उत्तराखंड में किसानो की मौत पर राजनीती का तमाशा

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उत्तराखंड में किसानो की मौत पर राजनीती का तमाशा Uttarakahnd farmar bank loan Uttarakahnd farmar bank loan देहरादून उत्तराखंड में भाजपा सरकार के लिए किसानो की मौत का मामला कांग्रेस के लिए राजनैतिक तीर बन गया है इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस आगामी 6 जुलाई को भाजपा सरकार के खिलाफ धरना देने जा रही है उत्तराखंड में किसानो की मौत को लेकर कई मामले सामने आ चुके है लगातार उत्तराखंड में किसानो की मौत को लेकर भाजपा सरकार भी इसके तोड़ में जुट गयी है बताया जा रहा है की उत्तराखंड में किसानो पर बैंको का क़र्ज़ बढ़ता जा रहा है राज्य में किसानो की मौतों को लेकर सवाल ये उठ रहा है की क्या राज्य सरकार किसानो का क़र्ज़ माफ़ कर दे लेकिन अगर ऐसा होता तो इस मुद्दे पर सरकार क़र्ज़ माफ़ी किये जाने के मामले को विधानसभा में भाजपा विधायक सुरेंद्र जीना के सवाल पर जरूर कोई कदम उठा लेती लेकिन विधानसभा में सवाल तो उठा लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष सवाल को अच्छा बता कर बातें तो करता रहा लेकिन हुआ कुछ नहीं

उत्तराखंड में किसानो की मौत को लेकर लगातार मामलो के बढ़ जाने के बढ़ उधम सिंह नगर के जिला अधिकारी नीरज खेरवाल ने एक समिति बना कर किसानो के परिवारों को सहायता दिए जाने की बात कही है लेकिन सवाल ये उठ रहा है की जब किसानो की मौत हो गयी उसके बाद ही सरकारी अमला नींद से क्यों जागा

बैंक कर्ज अदायगी का अंतिम नोटिस किसान के घर पहुंचते ही काश्तकार के दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। किसान ने अपने भतीजे के संयुक्त खाते के साथ बैंक कर्ज लेकर दो साल पहले खेती करने के लिए ट्राली ली थी। इसके लिए उसने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से सवा दो लाख रुपये का कर्ज लिया था। मौत के 3 दिन पहले ही उसे बैंक का नोटिस मिला था।
ग्राम बिरिया भूड़ नानकमत्ता के निवासी 70 वर्षीय मस्सा सिंह पुत्र गुरमीत सिंह ने अपने भतीजे जगजीत सिंह के साथ मिलकर वर्ष 2015 में सितारगंज स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से दो लाख 25 हजार का कर्ज लिया था। मृतक के भतीजे जगजीत सिंह ने बताया कि तीन दिन पहले डाक के जरिये बैंक का नोटिस घर पहुंच था।

नोटिस आने के बाद से ही मस्सा सिंह तनावग्रस्त हो गए थे। सोमवार को दिन में चाय पीने के बाद अचानक वह आंगन में गिर पड़े। नब्ज टटोलने पर पता चला कि उनकी मौत हो गई। वहीं, जिलाधिकारी डॉक्टर नीरज खैरवाल ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

गौरतलब है कि कंचनपुर गांव का किसान रामअवतार शनिवार रात खेत में पानी लगाने की बात कहकर घर से निकला था। दो दिन पूर्व उसे बैंक से नोटिस जारी किया गया था। राम अवतार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एक लाख 97 हजार व बैंक ऑफ बड़ौदा का पौने दो लाख रुपये कृषि ऋण बकाया था। इसको लेकर वह तनाव में चल रहा था।

शनिवार की रात उसने अपने ही खेत में यूके लिप्टिस के पेड़ पर फंदा लगाकर और उस पर झूलकर अपनी जान दे दी। मृतक की 7 पुत्रियां एक बेटा है। इस घटना से उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बताया जाता है कि राम अवतार  के पास ढाई एकड़ जमीन थी, जिससे उसके परिवार की आजीविका चलती थी।

गौरतलब है कि 17 जून को  पिथौरागढ़ के बेरीनाग तहसील के पुरानाथल गांव के सरतोला तोक निवासी सुरेंद्र सिंह (60) पुत्र राम सिंह ने कर्ज के चलते उसने जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद ग्रामीणों व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरीनाग में ऋण माफी की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया।

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