Tuesday, March 17, 2026
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वाइब्रेंट विलेज योजना: 402 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

वाइब्रेंट विलेज योजना: सीमांत गांवों के विकास के लिए 402 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

उत्तराखंड के सीमांत गांवों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत लगभग 402 करोड़ रुपये के नए विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।

यह निर्णय मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित स्टेट लेवल स्क्रीनिंग कमेटी (SLSC) की समीक्षा बैठक में लिया गया। इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का सर्वांगीण विकास कर उन्हें आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन की दृष्टि से सशक्त बनाना है।

सीमांत गांवों में होंगे बड़े विकास कार्य

मंजूर प्रस्तावों के तहत चयनित सीमांत गांवों में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से

  • पर्यटन हाउसिंग और होमस्टे सुविधाओं का विकास

  • ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करना

  • सड़क संपर्क में सुधार

  • सामाजिक विकास से जुड़े प्रोजेक्ट

  • अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

  • खेल मैदान और युवा गतिविधि केंद्र

  • स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना

  • स्मॉल जिम सेंटर

  • सोलर स्ट्रीट लाइट

  • कृषि और आजीविका से जुड़े विकास कार्य

इन परियोजनाओं के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही गांवों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।

आदर्श गांव बनाने पर जोर

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत होने वाले सभी विकास कार्य पूर्ण पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।

उन्होंने कहा कि इन गांवों का विकास इस तरह किया जाए कि वे आदर्श गांव के मॉडल के रूप में सामने आएं और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बनें।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि योजनाओं से होने वाले आर्थिक बदलाव, रोजगार के अवसर और दीर्घकालिक लाभ का स्पष्ट आकलन तैयार किया जाए, ताकि योजना के प्रभाव का सही मूल्यांकन हो सके।

सीमांत क्षेत्रों को मिलेगा विकास का नया आधार

वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत किए जा रहे ये विकास कार्य सीमावर्ती गांवों को खाली होने से रोकने और वहां के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स माइग्रेशन, पर्यटन विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

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