ज़ी न्यूज़ वाले रोहित सरदाना को आप के रोहित का खुला पत्र

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Jul 09 : नमस्कार Rohit Sardana जी,

 

 

मेरा नाम भी रोहित ही है पर मैं सरदाना नहीं हूँ, व्यवस्था से लड़ता एक आम नागरिक हूँ जो हर ऱोज इस जटिल व्यवस्था की उधेड़बुन से लड़ता हुआ बिना किसी की दलाली कियें व्यवस्था बदलनें की लड़ाई लड़ रहा है. जब देश में अन्ना आंदोलन चल रहा था उस वक्त मैं अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और आप जैसे लोगों को अपनी 3 साल की बेटी को उस भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन में ले जातें हुए कभी-कभी यूटूब के वीडियो के जरियें या फेसबुक के ज़रिये देख रहा था. ज्यादातर छात्रों को पता भी न था कि ये आंदोलन क्या है और किसके ख़िलाफ़ है. कभी-कभी हॉस्टल के कमरें में बैठकर इसकों लेकर चर्चा जरूर कर लेतें थे. कॉलेज खत्म हुआ तो दिल्ली आ गया तब आंदोलन का स्वरुप पार्टी में तब्दील हो गया था और जिस अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को आप बीजेपी समर्थित राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा के ज़ी न्यूज़ चैनल के ज़रिये गाली देतें नहीं थकतें उसका सदस्य बनकर राजनीतिक बदलाव के इस आंदोलन में लग गया था और आज भी लगा हूँ.

 

आपके जैसे लोगों की एकपक्षीय मेहनत और झूठें प्रोपोगंडा के ज़रिये बीजेपी और मोदी की सरकार तो बन गई थी लेकिन उसके बाद भी जिस तरह से एकतरफ़ा रिपोर्टिंग के ज़रिये बीजेपी की केंद्र सरकार की कुरीतियों, उसकी दलित विरोधी, किसान विरोधी, छात्र विरोधी नीतियों एवम् बीजेपी शासित राज्यों के घोटालों के ऊपर आपनें अपनें चैनल के ज़रिये उस पर आज तक पर्दा डालनें का काम किया उसकें लिए आपकें चैनल को साधुवाद देता हूँ.

 

मैनें यूटूब के ज़रिये आपके परम मित्र सहयोगी पत्रकार सुधीर चौधरी का 100 करोड़ दलाली माँगनें वाला स्टिंग देखा जिसकें कारण उन्हें तिहाड़ भी जाना पड़ा, शायद उसके बारें में आपनें अपनी चिट्ठी में जिक्र करना मुनासिब नहीं समझा खैर कोई बात नहीं आपका एकपक्षीय स्वरुप इस तरह की ख़बरों को अपनी डेस्क पर आनें तक नहीं देता और पत्रकारिता में आप जैसें ज़मीर मार चुकें पत्रकारों के लिए जो मोदी जी के साथ एक सेल्फी खिचवानें के चक्कर में अपना और पत्रकारिता का ईमान बेचनें को तैयार हो उनकें लियें कोई बड़ी बात नहीं?

 

मुझे इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि आपको अपनें मालिक सुभाष चंद्रा द्वारा चलाई जा रही फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी के बारें में भी कोई ख़बर होगी. हाँ वो ख़बर तो आपके डेस्क तक पहुँचनें भी नहीं दी गई होगी. आपको इसकी भी तनिक परवाह नहीं रही होगी कि किस तरह किसी युवा के माता-पिता अपनें बेटी या बेटा को पढानें के लिए पैसों का इंतजाम करता है? आपकी तनख्वाह इतनी ज्यादा होगी कि आपकी बिटियाँ की अच्छी पढाई के लिए कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी.

