गांव से पलायन रोकने को युवाओं ने की अनोखी पहल

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गांव से पलायन रोकने को युवाओं ने की अनोखी पहल

नैनीताल: पैतृक गांव मे पलायन के चंद परिवार बच गए तो युवक ने ठान लिया कि वह पढ़ाई से अर्जित ज्ञान का उपयोग उत्तराखंड के विकास मे करेगा। उसकी इस मुहिम मे दोस्त भी शामिल हो गया। दोनो ने इसके लिए कंपनियो की नौकरी छोड़ी और मशरूम उत्पादन का धंधा शुरू कर दिया। आर्थिक दिक्कते भी आई मगर दोस्तो ने मदद की, परिजनो ने विरोध किया फिर भी दोनो ने स्वरोजगार अपनाकर पलायन कर रहे युवाओ के लिए नजीर पेश की।
मनान अल्मोड़ा निवासी पंकज भट्ट व तल्लीताल नैनीताल निवासी मयूर साह की दोस्ती मिसाल है। दोनो ने 2010 मे जीआईसी नैनीताल से इंटर किया। इसके बाद पंकज ने उत्तराखंड तकनीकी विवि से बीटेक किया तो मयूर ने कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल सर्विसेज से डिप्लोमा हासिल किया। पंकज की रुद्रपुर सिडकुल मे तो मयूर की दिल्ली मे प्राइवेट कंपनी मे जॉब लग गई।
पंकज के अनुसार कंपनियो मे मन नही लगा तो दोनो एक साथ 21 जनवरी को नैनीताल आ गए। एक सप्ताह तक चिंतन-मनन किया और मार्च मे मशरूम उत्पादन की कार्ययोजना तैयार कर डाली। नौकरी प्लान के तहत छोड़ी गई। विचार आया कि अपने उत्तराखंड के लिए कुछ करना है।

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