केदारनाथ समझौता टूट गया

केदारनाथ समझौता टूट गया Kedarnath Poltics Break Congress पंजाब की कांग्रेसी सियासत आपसी गुटबाज़ी के बीज में ऐसे लिपटी हुई नज़र आएगी सोचा नहीं था उत्तराखंड में बाबा केदारनाथ धाम में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू के साथ हाथो में हाथ डालकर जो फोटो नज़र आई थी उसकी हकीकत शनिवार को देखते ही बन रही है पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह को कुर्सी से अलविदा करवाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार के काम काज से नाराज है

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ऐसे समय में मुख्यमंत्री बने है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर सरकार का कार्यकाल महज 90 दिन की सरकार का है पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू बाबा केदारनाथ धाम में सरकार और संघटन में आपसी गुटबाज़ी नहीं होने का सन्देश देने की कोशिश करते हुए सियासत का नया अध्याय शुरू हुआ।

शुक्रवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने की बात को कही लेकिन कांग्रेस भवन तब तक नहीं जाने का ऐलान करते हुए शर्त भी रख दी कि जब तक एडवोकेट जनरल (एजी) व डीजीपी नहीं हटाए जाते तब तक वह कांग्रेस भवन नहीं जाएंगे। कांग्रेस की पंजाब में गुटबाज़ी को हवा देने की आग में घी डालने का काम उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री जो पंजाब के प्रभारी पद पर रहते हुए हरीश रावत ने किया था उसी की बदौलत पंजाब कांग्रेस अभी तक आपसी गुटबाज़ी में जल रही है।

हरीश रावत कांग्रेस को उत्तराखंड में महज दस सीट पर निपटाने का काम 2017 के विधानसभा चुनाव में कर चुके है कांग्रेस को छोड़ कर वो सभी लोग चले गए थे जो हरीश रावत की सरकार को पसंद नहीं करते थे राजनैतिक सियासत में कांग्रेस उत्तराखंड में पूरी तरह खत्म होती हुई नज़र आई क्योकि हरीश रावत उत्तराखंड में सिर्फ अपने चेहरे को आगे करते हुए चुनाव लड़े किच्छा और हरिद्वार दोनों सीट से हरीश रावत चुनाव तो हारे ही कांग्रेस का भी सूपड़ा साफ हो गया।

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