समाधान दिवस में सुनी गई दिव्यांग की फरियाद, डीएम के निर्देश पर मिली पेंशन और व्हीलचेयर

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दिव्यांग सुनील चंद्र को व्हीलचेयर उपलब्ध कराते अधिकारी

देहरादून। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। लंबे समय से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित अपर नत्थनपुर निवासी सुनील चंद्र को अब दिव्यांग प्रमाण पत्र, मासिक दिव्यांग पेंशन, बैंक खाता और निःशुल्क व्हीलचेयर की सुविधा मिल गई है।

29 जून को आयोजित समाधान दिवस में सुनील चंद्र व्हीलचेयर के सहारे किसी तरह पहुंचे और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि वह बेहद गरीब हैं, शारीरिक रूप से असमर्थ हैं और आज तक उनका दिव्यांग प्रमाण पत्र नहीं बन पाया है, जिसके कारण उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा।

सुनील की बात सुनते ही जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि सुनील को उसी दिन कोरोनेशन अस्पताल ले जाकर मेडिकल जांच कराई जाए और दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किया जाए। साथ ही समाज कल्याण विभाग को आय प्रमाण पत्र बनवाकर पेंशन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए।

एक ही दिन में शुरू हुई कार्रवाई

जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें सुनील चंद्र को 45 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित किया गया। इसके बाद उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। तहसील प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से उनका आय प्रमाण पत्र भी तैयार कराया गया।

विभागीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगस्त 2026 से दिव्यांग पेंशन स्वीकृत कर दी गई।

घर पहुंचकर खोला गया बैंक खाता

कार्रवाई के दौरान पता चला कि सुनील चंद्र का कोई बैंक खाता नहीं है। ऐसे में पेंशन राशि भेजना संभव नहीं था। जिला प्रशासन ने तत्काल इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक से संपर्क किया। बैंक कर्मी स्वयं सुनील के घर पहुंचे और उनके घर पर ही बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी की।

मिली नई व्हीलचेयर

समाज कल्याण विभाग ने न केवल पेंशन स्वीकृत की, बल्कि सुनील चंद्र को निःशुल्क व्हीलचेयर भी उपलब्ध कराई। इससे उनके दैनिक जीवन और आवागमन में काफी सहूलियत मिलेगी।

भावुक हुए सुनील

सरकारी मदद मिलने के बाद सुनील चंद्र ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि सरकारी सहायता तक पहुंचना मुश्किल है, लेकिन अब उन्हें महसूस हुआ है कि प्रशासन वास्तव में जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर है।

यह मामला प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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