इसको क्यों कहते है उत्तराखंड पुलिस का सिंघम

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देहरादून वो बिकता नहीं सिर्फ टिकता है सिंघम ईमानदारी के बूते उसका मुकबला किया जाना इतना आसान नहीं देहरादून में बीती दिवस जीआरडी वर्ल्ड स्कूल में एक नाबालिक स्कूली बोर्डिंग छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले में राजनैतिक दवाब से लेकर कई मीडिया वालो का इस मामले में दवाब बनाये जाना भी काम नहीं किया जिसके बाद इस थाने में ऐसा कुछ हुआ जिसकी हर कोई मिसाल कायम कर रहा है

देहरादून उत्तराखंड में थाना सहसपुर के प्रभारी एक बार फिर लाइम लाइट में आये है इस बार उनके द्वारा एक ऐसे सामाजिक काम को लेकर आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिसकी समाज कोई इजाजत नहीं देता ऐसा कोई पहला मामला नहीं है जब सहसपुर के प्रभारी नरेश राठौर अपनी पुलिसिंग के लिए चर्चा में आये हो इससे पहले वो तब चर्चा का केंद्र बिंदु बने थे जब वो प्रेमनगर थाने में पोस्टिंग पर थे उत्तर प्रदेश में जज के बेटे का विवाद हुआ था जिसके बाद पुलिस ने कारवाही करते हुए जज के बेटे को गिरफ्तार किया था जिसके विरोध में थाने में जाकर महिला जज ने हंगामा काटा था जिसका वीडियो सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ था जिसके बाद कारवाही करते हुए नरेश राठौर ने मुकदमा दर्ज़ किया था

यही नहीं सहसपुर के प्रभारी नरेश राठौर को एक ऐसे पुलिस दरोगा के रूप में जाना जाता जिसको पुलिस महकमा भी काफी सही नज़र से काम करने वाला कहता है बताया जाता है नरेश राठौर जिस जगह पर भी पोस्टिंग पर रहते है वहाँ की दीवारों पर लिखा होता ,सच प्रतड़ित हो सकता है लेकिन पराजित नहीं, अगर आपको किसी भी थाने में ये लिखा हुआ दिख जाये जो समझ ले यहाँ पर नरेश राठौर की पोस्टिंग होने के बाद यहाँ पर रह चुके है नरेश राठौर के भाई अशोक राठौर भी पुलिस में दरोगा के रूप में वर्तमान में देहरादून कोतवाली में पोस्टिंग है

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