों में हड़कंप मच गया. लेकिन टीमों ने विरोध के बाद भी अपनी कार्रवाई जारी रखी. प्रवर्तन आरटीओ अनीता चमोला ने बताया है कि सभी रेंटल बाइक संचालकों को स्पष्ट किया गया कि वह नियम अनुसार प्रतिष्ठान का संचालन करें.

अवैध रूप से रेंटल मोटर साइकिल का संचालन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. आम जनता की सुरक्षा, मोटरयान अधिनियम के प्राविधानों का पालन कराया जाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है. साथ ही आगे भी इस सम्बन्ध में अवैध रूप से संचालित व अनियमितता करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी.

श्रीनगर के नौगाम थाने में भीषण विस्फोट, 9 की मौत; 27 घायल, एक दर्जन से अधिक वाहन स्वाहा

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श्रीनगर की रात फिर दहल उठी। शुक्रवार देर रात करीब 11:20 बजे नौगाम पुलिस थाने में अचानक ऐसा धमाका हुआ कि जैसे पूरी वादी ने एक ही धड़कन में डर को महसूस किया। विस्फोट इतना तीव्र था कि इसकी आवाज़ राजबाग, पुराना सचिवालय, छानपोरा, सनतनगर, रावलपोरा और पंथा चौक जैसे सात किलोमीटर दूर तक के इलाकों में सुनाई दी।

धमाके के तुरंत बाद लगी आग ने थाने परिसर में खड़ी एक दर्जन से अधिक गाड़ियों को चंद ही मिनटों में खाक में बदल दिया। धुएँ और आग की लपटों के बीच मची अफरा-तफरी में कम से कम नौ लोगों की जान चली गई, जबकि 27 लोग—जिनमें बड़ी संख्या पुलिसकर्मियों की है—घायल हो गए। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सैंपलिंग के दौरान धमाके की आशंका

प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि हाल ही में पकड़े गए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले में जब्त किए गए भारी मात्रा के विस्फोटकों की सैंपलिंग के दौरान हादसा हुआ हो सकता है।

लेकिन—और यही वह जगह है जहाँ सवाल उठते हैं—अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया।

थाने में बरामद 2,900 किलो विस्फोटक की पूरी खेप मौजूद थी या उसका कुछ हिस्सा—यह भी साफ नहीं है। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि सुरक्षा मानकों के बीच ऐसी चूक कैसे हो गई।

इलाका सील, रातभर चला बचाव अभियान

धमाके के तुरंत बाद पुलिस ने नौगाम थाना क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया। सभी मुख्य रास्तों पर नाकाबंदी कर दी गई और किसी को भी घटनास्थल की ओर बढ़ने नहीं दिया गया। रातभर दमकल और बचाव दल आग पर काबू पाने और मलबा हटाने में जुटे रहे।

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील बरामदगी को थाने परिसर में ही रखने के पीछे क्या मजबूरी थी? और अगर सैंपलिंग हो भी रही थी तो सुरक्षा प्रोटोकॉल का स्तर क्या था?

सीएम धामी ने किया ऐतिहासिक गौचर मेले का शुभारंभ, जानिये क्या है इसका इतिहास

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चमोली गौचर मेले में सात दिनों तक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा.

देहरादून: उत्तराखंड के ऐतिहासिक गौचर मेला का शुभारंभ हो गया है. सीएम धामी ने आज चमोली गौचर मेले का उद्घाटन किया. गौचर मेला सात दिन चलेगा. इन सात दिनों में गौचर मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम व खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. मेले के दौरान गौचर बाजार और क्षेत्र का विशेष सौंदर्यीकरण, नगर में पार्किंग, परिवहन, साफ-सफाई एवं सुरक्षा के सभी इंतेजाम किये गये हैं.

बता दें कि गौचर मेला लंबे समय से आयोजित होता आ रहा है. किसी जमाने में इसे उत्तराखंड का सबसे बड़ा मेला माना जाता था.यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती थी. इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए उत्तराखंड के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से कलाकार और खिलाड़ी गौचर पहुंचते थे. इसके साथ ही यहां का कृषि मेला भी देश भर में प्रसिद्ध था. मेले में बीते वर्षों में लाई गई लौकी और मूली की लंबाई देखकर मेला देखने आए लोग अचंभित रह जाते थे.गौचर मेला ऐतिहासिक व्यापारिक मेले के रूप में जाना जाता है.जिसमें जिले को लोग बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं.