 

अभी हाल में ही राज्यसभा के चुनाव हुए है जिसमें आपके मालिक सुभाष चंद्रा जी राज्यसभा सांसद बनें है. आपनें यह भी शायद न सुना हो की कितनें ही विधायकों ने एक पेन की गलती की वजह से और आपके आदरणीय मोदी जी एवम् कांग्रेस की कृपा से सुभाष जी संसद पहुँच गयें. अब इसमें इतना खर्चा हुआ होगा वह तो सुभाष जी अच्छें से बता सकतें है कभी वक़्त मिलें तो जरूर पूछियेगा. लेकिन उस दिन आपका चैनल सुभाष जी का गुणगान में इस तरह से कशीदें पढनें में लगा हुआ था मेरें जैसें लोगों को जरूर लगा कि सुभाष जी की राजनीतिक प्रतिभा इतनें दिन तक छुपी कैसे रह सकी.

 

आज जिस राष्ट्रवादी पत्रकारिता की दुहाई देकर आपका चैनल ज़ी न्यूज़ एवम् उनके कुछ सहयोगी चैनल और आप जैसे अपनें अंदर की इंसानियत को बेच चुकें पत्रकार दिन-रात बीजेपी और मोदी सरकार की प्रोपोगंडा मशीनरी बन गये है उससें बहुत दुःख होता है. सच कितनी दूर है दर्शक को नहीं पता लेकिन जब एक दिन उसे सच पता चलता है तो उस पर क्या बीतती होगी उससें आपको कोई सरोक़ार नहीं होगा.

 

कभी इंसानियत के नातें अगर वक्त मिलें तो जरूर सोचें भारत माता के वो छोटें बच्चे और हमारें जैसे युवाओ के अंदर अगर आप जैसें पत्रकार नफ़रत भरें, समाज के अंदर दरार डालनें वाली, झूठ को फोटोशॉप करकें सच बतानें वालें, विडियो में अलग से आवाज डालकर पत्रकारिता करेंगें तो आप ही बतायें आप किस माँ के सपनों को बढ़ावा दें रहें है. आप का चैनल और आप की ही तरह आपकें सहयोगी पत्रकार जिस तरह से चीखकर, मिर्च-मशाला लगाकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर, उसमें जाति-मजहबी रंग देकर पत्रकारिता करेंगे तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी आप जैसों को किस नज़रों से देख रहा होगा आपको इस व्यस्तता में पता भी नहीं लग रहा होगा.

 

आपनें बहुत से पत्रकारों के नाम अपनी चिट्ठी में लिखें और उनको अपनी दलाली वाली उस श्रेणी में डालनें के लिए बाध्य किया. जिसकें लिए आप को दुबारा साधुवाद देता हूँ. रवीश का भी पत्र पढ़ा था जिसमें उन्होंने अकबर के नाम पत्र लिखा और बखूबी से लिखा था और यह समझनें का प्रयास किया कि इंसान के विचारों में इतनी तब्दीलियाँ इतनें कम समय में कैसे आ सकती है और उनसें पत्रकारिता की इस दयनीय स्थिति में अपनें लिए सुझाव माँगें थें खैर आपनें अकबर का प्रवक्ता बनकर सवालों के जवाब तो नहीं दिये परंतु बीजेपी के प्रवक्ता की तरह असल सवाल का जवाब न देकर इधर-उधर की बात करनें का भरसक प्रयास किया जिसकें लिए आपको तीसरी बार साधुवाद देता हूँ.

अंत में एकपक्षीय पत्रकारिता एवम् मोदी भक्ति के लिए सरदाना जी अत्यंत शुभकामनाएँ देता हूँ कि आपको अकबर, सुभाष की तरह ज्यादा वक्त का इंतज़ार न करना पड़ें. जवाब में आम आदमी पार्टी के बारें में कुछ झूठें प्रोपोगंडा दिखानें के लिए स्वतंत्र है.

रोहित सिंह संयुक्त सचिव (राष्ट्रीय संगठन निर्माण), आम आदमी पार्टी

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