उत्तराखंड में परिवारवाद से टिकट मिला तो कांग्रेस को नुकसान

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उत्तराखंड में परिवारवाद से टिकट मिला तो कांग्रेस को नुकसान 
देहरादून,उत्तराखण्ड राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेताओं के चेहरे पर अचानक हवाईयां उड़ना शुरू हो गया है। इन हवाईयो के उड़ने के पीछे पीसीसी अध्यक्ष का हाथ है। हर कोई नेता अब इस बात की चिंता कर रहा है कि यदि पीसीसी अध्यक्ष के कथन अनुसार परिवार के एक ही व्यक्ति को टिकट मिला तो और का क्या होगा। राज्य में अगर कांग्रेस के अंदर नयी ऊर्जा को लेकर आना है तो जमीनी पकड़ वाले कांग्रेस नेतायो को चुनावी समर मे लाकर विधानसभा का चुनाव लड़ना होगा
क्योंकि एक परिवार के कई-कई सदस्य टिकट की लाईन में लगे हुए हैं। मात्र एक टिकट से बात बनने वाली नहीं है। इसलिए हर बड़ा नेता अब इस जोड़ तोड़ में लग गया है कि प्रदेश अध्यक्ष की एक न चले और वह लोग जो चाहा रहे हैं वो हो जाए। हालांकि उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश अध्यक्ष की पहले दिन से ही नहीं चल रही। उन्होने अब तक जो भी निर्देश जारी किए उनमें से एक का भी पालन नहीं हुआ। फिर चाहे मंत्री विधायको के सम्पत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने की बात रही हो या फिर कांग्रेस मुख्यालय में गनर के साथ आने पर प्रतिबंध् की। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का एक भी आदेश उत्तराखण्ड में परवान नहीं चढ़ा है। इसलिए यह माना जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने एक परिवार में एक टिकट की जो बात कही है वह भी ग्रास रूट पर सफल नहीं होगी लेकिन नेताओं के दिल में कही न कही इस बात का डर जरूर है कि टिकट वितरण हाईकमान को करना है और किशोर उपाध्याय की हाईकमान पर अच्छी पकड़ है। कही ऐसा न हो कि वह श्री उपाध्याय की बात को हल्के में ले और वास्तविकता इससे इतर हो जाए। हाईकमान उनके कहने पर एक परिवार में यदि एक ही टिकट देगा तो यह बड़ी परेशानी वाली बात खड़ी हो जाएगी। इस समय सूबे के मुखिया हरीश रावत के अपने ही परिवार में हर किसी को टिकट चाहिए। जहां उनकी धर्म पत्नी रेणुका रावत हरिद्वार से डा. रमेश पोखरियाल निशंक के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है वही अब 2017 में उनकी पुत्री अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से टिकट का इंतजार कर रही हैं। पिछले कई महीने से वह वहां काफी सक्रिय हैं। हर रोज मिटिंग, जनसंपर्क चल रहे हैं। हरिश रावत खुद अपना फोकस हरिद्वार में किए हुए हैं तभी तो वह अल्पसंख्यक वोटरों को रिझाने के लिए अविवेकपूर्ण निर्णय ले रहे हैं। हाल ही में उन्होने जुमे की नवाज के लिए 90 मिनट अल्पकालीन अवकाश घोषित कर डाला था लेकिन भारी विरोध् के चलते उन्हें बैकफूट पर आना पड़ा था अब वह अपने ही बयान को काटने में लगे हुए है। और ठीकरा मीडिया के सिर फोड रहे हैं। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि जुमे की नमाज के समय सरकारी मुलाजिमो को अल्पकालिन अवकाश का फैसला सिर्फ रमजान के दौरान होने वाली जुमे की नमाज के लिए ही लिया गया है। छुटटी विवाद का ठीकरा मीडिया के सिर फोडते हुए उन्होने यहां तक कह डाला कि मीडिया में आदेश का एक हिस्सा ही आया। पूरा आदेश नहीं पढ़ा गया। खैर मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक वोटरो को रिझाने के लिए कुछ भी कर रहे हों मगर सच्चाई तो यह है कि उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने एक परिवार में एक टिकट देने की बात कहकर मुख्यमंत्री के माथे पर भी चिंता की लकीर खींच दी है। उनकी पुत्री अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से टिकट की इच्छा जता रही है तो उनके दोनो पुत्र विरेंद्र रावत एवं आनंद रावत भी टिकट का इंतजार कर रहे हैं। आनंद रावत तो यहां तक कह चुके हैं कि उन्होने किसी भी स्थान से टिकट के लिए दावेदारी नहीं की है। लेकिन यदि किसी बागी के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाता है तो वह उसके लिए तैयार हैं। निश्चित रूप से वह सीट जीत लेंगे वहीं दूसरी ओर उत्तराखण्ड राज्य की वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश पुत्र सुमित हृदयेश भी टिकट का इंतजार कर रहे है और वह इस समय सक्रिय होकर जन-जन तक अपनी आवाज बुलंद कर रहे है। वहीं उत्तराखण्ड राज्य के कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य भी टिकट की दौड़ में हैं। उत्तराखंड में एक बार फिर किशोर के पारिवारिक बयान के बाद कांग्रेस में हलचल तेज़ हुई है इस बयान को राजनैतिक रूप से भी काफी मजबूत कहा जा रहा है हल्की किशोर ने इसको अपनी निजी राय कहा थे लेकिन मीडिया में अचानक इस खबर को हवा दी गयी
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