कालाढूंगी में साहित्य का महाकुंभ: ‘अभिव्यंजना 5.0’ में युवाओं को मिला सृजन और राष्ट्र निर्माण का संदेश
कालाढूंगी (नैनीताल): उत्तराखंड की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नई ऊर्जा देने वाले वार्षिक साहित्यिक अधिवेशन ‘अभिव्यंजना 5.0’ का आयोजन कालाढूंगी में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में युवा साहित्यकारों, कवियों, रचनाकारों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कवि और साहित्यकार समाज की चेतना के संवाहक, विचारों के मार्गदर्शक और परिवर्तन के प्रेरणास्रोत होते हैं। उनकी रचनाएं केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति होती हैं, जो संवेदनाओं को स्वर देने और समय के यथार्थ को सामने लाने का कार्य करती हैं।
इस अवसर पर कहा गया कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से साहित्य, संस्कृति और सृजन की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। यहां की साहित्यिक धरोहर आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जोड़ने का कार्य कर रही है। साहित्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनकर युवाओं को एक सशक्त भविष्य की ओर प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में देश के सुप्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास, प्रख्यात साहित्यकार एवं पद्मश्री अशोक चक्रधर तथा वीर रस के प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। वक्ताओं ने साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रवाद और युवा शक्ति की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
‘अभिव्यंजना 5.0’ केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं बल्कि युवा पीढ़ी को सृजन, संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ने का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में कविता पाठ, साहित्यिक संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से साहित्य प्रेमियों को नई प्रेरणा मिली।
उत्तराखंड में आयोजित इस तरह के साहित्यिक आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के साथ-साथ नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान कर रहे हैं।

