शिक्षा मंत्री के नाम से वायरल पत्र पर उठे सवाल, अटैचमेंट व्यवस्था खत्म करने के दावों के बीच नया विवाद|Bhadas4india

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अटैचमेंट खत्म करने के दावों के बीच शिक्षा मंत्री के नाम से वायरल पत्र, शिक्षा विभाग पर उठे नए सवाल

अटैचमेंट खत्म करने के दावों के बीच शिक्षा मंत्री के नाम से वायरल पत्र, शिक्षा विभाग पर उठे नए सवाल

बागेश्वर। उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में संबद्धीकरण (अटैचमेंट) व्यवस्था समाप्त करने के दावों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नाम से जारी एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की नीतियों और उनके क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

वायरल हो रहे पत्र में मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) बागेश्वर को निर्देशित करते हुए लिखा गया है कि “कृपया अनुरोध के अनुसार कार्ययोजित करें।” पत्र के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार बागेश्वर जिले के करुली गांव निवासी जानकी देवी ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर अपने पुत्र त्रिलोक सिंह के संबंध में अनुरोध किया था। पत्र में उन्होंने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए कहा कि उनके पुत्र त्रिलोक सिंह वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज शामा में लिपिक पद पर कार्यरत हैं और घर से विद्यालय की दूरी अधिक होने के कारण उन्हें बीईओ कार्यालय कपकोट में संबद्ध (अटैच) किया जाए।

बताया जा रहा है कि इसी अनुरोध के संदर्भ में शिक्षा मंत्री के नाम से जारी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। हालांकि पत्र की आधिकारिक पुष्टि और उसके आधार पर विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग लंबे समय से विद्यालयों में अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त करने और शिक्षकों तथा कर्मचारियों को मूल तैनाती स्थल पर कार्य करने के निर्देश देने की बात कहता रहा है। ऐसे में इस तरह के पत्र के वायरल होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि पत्र वास्तविक है तो यह सरकार की घोषित नीति और जमीनी अमल के बीच अंतर को उजागर कर सकता है, वहीं यदि पत्र भ्रामक या अधूरा है तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर शिक्षा विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर बहस का विषय बन गया है।

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