चम्पावत में एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न।

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चम्पावत में एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न।

चम्पावत , बायफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा नाबार्ड के सहयोग से ‘‘क्लाइमेट स्मार्ट एक्शन एण्ड स्ट्रटीजिक इन नार्थ वेस्टर्न हिमालयन रीजन फार सस्टेनबल लाइबलीहुड आॅफ एग्रीकल्चर डिपेन्डेन्ट हिल कम्यूनिटि’’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन सी हाक‘’ में हुआ। रिसर्च फाउण्डेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भरत काकड़े ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए बायफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा वैज्ञानिकों के माध्यम से इसका अध्ययन कर रिपोर्ट सरकार को भेजी जायेगी तथा इसके कारण और निदानों पर भी वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा शोध कर वातावरण के बदलते प्रभाव को इंगित किया जायेगा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि यूनाइटेड नेशन एवं भारत सरकार द्वारा भी इस ओर आठ विषयों पर प्रयास किये जा रहे है जिसमें हिमालयीय क्षेत्र के वातावरण में तेजी से हो रहे बदलाव पर अध्ययन किया जाना भी सम्मिलित है। उन्होंने बताया कि जितनी तेजी के साथ हिमालयीय क्षेत्र में बदलाव हो रहे हैं वह अन्य स्थानों पर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यहां का तापमान आधा डिग्री तक बढ़ गया है जिसके लिए हम तैयार नहीं है और इस ओर प्रयास भी कम हो रहे हैं। उन्होंने वायफ के सम्बन्ध में कहा कि इसमें मुख्य उद्देश्य देश के 15 राज्यों के 150 जनपदों में अच्छी नस्ल की गायों का विस्तार करना है, लेकिन हिमालयीय क्षेत्र के तेजी से बदलते वातावरण को देखते हुए इस क्षेत्र में भी कार्य किये जाने हेतु प्रयास प्रारम्भ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हिमालयीय क्षेत्रों में वातावरण में तेजी से बदलने से कृषि तथा बागवानी पर भी इसका तेजी से प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के मोषम में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण पारंपरिक कृषि एंव बागवानी पर पड़ रहे प्रभाव को कम करने के हेतु बदलते वातावरण के अनुसार विविध आजीविका के संसाधनों को बढ़ावा देना है ताकि पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने के साथ ही तेजी से हो रहे परिवर्तनों को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न पारम्परिक फसलों, पेड़ पौधों एवं मवेशियों आदि को ध्यान में रखते हुए भौगोलिक एवं जैविक विविधता के अनुरूप क्षेंत्रों की विविधता के आकड़ो को एकत्र कर आजीविका एवं विकास के अनुकूल उत्पादन प्रणालियों का समुचित विकास करना है। उन्होंने कार्ययोजना के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि कलस्टर एवं स्थानीय संसाधनों कों और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आंकलन योेजना बनाना, वातारण के अनुसार उपयुक्त प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना, समान भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों के साथ सूचनाओं का आदान प्रदान करना है। उन्होंने परियोजना के घटको के विषय मेें जानकारी देते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन के सकारात्कम प्रभावों के लिए ग्रामीणों को एकजुट कर समूहों का निर्माण किया जायेगा। जलवायु संबन्धी खतरों पर जागरूक व्यक्तियों के सहयोग क्षेत्रीय जनता को को जागरूक किया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक जल स्त्रोंतों का संरक्षण संवर्धन करने के साथ ही वर्षा जल संग्रहण सहित जल संसाधनों का उचित विकास किया जायेगा। कार्यशाला के संचालन उपमुख्य कार्यक्रम संयोेजक डीके तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी हेमन्त कुमार वमा, सीजीएम नाबार्ड डीएन नागर,एजीएम नाबार्ड जुगल किशोर, उपाध्यक्ष बीएआईएफ भरत काकड़े, मुख्य कार्यक्रम संयोजक उत्तराखण्ड आरएम शुक्ला, जिला उद्यान अधिकारी एचसी तिवारी आदि उपस्थित थे।

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