गौचर मेले की शुरुवात तिब्बत की सीमा से लगने वाले 2 जनपदों पिथौरागढ़ व चमोली मे भोटिया जनजाति के लोगों की पहल पर शुरू हुआ. गौचर मेला उत्तराखंड के चमोली जनपद में जीवन की रोजमर्रा की आवश्यकताओं का हाट बाजार और यह हाट बाजार धीरे-धीरे मेले के रूप में परिवर्तित हो गया.

चमोली जनपद में नीती माणा घाटी के जनजातीय क्षेत्र के प्रमुख व्यापारी एवं जागरूक जनप्रतिनिधि स्वर्गीय बाल सिंह पाल,पान सिंह बमपाल , एवं गोविंद सिंह राणा ने चमोली जनपद में भी इसी प्रकार के व्यापारिक मेले के आयोजन का विचार प्रतिष्ठित पत्रकार एवं समाजसेवी स्वर्गीय गोविंद सिंह नोटियाल के समक्ष रखा, गढ़वाल के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के सुझाव पर 1943 में गौचर में व्यापारिक मेले के आयोजन की शुरुवात की गई,बाद में धीरे-धीरे गौचर मेले ने औद्योगिक एवं सांस्कृतिक रूप धारण कर लिया.

बिहार चुनाव में एनडीए की जीत विकास-केंद्रित नीतियों की जीत है: महाराज

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देहरादून। प्रदेश पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने बिहार में एनडीए की जीत को मोदी सरकार के विकास और राज्य में डबल इंजन सरकार की सफलता की जीत बताया है।

कैबिनेट मंत्री श्री महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह और सभी सहयोगी दलों को बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एनडीए ने विकास-केंद्रित नीतियों पर जोर दिया, जिससे बिहार में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में सुधार हुआ। महिलाओं को 10,000 रुपये की सीधी मदद और अन्य कल्याणकारी योजनाओं ने महिलाओं में भरोसा जगाया और उन्हें एनडीए के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि एनडीए का मजबूत गठबंधन और सही सामाजिक समीकरण ने वोटों को बंटने से रोका और एनडीए को निर्णायक बढ़त दिलाई।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व और उनकी विकास नीतियों ने राज्य में स्थिरता और विकास को बढ़ावा दिया। केंद्र सरकार की सहायता ने राज्य में विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद की। इन कारणों से एनडीए को बिहार में प्रचंड बहुमत मिला और मोदी सरकार के विकास की जीत हुई।

उत्तराखंड में खुलेगा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, सरकार ने शुरू की प्रक्रिय़ा

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राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र खुलने से ब्लॉक और जिला स्तर पर रोगों की रोकथाम और उपचार पर बेहतर निगरानी की जा सकेगी.

देहरादून: उत्तराखंड सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दे रही है. जिससे लोगों को आसानी से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके. इसी क्रम में अब उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग, प्रदेश में संचारी एवं गैरसंचारी रोगों की रोकथाम के साथ ही इन रोगों का समय पर पहचान के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र खोलने का निर्णय लिया है. इसके लिए राज्य सरकार ने प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र खुलने से ब्लॉक और जिला स्तर पर रोगों की रोकथाम और उपचार पर बेहतर निगरानी की जा सकेगी.

देशभर में तेजी से फैल रहे संचारी एवं गैर संचारी रोग एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. जिसको देखते हुए भारत सरकार की राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी) की ओर से संचारी एवं गैरसंचारी रोगों के नियंत्रण पर रिसर्च करने के साथ ही इलाज के लिए दिशा निर्देश जारी करता रहा है. ऐसे में अब एनआईसीडी, संचारी एवं गैरसंचारी रोगों की निचले स्तर पर मॉनिटरिंग किए जाने को लेकर देश भर के सभी राज्यों में रोग नियंत्रण केंद्र स्थापित करने की योजना तैयार की है. जिसको देखते हुए उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साथ ही देहरादून में केंद्र खोलने के लिए जगह चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है.

दरअसल, बदलते मौसम के बीच संचारी रोगों से ग्रसित मरीजों की संख्या में काफी तेजी से उछाल देखा जाता है. संचारी रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है. संचारी रोगों की बात करें तो, इसमें सर्दी जुकाम, फ्लू, एचआईवी एड्स, खसरा और हेपेटाइटिस ए, बी, और सी, टाइफाइड, मलेरिया, डेंगू, टीबी, हैजा शामिल है. इसी तरह गैरसंचारी रोगों में हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हृदय रोग, कैंसर, सांस से संबंधित रोग अस्थमा एवं क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी शामिल हैं. ऐसे में इन रोगों की की रोकथाम और जांच पर निगरानी, राष्ट्रीय रोग केंद्र के जरिए की जाएगी. जिससे सरकार के पास इन बीमारियों से ग्रसित मरीजों का डाटा भी तैयार हो जाएगा.

