केदारनाथ धाम यात्रा गाइड

उत्तराखंड – भारत के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक है (Kedarnath Dham) केदारनाथ धाम इसकी मान्यता भी बिल्कुल अलग है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम (Lord Shiv Shri Kedarnath Temple) जो की 12 ज्योति लिंगों में से एक है ये उत्तराखंड के चारों धामों में सबसे महत्वपूर्ण धाम मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित इस धाम की समुद्र – तल से ऊंचाई लगभग 3584 मीटर है।

केदारनाथ मंदिर की चढ़ाई गौरी कुंड से शुरू होती है गौरी कुंड में मां पार्वती का भव्य मंदिर है और यहां गर्म पानी का कुंड भी है इसलिए इसे गौरी कुंड कहते हैं। गौरी कुंड में हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। गौरी कुंड से केदारनाथ मंदिर की चढ़ाई 17 किलोमीटर है केदारनाथ की चढ़ाई करते समय केदारनाथ की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटको को इतना आकर्षित कर लेती है की भोलेनाथ के श्रद्धालु को चढ़ाई का पता ही नहीं चलता है। केदारनाथ का मौसम हमेशा ठंडा रहता है इसलिए ठंडी के कपड़े अवश्य लेकर जाएं।

केदारनाथ की चढ़ाई करने वाले हर श्रद्धालु के लिए सुविधा उपलब्ध होती है केदारनाथ मंदिर काफी भव्य है जिसके दर्शन मात्र से ही थकान मिट जाती है केदारनाथ मंदिर में भोलेनाथ का विशाल ‌शिवलिंग है ‌और भोलेनाथ की सवारी कहें जाने वाले नन्दी बैल भी है कहा जाता है की नन्दी बैल के कान में कहीं हुई हर मनोकामना पूर्ण होती हैं और केदारनाथ के दर्शन करने वाले हर श्रद्धालु का जीवन सफल हो जाता है। केदारनाथ की हवा में ही भोलेनाथ के होने का अनुभव होता है एक ना एक बार केदारनाथ के दर्शन सबको करने जाना चाहिए।

   केदारनाथ कैसे जाएं और कहा ठहरे ?

केदारनाथ के लिए हरिद्वार जाना होगा वहां से गौरी कुंड जाना होगा जिसके लिए हर तरह के वाहन की सुविधा उपलब्ध है । केदारनाथ धाम के लिए गौरी कुंड से 17 किलोमीटर का पैदल रास्ता है। केदारनाथ के लिए हैलिकॉप्टर की भी सुविधा हैं पर उसके लिए गौरी कुंड से 7.5 किलोमीटर की दूरी तय करके फांटा जाना होगा हेलिकॉप्टर के लिए बुकिंग ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों तरह से होती है। गौरी कुंड में श्रद्धालु के रहने के लिए होटल व धर्मशाला है – बिड़ला भवन , गुजरात भवन, काली कमली धर्मशाला आदि है। ठहरने के लिए गृह, लोक निर्माण विभाग गेस्ट हाउस भी है।

   केदारनाथ की यात्रा कब शुरू होती है ?

केदारनाथ की यात्रा अप्रेल से मई के बीच शुरू हो जाती है पर केदारनाथ पहाड़ों से घिरा हुआ है इसलिए बर्फबारी कभी भी शुरू होने के कारण ‌यात्रा बन्दं हों जाती है।

केदारनाथ की चढ़ाई करने से पहले डन्डा जरूर लेंले गौरी कुंड से डन्डा मिल जाता है उससे चढ़ाई आसान हो जाती है।

केदारनाथ के आस पास घूमने की जगह ?

चोखाडी़ ताल – केदारनाथ मंदिर से किलोमीटर की दूरी पर प्राकृतिक रूप से बना यह बर्फीला सरोवर दर्शनीय है यहां महात्मा गांधी की अस्थियां प्रवाहित की गई थी इसलिए इसे गांधी ताल भी कहते हैं।

शंकराचार्य समाधि – इस जगह के लिए कहा जाता है कि 8वीं शताब्दी में आदिगुरु शंकराचार्य ने इस धाम में आकर मंदिर के दर्शन करने के बाद 32की आयु में यहीं समाधि ली थी।

त्रियुगीनारायण – गौरी कुंड से 7किमी. पीछे सोनप्रयाग स्टेशन के आगे त्रियुगीनारायण पड़ता है यहां केदारनाथ शैली का शिवमन्दिर स्थापित है।

गुप्तकाशी – केदारनाथ से 50किमी. से दूर है गुप्तकाशी में प्राचीन शिव – पार्वती मंदिर है यहां से चौखंबा शिखर के भव्य दर्शन होते हैं।

वासुकी ताल – वासुकी ताल चौखंबा पर्वत से घिरा हुआ एक बहुत खुबसूरत झील है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 4135 मीटर है वासुकी ताल केदारनाथ से लगभग 9किमी. दूर है इस झील तक पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई करना होगा और अपना खाना- पीना लेकर जाना होगा यह झील काफी खतरनाक है इसलिए यहां बरसात में रोक होती है।

ऊखीमठ – केदारनाथ से 62 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जगह काफी शान्त जगह है जब केदारनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बन्द हो जाता है तब उसकी पवित्र मूर्ति को ऊखीमठ की गद्दी पर प्रतिष्ठित कर दिया जाता है।

देवरिया ताल – केदारनाथ से 68किमी. दूर झील है यहां आस पास बर्फ की चादर रहतीं हैं जिसे देखने में अलग ही आनंद आता है।

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