बालिका गृह में 14 वर्षीय किशोरी की हत्या, पानी से भरी बाल्टी में सिर डुबोने का आरोप
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां 14 वर्षीय किशोरी शिवानी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि बाल गृह में रहने वाली दो किशोरियों ने कथित तौर पर पानी से भरी बाल्टी में उसका सिर डुबोकर हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
बाथरूम में अचेत मिली किशोरी
जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे चैतन्य विहार स्थित राजकीय बाल गृह के कमरा नंबर-5 के बाथरूम में शिवानी अचेत अवस्था में मिली। बाल गृह की प्रभारी अधीक्षिका प्रगति खरे ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी सीपी सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने मौके का निरीक्षण किया। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि किशोरी की मौत पानी से भरी बाल्टी में सिर डुबोने से हुई है।
एसएसपी श्लोक कुमार के अनुसार, बाल गृह में रह रही दो किशोरियों की हत्या में प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने आई है। वहीं तीन अन्य किशोरियों की भूमिका भी जांच में उजागर हुई है। कुछ और किशोरियां भी जांच के दायरे में हैं।
सीसीटीवी कैमरे तोड़ने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित किशोरियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बाल गृह में लगे सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाने और उन्हें तोड़ने का प्रयास भी किया। इससे मामले को और गंभीर माना जा रहा है।
प्रशासनिक संरक्षण में रह रही थी शिवानी
मृतक किशोरी शिवानी मूल रूप से बरेली की रहने वाली थी। बताया गया कि उसकी मां की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसे प्रशासनिक संरक्षण के तहत राजकीय बाल गृह में रखा गया था।
न्यायिक जांच के आदेश
जिलाधिकारी सीपी सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है। इसके लिए जिला जज को पत्र भेजा गया है। पुलिस हत्या के पीछे के कारणों, आपसी विवाद और बाल गृह की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
राजकीय बाल गृह जैसी संवेदनशील संस्था में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाल संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी बहस शुरू हो गई है।

