2027 चुनाव में भाजपा सांसदों की होगी असली परीक्षा!
23 हारी विधानसभा सीटों पर जीत दिलाने की जिम्मेदारी सांसदों के कंधों पर
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सांसदों को दिया स्पष्ट संदेश— जमीन पर उतरकर करनी होगी मेहनत
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन इस बार पार्टी की असली परीक्षा सिर्फ विधायकों या संगठन की नहीं, बल्कि प्रदेश के सांसदों की भी मानी जा रही है। भाजपा जिन 23 विधानसभा सीटों पर पिछला चुनाव हारी थी, वहां जीत का जिम्मा अब सांसदों के कंधों पर रखा गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे के दौरान संगठनात्मक बैठकों में 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर गहन मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ संकेत दिए कि 2022 विधानसभा चुनाव में जिन 23 सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, वहां जीत सुनिश्चित करना अब राज्यसभा और लोकसभा सांसदों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
इन सीटों पर सांसदों को अपने राजनीतिक अनुभव, संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ का परिचय देना होगा। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व सांसदों की राजनीतिक सक्रियता और क्षेत्रीय पकड़ को भी इसी कसौटी पर परखेगा।
भाजपा ने यमुनोत्री, बदरीनाथ, प्रतापनगर, चकराता, ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, खानपुर, मंगलौर, लक्सर, हरिद्वार ग्रामीण, धारचूला, पिथौरागढ़, द्वाराहाट, अल्मोड़ा, लोहाघाट, हल्द्वानी, जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता और खटीमा जैसी सीटों पर विशेष रणनीति बनाने का फैसला किया है। इन क्षेत्रों में संगठन की ओर से पूर्णकालिक कार्यकर्ता भी तैनात किए जाएंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 चुनाव में इन सीटों का प्रदर्शन ही तय करेगा कि सांसद अपनी राजनीतिक जमीन कितनी मजबूत बनाए रख पाए हैं और भाजपा जीत की हैट्रिक के लक्ष्य के कितना करीब पहुंचती है।2027 के चुनावी रण में उत्तराखंड के सांसदों की भूमिका बेहद अहम होने जा रही है… 23 हारी सीटों पर जीत दिलाना ही उनकी राजनीतिक परीक्षा का सबसे बड़ा पैमाना माना जाएगा।

