निवेश प्रस्तावों में देरी पर मुख्य सचिव सख्त, सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाने के निर्देश
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में सिंगल विंडो के अंतर्गत निवेश से संबंधित राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति की 65वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रस्तावों की समीक्षा की गई तथा नए निवेश प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जनपद स्तर पर धारा 143 (भूमि उपयोग परिवर्तन) एवं धारा 154 से संबंधित मामलों के निस्तारण में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंगल विंडो प्रणाली के अंतर्गत आने वाले मामलों का समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को बेहतर और पारदर्शी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत विभिन्न विभागों से मिलने वाली स्वीकृतियों और क्लीयरेंस के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने सचिव उद्योग को भी निर्देश दिए कि लंबित मामलों में देरी के लिए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत बनाने के लिए प्रथम एवं द्वितीय चरण के सभी लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाना जरूरी है। निवेश परियोजनाओं में अनावश्यक देरी राज्य के औद्योगिक विकास को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें।
बैठक में निवेश संबंधी विभिन्न प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया तथा उद्योग विभाग द्वारा स्वीकृत नए निवेश प्रस्तावों को समिति की संस्तुति प्रदान की गई।
बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. वी. षणमुगम, सी. रविशंकर, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव सौरभ गहरवार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

