उत्तराखंड का राजनैतिक लाहौर नहीं जीत पाई भाजपा की तोपे

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उत्तराखंड का राजनैतिक लाहौर नहीं जीत पाई भाजपा की तोपे
नारायण परगाई
देहरादून भाजपा ने उत्तराखंड में बेकार किया अपना राजनैतिक गोला बारूद जिस तरह खत्म कर दिया है ऐसे में अब उत्तराखंड राज्य में भाजपा को जनता की वोट रूपी तोप से दो चार होना पड़ेगा इसी तरह के राजनैतिक संकेत भाजपा सूत्रों से मिल रहे है जो भाजपा हाई कमान के साथ साथ राज्य की भाजपा के लिए सिर दर्द बन गए है उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार का जिस तरह सर कलम कर यहाँ अपनी राजनैतिक सोच को उजागर किया है तभी से राज्य के भाजपा वर्कर उन रडनीति कारों से नाराज़ हो गए थे जिन की बदौलत भाजपा को पुरे देश की जनता के सामने राजनैतिक हार का स्वाद चखना पड़ा है कांग्रेस उत्तराखंड में सत्ता की जीत के मुद्दे पर भाजपा को जहां देश की जनता के बीच राजनैतिक रूप से मात देने की कोशिश में लग गयी है वही भाजपा के पास उत्तराखंड की राजनैतिक हार का जवाब देने के लिए बिना बारूद की तोप खड़ी नज़र आ रही है
देहरादून भाजपा हाईकमान ने आपरेशन उत्तराखंड के लिए चार्टर प्लेन से लेकर सारे उपकरण मुहैया कराये थे लेकिन कांग्रेस छिन्न – भिन्न नही हो पायी। वहीं संसद, सड़क और कोर्ट में भाजपा को बागी – दागी कांग्रेसियों की शान में कसीदे़ पढ़ने पर मजबूर होना पड़ा। मानों हरीश रावत के चंगुल से इन विधायकों को छुड़ाकर भाजपा ने लाहौर जीत लिया हो ।
अगले साल २०१७ में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा हरीश रावत अगर अपनी मजबूत राजनैतिक सोच से आसानी से मात दे सकती थी । भाजपा हाईकमान ने अपने पूर्व मुख्यमंत्रियों की जगह कांग्रेस में बगावत को तरजी़ह दी और यह चाल उलटी पड़ गयी है। उत्तराखंड राज्य में नेताओं की तिकड़मों को हेय दृष्टि से देखा जाता है और इसी डर से दोनों पार्टियों के नेता निरंतर अपनी चुनावी सीट बदलते रहते हैं। पिछले तीन चुनावों में दोनों पार्टियों के अनेक कैबिनेट मंत्री और भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव में हार का स्वाद देख चुके हैं।

भाजपा ने चुनावी साल में जरुरत से कहीं अधिक गोला – बारुद हरीश रावत की सरकार गिराने के लिए बरबाद किया है। हरीश रावत तिकड़मों में इक्कीस ही साबित हुए हैं। निरंतर देवी – देवताओं का आह्वान करते, देव भूमि में पहाड़ की संस्कृति, आन – बान के साथ कोर्ट से न्याय की गुहार लगाकर पहाड़ी समाज के बीच अपील भी कही न कही जनता के बीच काम आई है । यह सब भाजपा के केंद्रीय पदाधिकारी की समझ से परे है था क्यों की उनकी नज़रो को भाजपा के एक विवादित नेता ने अपनी राजनैतिक दूरबीन से जकड़ा हुआ था ये वही नेता है जो राज्य में विजय बहुगुणा की सरकार में जमीनों के एक घोटाले में दागी है वही कैलाश विजय वर्गी की सरपरस्त्ति पाने वाला कौन भाजपा कार्यकर्त्ता है जिस ने उत्तराखंड में लगभग करोड़ो का भवन बना रहा है सूत्रों के हवाले से खबर है की भाजपा के केंद्रीय अध्य्क्ष अमित शाह व कैलाश विजय वर्गी उस के उद्धघाटन समारोह में शिरकत करने की योजना भी है
हरीश रावत को सीबीआई के झमेले में उलझाने की रणनीति बड़ी सहायक नही है। उत्तराखंड के कुछ बड़े राजनेता सीबीआई के जाल से बिना नुकसान बाहर निकल चुके हैं।इसी तरह हरीश भी केंद्र की सीबीआई से बहार निकल जाएंगे

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