उत्तराखंड में राज्य सरकार की आय में हुई बढ़ोतरी

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उत्तराखंड में राज्य सरकार की आय में हुई बढ़ोतरी
देहरादून राज्य में पिछले वर्ष की तुलना में योजना व्यय के साथ ही आय प्राप्तियों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। वित्त विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस वर्ष अभी तक 5709 करोड़ रूपए व्यय किए जा चुके हैं जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 4590 करोड़ रूपए खर्च किए गए थे। बाह्य सहायतित परियोजनाओं में अभी तक लगभग 1000 करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं जबकि पिछले वर्ष 600 करोड़ रूपए व्यय किए गए थे। राज्य सरकार को पिछले वर्ष की तुलना में अपने महत्वपूर्ण स्त्रोतों से आय प्राप्तियों में भी वृद्धि हुई है। इस वर्ष अभी तक 6300 करोड़ रूपए की आय प्राप्तियां रही हैं जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 5700 करोड़ रूपए की आय प्राप्तियां हुई थीं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को सचिवालय में बजट के क्रियान्वयन पर विभिन्न विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि गत वर्ष की तुलना में व्यय के साथ ही आय प्राप्तियों में वृद्धि हुई है, फिर भी इस पर और अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। विŸाीय वर्ष की समाप्ति में मात्र तीन माह शेष हैं, इसलिए और अधिक तेजी व कार्यकुशलता से काम किए जाने की जरूरत है। केंद्र प्रवर्तित स्किमों में पिछले वर्ष के 1955 करोड़ रूपए की तुलना में 1744 करोड़ रूपए की राशि ही प्राप्त हुई है। मुख्य सचिव प्रत्येक 15 दिनों में सीएसएस की समीक्षा करें और विभागीय सचिव भी केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों के निरंतर सम्पर्क में रहें। इस वर्ष रिसोर्स मोबिलाईजेशन पर काफी काम किया गया है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि हमारी विकास संबंधी आवश्यकताओं व भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आय के संसाधनों में वृद्धि हो। वन विकास निगम जनवरी तक अपने स्टाक का 70 प्रतिशत निकालने का प्रयास करे। ऊर्जा विभाग लाईन एंड लाॅस में 1 प्रतिशत कमी लाए। आबकारी विभाग में अवैध शराब की आवक पर रोक के लिए सघन अभियान चलाए। वाटर टैक्स का एक्ट पास हो चुका है। इस वर्ष मार्च तक वाटर टैक्स से 30 करोड़ रूपए की राशि मिलनी चाहिए। जबकि अगले वर्ष 300 करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा जाए। जलसंस्थान भूमिगत जल के दोहन का जलमूल्य वसूल किए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार करे।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि नगर निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए जाने की जरूरत है। सचिव, शहरी विकास राज्य के नगर निकायों के अध्यक्षों के साथ बैठक कर इसकी कार्ययोजना बनाएं कि किस प्रकार नगर निकायों के आर्थिक स्त्रोंतों को बढ़ाया जा सकता है। जीएमवीएन, केएमवीएन, सिडकुल, जलसंस्थान, जलनिगम, यूपीसीएल, यूजेवीएनएल कामर्शियल एप्रोच से काम करें। सिडकुल, खानपुर के नजदीक इंडस्ट्रीयल एरिया विकसित करने की सम्भावनाओं का अध्ययन करे।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि कुछ सेक्टर ऐसे हैं जहां हमें काम करना ही होगा। सोशियल ग्रोथ पर ही इकोनोमिक ग्रोथ निर्भर करती है। जिन सामाजिक योजनाओं में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं वहां विशेष ध्यान दिया जाना है। दुग्ध प्रोत्साहन योजना, प्रतिभावान बालिकाओं को लेपटाप योजना, विभिन्न सामाजिक सुरक्षा की पेंशन योजनाओं, मेडिकल, कल्चर सेक्टर को प्राथमिकता दी जानी है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि पेरिस सम्मेलन में वन पंचायत दृष्टिकोण को सराहना मिली है। गैर वन पंचायतों के लिए भी समुदाय आधारित योजनाएं बनाई जाए। नगरीय क्षेत्रों में प्रयास किया जाए कि 10 प्रतिशत घरों को ग्रीन टाॅप में लाया जाए। सिंचाई विभाग जीएमवीएन व केएमवीएन के साथ समन्वय कर जलाशय विकसित करने की योजना क्रियान्वित करे। उपनल को प्रेरित किया जाए कि राज्य सरकार से बाहर भी भर्तियां करवाए व ओवरसीज मेनपावर सप्लाई की योजना बनाए। इस वर्ष के बजट में जो भी बचत होती है उसे पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित किया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, डा.रणवीर सिंह, डा.उमाकांत पंवार, सचिव अमित नेगी, एमसी जोशी, डा.भूपिंदर कौर औलख, विनोद शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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