NHAI का बड़ा फैसला: 500 करोड़ से अधिक की हाईवे परियोजनाओं में AI-MC तकनीक होगी अनिवार्य

0
2

NHAI का बड़ा कदम: अब हाईवे निर्माण में AI-MC तकनीक होगी अनिवार्य, बढ़ेगी सड़कों की गुणवत्ता

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब 20 किलोमीटर से अधिक लंबाई और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में ऑटोमेटेड एंड इंटेलिजेंट मशीन-एडेड कंस्ट्रक्शन (AI-MC) तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

NHAI द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को परियोजना की शुरुआत से लेकर पूरे निर्माण क्षेत्र में लगातार AI-MC तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। इस पहल का उद्देश्य सड़क निर्माण की गुणवत्ता, पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत बनाना है।

क्या है AI-MC तकनीक?

AI-MC (Automated & Intelligent Machine-Aided Construction) एक आधुनिक तकनीक आधारित निर्माण प्रणाली है, जिसमें सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली भारी मशीनों जैसे ग्रेडर, पेवर, कॉम्पैक्टर और डोजर में सेंसर, कंप्यूटर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाते हैं।

यह तकनीक निर्माण कार्य की रियल-टाइम निगरानी करती है, जिससे सड़क की गुणवत्ता, मोटाई, समतलता और निर्माण मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही निर्माण के प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होता है।

किन चरणों में होगा AI-MC का उपयोग?

NHAI के निर्देशों के अनुसार हाईवे निर्माण की सभी प्रमुख परतों में AI-MC तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

  • एम्बैंकमेंट (Embankment): सड़क की ऊंची आधार संरचना।
  • सबग्रेड (Subgrade): सड़क की नींव के रूप में तैयार की जाने वाली सघन मिट्टी की परत।
  • ग्रैन्युलर सब-बेस (GSB): सड़क की शुरुआती आधार परत, जिसमें क्रश्ड स्टोन, रेत और बजरी का उपयोग किया जाता है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि तकनीक का उपयोग केवल किसी एक हिस्से में नहीं, बल्कि पूरी परियोजना के निर्माण क्षेत्र में लगातार किया जाना अनिवार्य होगा।

सड़क निर्माण में क्या होंगे फायदे?

AI-MC तकनीक लागू होने से:

  • निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी।
  • निर्माण कार्य की सटीकता और एकरूपता बढ़ेगी।
  • परियोजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग आसान होगी।
  • गुणवत्ता संबंधी शिकायतों और विवादों में कमी आएगी।
  • सड़कों की टिकाऊ क्षमता बढ़ेगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में हुआ था पहला प्रयोग

जानकारी के अनुसार AI-MC तकनीक का प्रयोग पहली बार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना में किया गया था। हालांकि उस समय इसका उपयोग सीमित स्तर पर किया गया था। अब NHAI ने बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में इस तकनीक को पूरी निर्माण प्रक्रिया और पूरे प्रोजेक्ट क्षेत्र में लागू करना अनिवार्य कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में सड़क निर्माण को अधिक तकनीक-संचालित, पारदर्शी और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here