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Monday, July 4, 2022
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जननायक मुहीम पर भारी कद्दू छुरी वार

जननायक मुहीम पर भारी कद्दू छुरी वार Kaddu Churivaar Jannayak Target 22 देहरादून 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी का आलम यह है कि कांग्रेस चौराहे पर लड़ती नजर आ रही है गुटबाजी की आग में घी डलाने का काम पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अकेले ही अपने दम पर खुद को जननायक साबित करने में जुटे हुए है सोशल मीडिया पर उनकी टीम लगातार हरीश रावत को 2022 का चुनाव उनके नेतृत्व में लड़वाने की पैरवी कर रही है

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस मेड का बड़ा ग्रुप हरीश रावत को किसी भी कीमत पर 2022 में जन नायक के रूप में पसंद नहीं करते कांग्रेस में गुटबाजी की चरम सीमा को लांघा जा चुका है जिसका नतीजा यह है कि अब हरीश रावत खुद को जन नायक साबित करने में जुटे हुए हैं अगर राजनीतिक समीकरण को देखा जाए तो उत्तराखंड में हरीश रावत ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो अपने साथ रहने वालों को कभी भी पनपने नहीं देते जिसका जीता जागता उदहारण उत्तराखंड में देखा जा चूका है

रंजीत रावत हो या फिर किशोर उपाध्याय दोनों ही नेताओं को दरकिनार करने में हरीश रावत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है यही नहीं राजनैतिक जमीन को बंजर करने के लिए हरीश रावत का बड़ा योगदान दोनों नेता कभी भी नहीं भूल सकते जबकि दोनों नेताओं को हरीश रावत का राइट लेफ्ट कन्धा माना जाता था लेकिन आज वो कीप डिस्टेंस अपनाकर अपनी राजनैतिक पारी को आगे बड़ा रहे है

हरीश रावत से किनारा करते हुए उत्तराखंड में कांग्रेसी नेता उनको नेता नहीं मानते आखिर ऐसी क्या वजह है जो हरीश रावत का साथ कोई भी कांग्रेसी नेता देता हुआ नजर नहीं आ रहा जो उनके सबसे करीबी नेताओं में शुमार रहे हैं उन्होंने ही हरीश रावत से किनारा कर लिया है 2017 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत ने खुद को नेता साबित करते हुए चुनाव की वैतरणी को पार करने में कोशिश की थी लेकिन वह इस कोशिश में विफल साबित हुए

कांग्रेस में उत्तराखंड के ऐसे नेता बहुत अधिक संख्या में मौजूद है जो उत्तराखंड की राजनीती में हरीश रावत से दूरी बनाकर अपनी राजनीती का मिजाज चाहते है जिसका सबसे बड़ा कारण हरीश रावत अपने साथ किसी भी नेता को पनपने नहीं देना चाहते थे अब कांग्रेस में आपसी जो विरोध देखने को मिल रहा है वह सब बताता है कि कांग्रेस में गुटबाजी का यही आलम कांग्रेस को 2022 के मिशन में फतह करने के लिए बड़ी चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा

हरीश रावत को उत्तराखंड की राजनीति के सबसे बड़े पद पर उत्तराखंड की सी ऍम कुर्सी पर विराजमान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रंजीत रावत और किशोर उपाध्याय को अब हरीश रावत पसंद नहीं करते आखिर वह क्या वजह है कि जिन कंधों पर हरीश रावत सबसे अधिक भरोसा किया करते थे वही कंधे हरीश रावत से दूरी बना गए हैं ऐसा इन दोनों नेताओं मैं ही देखने को नहीं मिलता और भी दूसरे कई नेता हैं जिन्होंने हरीश रावत को मजबूती देने का काम तो किया लेकिन हरीश रावत ने उन नेताओं को मजबूत ही नहीं दी

जिन नेताओं की बदौलत हरीश रावत सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होने का दम भरते हुए देखे गए थे आज आलम यह है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में जाने से पहले हरीश रावत को इन नेताओं की पसंद में शुमार नहीं किया जाता हरीश रावत भी किशोर उपाध्याय को लेकर लगातार तंज करते रहे हैं बीते दिनों हरीश रावत ने किशोर उपाध्याय को इनडायरेक्टली वे में कद्दू की परिभाषा से परिभाषित किया

हरीश रावत का सोशल मीडिया पर दिया गया वक्तव्य काफी चर्चा में रहा उन्होंने कहा कि कद्दू छुरी पर गिरे या छुरी कद्दू पर कटना दोनों ही दशा में कद्दू को होता है अब इसका क्या अर्थ है जो राजनीति के गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है इससे पहले भी हरीश रावत सांप और नेवले की लड़ाई का जिक्र कर चुके हैं जिसमें उन्होंने हरक सिंह रावत पर तंज कसा था सोशल मीडिया पर इसकी भी काफी चर्चा रही चर्चाओं में रहने वाले हरीश रावत एक बार फिर से उन खंभों को कमजोर करने की कोशिश करते हुए देखे जा रहे हैं जिन खंभों की बदौलत वह सत्ता की कुर्सी पर विराजमान हुए थे कांग्रेस में यह आलम 2022 के लिए एक अच्छा संकेत तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को उत्तराखंड में मिलता हुआ जरूर नजर आ रहा है

पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद से ही लगातार राजनैतिक बैटिंग कर रहे हैं वह जनता से जुड़े हुए मुद्दों पर लगातार फैसले ले रहे हैं टी ट्वैंटी मैच की तर्ज पर पुष्कर सिंह धामी लगातार आखिरी ओवर तक राजनीति छक्कों की बरसात के रूप में कई ऐसे फैसले लेते हुए नजर आ सकते हैं जिसका मकसद जनता से जुड़ा हुआ है

ऐसे में स्वाभाविक है कि भारतीय जनता पार्टी के जो फैसले हैं वह जनता को पसंद आ रहे हैं और शायद यही वजह है कि पुष्कर सिंह धामी का कद उत्तराखंड की सियासत में और अधिक बढ़ा है इसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में भी माना है और युवा मुख्यमंत्री के सहारे भाजपा उत्तराखंड में फिर से फतह करने की तैयारी में जुट गई है 12 साल कांग्रेस की गुटबाजी कहिए आलम कांग्रेस के लिए एक बड़ा खतरे के रूप में सामने है जिसको पार्टनर हरीश रावत के बस की बात नजर नहीं आ रही

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