2027 चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, कई राज्यों में बदली कमान
नई दिल्ली/देहरादून। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। भाजपा ने 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से 23 सितंबर 2026 को जारी नियुक्तियों के बाद कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां बदली गई हैं।
भाजपा के इस संगठनात्मक फेरबदल में खास तौर पर उन राज्यों पर ध्यान दिखाई देता है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में अगले विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी निर्वाचन आयोग ने नहीं की है।
उत्तराखंड की कमान राम माधव को
उत्तराखंड में भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। राम माधव को उत्तराखंड के साथ तमिलनाडु की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
उत्तराखंड में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब प्रदेश भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। नई टीम के सामने संगठन और चुनावी तैयारियों के बीच समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होगी।
यूपी से पंजाब तक बदली संगठनात्मक जिम्मेदारियां
भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे में उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है। उनके साथ चार सह-प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। पंजाब में सतीश पूनिया को प्रभारी बनाया गया है, जबकि गोवा की जिम्मेदारी भारती प्रवीण पवार को दी गई है। मणिपुर में राजदीप रॉय को प्रभारी बनाया गया है।
वहीं हरियाणा और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को दी गई है। तेलंगाना और पश्चिम बंगाल का प्रभार सुनील बंसल को मिला है। महाराष्ट्र की जिम्मेदारी बैजयंत जय पांडा को सौंपी गई है।
चुनावी राज्यों में संगठन पर फोकस
2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों के साथ हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, हालांकि इन दोनों राज्यों में चुनाव वर्ष के बाद के हिस्से में होने हैं।
ऐसे में भाजपा का ताजा संगठनात्मक फेरबदल आने वाले चुनावों से पहले राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर रणनीति पर नजर
भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बीच पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि पार्टी ने किसी विशेष राज्य में नाराज या किनारे किए गए नेताओं के लिए कोई औपचारिक “डेटा बैंक” तैयार किया है। ऐसी बातों को पार्टी की आधिकारिक रणनीति के रूप में प्रस्तुत करने के लिए पुष्ट स्रोत की जरूरत होगी।
संगठन में बदलाव के साथ आने वाले महीनों में राज्यों में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, बूथ स्तर की तैयारियों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर पार्टी का फोकस बढ़ सकता है।
एंटी-इनकंबेंसी पर भाजपा की नजर?
जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां सरकार के कामकाज और संगठन के बीच समन्वय चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। वहीं पंजाब जैसे राज्य में भाजपा विपक्ष की भूमिका में है, इसलिए वहां पार्टी की रणनीति का स्वरूप अलग होगा।
इस लिहाज से सभी राज्यों को एक ही राजनीतिक कसौटी पर देखना उचित नहीं होगा। अलग-अलग राज्यों में सत्ता की स्थिति, संगठनात्मक आधार, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी समीकरण अलग हैं।
2027 की तैयारी में बदली संगठनात्मक टीम
भाजपा की नई नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी धीरे-धीरे तेज हो रही है। नई टीमों के सामने राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संगठनात्मक समन्वय, कार्यकर्ता संपर्क और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
उत्तराखंड में राम माधव, अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज की नई टीम से लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े चुनावी राज्यों में किए गए बदलावों तक, भाजपा का संगठनात्मक ढांचा अब 2027 की चुनावी तैयारी के लिहाज से नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।

