उत्तरकाशी ईको सेंसिटिव जोन की हरयाली पर कत्ल की तैयारी

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उत्तरकाशी ईको सेंसिटिव जोन की हरयाली पर कत्ल की तैयारी
UTTARKASHI ECO SENSITIVE ZONE GREEN BELT

देहरादून उत्तरकाशी जिले में ईको सेंसिटिव जोन से गुजर रहे गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई बढ़ाने के लिए आधा दर्जन गांवों की नींद उड़ी हुई है।यही नहीं राज्य में जहा सरकार पोधो को लगा रही है वही ये मामला अब केंद्र सरकार के पाले में चला गया है खबर के अनुसार छह से आठ मीटर चौड़े हाईवे को 18 मीटर करने के लिए देवदार और कैल के साढ़े छह हजार से ज्यादा वृक्षों की कुर्बानी दी जानी है। हालांकि अभी पर्यावरण मंत्रलय ने इसे हरी झंडी नहीं दी है। बावजूद इसके न केवल पर्यावरणविद् चिंतित हैं, बल्कि आधा दर्जन गांवों की नींद भी उड़ी हुई है। गंगोत्री के पास स्थित धराली गांव के कई किसान आशंका जताते हैं कि ‘इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कटे तो भविष्य में भूस्खलन से इन गांवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। गंगोत्री के निकट भैरव घाटी में सड़क काफी संकरी है। भारत-चीन सीमा पर स्थित इस भाग का सामरिक महत्व तो है ही, कपाट खुलने पर लाखों तीर्थयात्री भी गंगोत्री आते हैं। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार चारधाम यात्र मार्ग चौड़ीकरण योजना के तहत हाईवे की चौड़ाई बढ़ा रही है। करीब एक साल पहले भूतल परिवहन मंत्रलय और उत्तराखंड शासन के बीच हुई बैठक के बाद उत्तरकाशी वन प्रभाग से भैरव घाटी में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले वृक्षों पर रिपोर्ट मांगी गई। इसी साल नमामि गंगे के तहत गंगा की स्वच्छता और पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के लिए एक ओर सरकार ने 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर पौध रोपण का लक्ष्य रखा हैं। दूसरी ओर भैरव घाटी में हजारों पेड़ों को काटने के लिए चिह्नित किया है। ऐसे में हिमालयी क्षेत्रों की वन विविधता को ध्यान में रखकर सडकों की चौडाई बढ़ाई जानी चाहिए। सरकार को ऐसे मामलों में पुनर्विचार करना चाहिए। उत्तराखंड नदी बचाओ व रक्षा सूत्र आंदोलन इस मामले को लेकर विरोध कर रहा है

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