उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने सरकार पर उठाए सवाल

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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने सरकार पर उठाए सवाल

देहरादून लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना के निर्माण में हो रहे विलंब को लेकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) के अध्यक्ष सुभाष कुमार ने सरकार और शासन पर सवाल उठाए हैं। सुभाष कुमार ने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय से निवेश की अनुमति मिले सात माह हो चुके हैं।
बावजूद इसके मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्तर से वित्तीय अनुमति के लिए भारत सरकार को एक बार भी अनुरोध पत्र नहीं भेजा गया। यानी, राज्य सरकार लखवाड़ को लेकर कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रही है। उन्होंने मुख्य सचिव को सलाह दी है कि जल संसाधन मंत्रालय और कैबिनेट सचिव भारत सरकार के साथ ही प्रधानमंत्री से होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इस मसले को उठाया जाए।
यूईआरसी अध्यक्ष सुभाष कुमार ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा से मुलाकात की थी। सुभाष कुमार के मुताबिक कैबिनेट सचिव ने परियोजना के लिए हरसंभव सहायता का भरोसा दिया था। यूईआरसी की ओर से शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में सुभाष कुमार ने कहा है कि 300 मेगावाट क्षमता की लखवाड़ परियोजना उत्तराखंड के साथ पांच राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश को परियोजना से जल की आपूर्ति होगी, जबकि बिजली पर उत्तराखंड का अधिकार होगा। यह चिंता का विषय है कि वित्तीय स्वीकृति के लिए कोई प्रयास नहीं किए।गौरतलब है कि 29 साल से यह परियोजना मुकाम तक नहीं पहुंच पाई है। यूईआरसी के सचिव नीरज सती ने बताया कि जल संसाधन मंत्रालय से डेढ़ साल में निवेश की मंजूरी मिली। सबसे बड़ी अड़चन दूर होने के बावजूद परियोजना पर काम शुरू न हो पाना चिंताजनक है।
उधर, मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि लखवाड़ परियोजना के संबंध में राज्य विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष के साथ उनकी दूरभाष पर वार्ता हो चुकी है। राज्य सरकार तत्परता के साथ उक्त संबंध में शीघ्र जल संसाधन मंत्रालय को पत्र भेजेगी।

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