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Himalaya Diwas Himalaya Day :हिमालय दिवस कपोल काल्पनिक विचारधारा नहीं हिमालय जैसे अटल निर्णय जरुरी

हिमालय दिवस Himalaya Diwas Himalaya Day देश-दुनिया की जुबान पर कुछ वर्षों से ही चढ़ा है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर बीते पांच-छह वर्षों से हिमालय के सरोकार पर चर्चा और बचाने का संकल्प मजबूत किये जाने का राग अलापा जाता है। उत्तराखंड का हिमालय के प्रति सजग रहना भविष्य के लिए उतना ही उपयोगी हो सकता है जितना राज्य के लिए जरुरी है ऐसे अवसर हमारे लिए भविष्य का ब्लू प्रिंट चुनौती से पार कैसे पाए उनको लेकर विचार मंथन आवश्यक है।

हर साल हिमालय दिवस नो सितम्बर को मनाया जाता है बड़े बड़े होटलो में आयोजित होते कई सामाजिक संस्था से लेकर हिमालय प्रेमी एक दिवस में भविष्य की उम्मीद पर खरा उतर जाने का मसौदा तैयार करते है फिर साल भर उसके बारे में सोचा जाता है लेकिन क्या हम अपनी सामाजिक जिम्मेदारी सही से निभा रहे है इसके लिए आज के बदलते परिवेश में बहुत कुछ सोचने की जरुरत है।

हिमालय दिवस पर कई ऐसी संस्था से लेकर लोगो की विचारधारा महज अपने मतलब पुरे किये जाने की दिशा में आगे बड़ी है जिसका परिणाम आने वाले भविष्य के लिए बड़ा खतरा हो सकता है सामाजिक संस्था से लेकर हिमालय के प्रति अपनी कपोल काल्पनिक विचारधारा को सिर्फ अपने लिए धन उपर्जन उपयोग करने वाले एक दिन ऐसे आयोजन करते है लेकिन उनको भविष्य के लिए क्या क्या करना था उसकी पूर्ति नहीं करते।

उत्तराखंड हिमालय राज्य होने के नाते अपनी भविष्य की योजनाओं से लेकर सरकारी धन को ठिकाने लगाने तक का अवसर नहीं बने इसको लेकर प्रयास सबको मिलकर करना होगा तभी ऐसे आयोजन सफल हो पायगे जिसको पूरा करने का सपना ऐसे दिवस पर सजोया जाता है चलिए आज इस दिवस पर कुछ नया संकल्प लेकर हिमालय जैसे अटल निर्णय लेते है ताकि भविष्य की नयी पीढी सुरक्षित रहे।

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