शराब की दुकानों पर सुप्रीम कोर्ट से उत्तराखंड को राहत

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शराब की दुकानों पर सुप्रीम कोर्ट से उत्तराखंड को राहत Wine shop relief uttrakhand suprim court गदरपुर में शराब की दुकान को लेकर शिक्षा मंत्री पांडेय के पास पंहुचा मामलादेहरादून उत्तराखंड में शराब की दुकानो को लेकर राज्य सरकार के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी खबर मिली है शराब से राज्य सरकार को हो रहे करोड़ो के नुकसान की भर पायी अब होना कुछ हद तक पूरी होना तय माना जा रही है
सूबे के नौ जिलों और सात तहसीलों को हाईवे से पांच सौ मीटर दूरी पर शराब दुकान खोलने के नियम से मिली मुक्ति आबकारी विभाग के लिए बड़ी राहत मानी जा रही। पांच सौ मीटर के दायरे के नियम से आबकारी को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया गया था कि बीते वर्ष आबकारी को 1900 करोड़ का राजस्व मिला था, जो घटकर आधे से भी कम हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग के पांच सौ मीटर के दायरे में शराब दुकानें व बार पर प्रतिबंध से उत्तराखंड को खासा झटका लगा था। इस नए नियम की वजह से आबकारी विभाग को पहले 23 स्थानों पर दुकानें बंद करनी पड़ी। इसके बाद नई दुकानें जहां भी खोली गईं, वहीं जनविरोध ङोलना पड़ा। अब जाकर बामुश्किल स्थिति नियंत्रण में आ रही है। इस वर्ष शराब की दुकानों के लिए जारी किए 503 लाइसेंसों के सापेक्ष 496 दुकानें ही संचालित हो रही हैं। जन विरोध और अन्य कारणों के चलते सात दुकानें अभी भी शुरू नहीं हो पाई हैं।

आबकारी विभाग को हो रही राजस्व हानि को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पूवरेत्तर के राज्यों की भांति ही उत्तराखंड को राष्ट्रीय राजमार्ग के 500 मीटर दायरे से छूट देने की अपील की थी। आबकारी विभाग की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों पूछा था कि छूट क्यों दी जाए। इसके बाद आबकारी विभाग को अपना पक्ष रखा और अदालत को बताया कि सूबे के नौ पर्वतीय जिलों की भौगोलिक स्थिति पूवरेत्तर राज्यों के समान है

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