उत्तराखंड सचिव स्वास्थ्य आर. राजेश कुमार ने कहा प्रधानमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत राज्य में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र बनाए जाएंगे. इस केंद्र के बनने के बाद प्रदेश में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाले संचारी रोग एवं गैरसंचारी रोगों की रोकथाम एवं जांच के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने को निगरानी भी की जाएगी. उन्होंने कहा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय में इमरजेंसी ऑपरेशन सेल भी तैयार किया जाएगा. इससे राज्य में आपदा के दौरान और अन्य दुर्घटनाओं के समय में तत्काल इलाज की सुविधा पहुंचाने के लिए समन्वय बनाया जाएगा.

सीएम धामी ने जौलजीबी मेले का किया शुभारंभ, मां के साथ पैतृक गांव भी पहुंचे, शेयर किये अनुभव

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सीएम धामी आज अपने पैतृक गांव पहुंचे. यहां सीएम धामी गांव की पगडंडी पर मां का हाथ पकड़े घूमते नजर आये.

पिथौरागढ़: सीएम पुष्कर धामी एक दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को पिथौरागढ़ पहुंचे हैं. यहां सीएम धामी ने जौलजीबी मेले का शुभारंभ किया. ऐतिहासिक जौलजीबी मेला भारत और नेपाल की साझी संस्कृति का प्रतीक है. काली और गौरी नदी के संगम पर लगने वाले इस मेले ने कुमाऊं क्षेत्र के सबसे बड़े व्यापारिक मेलों के रूप में पहचान बनाई. धीरे-धीरे इस मेले को इतनी प्रसिद्धि मिली कि भारत के शहरों के साथ ही नेपाल और तिब्बत के व्यापारी भी यहां पहुंचने लगे. इस मौके पर डीडीहाट के विधायक फकीर राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र प्रसाद सहित आदि मौजूद रहे.

मेले के शुभारंभ के बाद सीएम धामी पहली बार अपने गांव टुंडी बारमौ पहुंचे. यहां सीएम धामी गांव की पगडंडी पर मां का हाथ पकड़े घूमते नजर आये. इस दौरान सीएम धामी ने इस दौरान गांव के लोगों से भी बातचीत की है.

सीएम ने सोशल मीडिया पर भी अपनी इस यात्रा को लेकर पोस्ट किया. सीएम धामी ने लिखा-

आज सुबह मां के साथ अपने पैतृक क्षेत्र कनालीछीना के टुंडी–बारमौं पहुंचना मेरे लिए बेहद भावुक क्षण था यह वही धरा है जहां मैंने बचपन बिताया, पहली बार विद्यालय की राह पकड़ी और जहां गांव के स्नेह, संस्कृति और परम्पराओं की समृद्ध छाया ने मेरे व्यक्तित्व को आकार दिया. गांव पहुंचते ही बुजुर्गों का स्नेह आशीर्वाद और मातृशक्ति का अथाह प्रेम मन को भावनाओं से भर गया. कई बुजुर्ग आज भी मुझे बचपन के नाम से पुकारते हैं. यह अपनत्व शब्दों में समाना मुश्किल है. नौनिहालों और युवाओं की मुस्कुराहटों में वह सारी स्मृतियां फिर जीवंत हो उठीं, जिन्होंने मुझे मूल्य सिखाए और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

पैतृक गांव में सीएम धामी ने ब्रह्मचारी मंदिर में पूजा-अर्चना की. सीएम धामी ने इसी गांव के प्राथमिक स्कूल से तीसरी तक की पढ़ाई की है. बाद में उनका परिवार यहां से खटीमा चला गया. इस मेले में भारत और नेपाल के व्यापारी पारंपरिक कपड़े, ऊनी सामान, जड़ी-बूटियां और हस्तशिल्प बेचते हैं.

गांव की यात्रा के बारे में सीएम धामी ने लिखा-

हर चेहरा अपना लगा हर आंगन स्मृतियों से भरा और हर कदम बचपन की गलियों से होकर गुजरता हुआ महसूस हुआ. टुंडी–बारमौं मेरे लिए सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि मेरी जड़ें, संस्कार और मेरी पहचान है।आप सभी का स्नेह मेरे लिए शक्ति, प्रेरणा और जिम्मेदारी है. आज का दिन हमेशा हृदय में अंकित रहेगा. आपका प्रेम और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, जो हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा.

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

बता दें सीएम धामी दो दिन की कुमाऊं यात्रा पर हैं. सीएम ने इस दौरान कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. साथ ही सीएम धामी कुमाऊं को कई सौगात भी दे रहे हैं.